१७ साल का सूखा खत्म

क्रिकेट दुनिया में तेजी से उभरी जिम्बाब्वे की टीम उसी तेजी से खत्म भी हुई थी। वो अपने अस्तित्व को बचाने के लिए सालों से कोशिश में लगी थी मगर पिछले १७ सालों से उसे टेस्ट में एक भी जीत नसीब नहीं हो पा रही थी। यहां तक कि उसे नवजात टीमें भी मात देते हुए उसके क्रिकेट इतिहास को ही खराब किए जा रही थीं। एक बारगी तो उसे टेस्ट टीम मानने से ही इंकार किया जाने लगा था मगर इस टीम का अपना हौसला था जो अब जाकर पूरा भी हुआ और अपनी टीम को दुनिया के पटल पर लाने का एक काम भी हुआ, जब उसने टेस्ट मैच में बांग्लादेश जैसी टीम को हराया। जिम्बाब्वे की इस जीत में टेस्ट डेब्यू कर रहे ब्रेंडन मावुता और सिकंदर रजा की स्पिनर जोड़ी का कमाल रहा, जिन्होंने मिलकर ७ विकेट चटकाए। जिम्बाब्वे ने १४ सितंबर २०१३ के बाद पहली बार कोई टेस्ट मैच जीता है, तब उसने पाकिस्तान को हरारे टेस्ट में २४ रन से हराया था। इतना ही नहीं उसने विदेशी धरती पर १९ नवंबर २००१ के बाद पहली बार कोई टेस्ट मैच जीता है। इस जीत के बाद जिम्बाब्वे ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में १-० की बढ़त हासिल कर ली। ३२१ के टारगेट का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की टीम ने चौथे दिन २६/० के स्कोर से आगे खेलना शुरू किया। लंच के समय तक बांग्लादेश का स्कोर १११/५ था। डेब्यूटेंट आरिफुल हक (३८ रन) ने दूसरी पारी में भी उपयोगी पारी खेली लेकिन दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे, जिसकी वजह से बांग्लादेश को यह मैच गंवाना पड़ गया।