१८ अध्यायों में समग्र जीवन-दर्शन, गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी

मार्गशीर्ष माह में शुक्लपक्ष की एकादशी को कुरुक्षेत्र में भगवद्गीता ग्रंथ का प्रादुर्भाव हुआ। इस वर्ष १८ दिसंबर २०१८ के दिन गीता जयंती महोत्सव का आयोजन होगा। इस ग्रंथ में छोटे-छोटे अठारह अध्यायों में संचित ज्ञान मनुष्यमात्र के लिए बहुमूल्य है। मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को गीता जयंती के साथ ही मोक्षदा एकादशी भी मनाई जाती है। मोक्षदा एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति को मोक्ष प्राप्ति की प्राप्ति होती है। गीता जयंती के दिन श्रीमद्भगवद्गीता की पूजा और गीता पाठ करना चाहिए। विधिपूर्वक गीता व भगवान विष्णु की पूजा करने और यथा शक्ति दान करने से पापों से मुक्ति मिलती है तथा शुभ फलों की प्राप्ति होती है। यही नहीं गीता जयंती के दिन भगवान श्री विष्णु का पूजन करने से आत्मिक शांति व ज्ञान की प्राप्ति होती है व मोक्ष मार्ग प्रश्स्त होता है।
गीता का संदेश
आज से लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान दिया और तबसे यह दिन भारतीय संस्कृति का एक स्वर्णिम अध्याय बना हुआ है। पूरे विश्व में गीता ही एक ऐसा ग्रंथ है, जिसकी जयंती मनाई जाती है। गीता ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर अर्जुन को युद्ध के लिए प्रेरित किया। भगवान श्रीकृष्ण के इस ज्ञान ने मानव को जीवन जीने की हिम्मत दी है। भगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर, विश्व के मानव को गीता के ज्ञान द्वारा जीवनाभिमुख बनाने का प्रयास किया है। गीता मानव मात्र को जीवन में प्रत्येक क्षण आने वाले छोटी-बड़ी समस्याओं के सामने हिम्मत से खड़े रहने की शक्ति देती है।
गीत का रहस्य
गीता में अर्जुन के मन में उठने वाले विभिन्न सवालों के रहस्यों को सुलझाते हुए भगवान श्री कृष्ण उन्हें सही एवं गलत मार्ग का निर्देश प्रदान करते हैं। संसार में मनुष्य कर्मों के बंधन से जुड़ा है और इस आधार पर उसे इन कर्मों के दो पथों में से किसी एक का चयन करना होता है। कृष्ण के उपदेशों को प्राप्त कर अर्जुन उस परम ज्ञान की प्राप्ति करते हैं जो उनकी समस्त शंकाओं को दूर कर उन्हें कर्म की ओर प्रवृत्त करने में सहायता प्रदान करती है। गीता के विचारों से मनुष्य को उचित बोध कि प्राप्ति होती है। वर्तमान में इस ज्ञान की प्राप्ति से अनेक विकारों से मुक्त हुआ जा सकता है।
क्या है कथा?
पद्मपुराणमें भगवान श्रीकृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर से कहते हैं-इस दिन तुलसी की मंजरी, धूप-दीप आदि से भगवान दामोदर का पूजन करना चाहिए। मोक्षदा एकादशी बड़े से बड़े पातकों का नाश करने वाली है। इस दिन उपवास रखकर श्रीहरिके नाम का संकीर्तन, भक्तिगीत, नृत्य करते हुए रात्रि में जागरण करें। पूर्वकाल में वैखानस नामक राजा ने पर्वत मुनि के द्वारा बताए जाने पर अपने पितरोंकी मुक्ति के उद्देश्य से इस एकादशी का सविधि व्रत किया था। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से राजा वैखानस के पितरोंका नरक से उद्धार हो गया। जो इस कल्याणमयी मोक्षदा एकादशी का व्रत करता है, उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। प्राणियों को भवबंधन से मुक्ति देने वाली यह एकादशी चिन्तामणि के समान समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली है। मोक्षदा एकादशी की पौराणिक कथा पढने-सुनने से वाजपेययज्ञ का पुण्यफल मिलता है। मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन ही कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीताका उपदेश दिया था। अत:यह तिथि गीता जयंती के नाम से विख्यात हो गई। इस दिन से गीता-पाठ का अनुष्ठान प्रारंभ करें तथा प्रतिदिन थोडी देर गीता अवश्य पढ़ें।