१०५ दिन बाद घाटी में  पटरी पर लौटा जीवन

अनुच्छेद ३७० हटाए जाने के बाद १०५ दिनों में पहली बार सोमवार को कश्मीर घाटी में जनजीवन पूरी तरह से पटरी पर लौटता दिखा। सोमवार को यहां दुकानें दोपहर में भी खुली रहीं। साथ ही समूचे कश्मीर में सार्वजनिक परिवहन के कई माध्यम बहाल कर दिए गए हैं। मिनी बसों ने कई मार्गों पर चलना शुरू कर दिया।

राज्य का विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने के केंद्र के फैसले के खिलाफ लंबे बंद के बाद घाटी में जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने की ओर बढ़ रहा है। सोमवार को जब परिवहन सेवाएं शुरू हुईं और दोपहर में भी दुकानें खुलीं तो लंबे समय के बाद लोगों ने राहत की सांल ली। अभी तक उग्रवादियों की धमकी के कारण दुकानदार सुबह ७ से ११ और शाम को ५ से ८ के बीच ही दुकानें खोल पाते थे।
अधिकारियों ने बताया कि जिलों के अंदर और अन्य जिलों के बीच संपर्क में भी खासा सुधार हुआ है। जिलों के बीच में कैब सेवा पहले से ही चल रही थी लेकिन पिछले कुछ दिनों में समूची घाटी में जिलों के अंदर भी कैब सेवा में खासा इजाफा हुआ है। इससे पहले रविवार को घाटी में रेल सेवा को पूरी तरह से बहाल कर दिया गया था।

उधर, सरकारी कार्यालयों में ब्रॉडबैंड सेवाओं को बहाल कर दिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि कश्मीर विश्वविद्यालय में इंटरनेट सेवाएं भी शुरू कर दी गई हैं। सूत्रों के मुताबिक घाटी में पूरी तरह से ब्रॉडबैंड सेवाओं के इस सप्ताह के अंत तक बहाल होने की संभावना है।
अधिकारियों ने बताया कि शहर में यातायात जाम की समस्या को देखते हुए रेहड़ी वालों को सोमवार को खड़े होने की इजाजत नहीं दी गई। उन्हें खासकर कारोबारी केंद्र लाल चौक के आसपास रेहड़ी लगाने नहीं दी गई जहां पर लगातार लंबा जाम लग रहा है।