" /> ५६ इंच का सीना, फिर भी…, चीनी सामानों का बहिष्कार

५६ इंच का सीना, फिर भी…, चीनी सामानों का बहिष्कार

चीन और हिंदुस्थान में रोज तनाव बढ़ता जा रहा है। फिलहाल सीमा पर लगी आग के शांत होने के लक्षण नहीं दिख रहे। हिंदुस्थान के ६० वर्गमील भूभाग को चीन ने घुसपैठ करके हथिया लिया है, ऐसा आरोप राहुल गांधी ने लगाया है। इससे खलबली मच गई है। पूर्व लद्दाख में प्रत्यक्ष नियंत्रण रेखा पर एक महीने से हिंदुस्थान और चीन की सेना आमने-सामने है। दोनों देशों के सेना कमांडरों में शनिवार को चर्चा हुई। यह चर्चा सकारात्मक रही, ऐसा हमारी ओर से कहा गया, चीन की ओर से नहीं, यह ध्यान रखना चाहिए। ‘जैसे थे’ वाली स्थिति रखने का आग्रह हमारी ओर से ही किया गया, चीन की ओर से नहीं। यह चर्चा कहां हुई? पूर्व लद्दाख के चीन अधिकृत माल्डो में। हमारे अधिकारियों को चीन की सीमा में जाकर चर्चा करनी पड़ी। मतलब जरूरतमंदों की भूमिका में हम वहां गए थे। हिंदुस्थान की ओर से हमारे अधिकारी चर्चा के लिए गए, यह ठीक है।

लेकिन चीन की ओर से कौन आया? वहां के तिब्बत सेना विभाग का प्रमुख। १९६१ के युद्ध में तिब्बत विवाद का ही मुद्दा था। तिब्बत का भूभाग चीन ने निगल लिया है और उसी तिब्बत सेनाप्रमुख की नियुक्ति चीन की ओर से चर्चा करने के लिए की गई। इसी से चीन की मंशा समझ लेनी चाहिए। हम पाकिस्तान को रोज लात मारते हैं क्योंकि यह सीधे हिंदू-मुसलमान का झगड़ा साबित होता है और उसका राजनीतिक फायदा और नुकसान का गणित होता है। लेकिन चीन हमारे देश का रोज एक-एक इंच कुतर रहा है। इस पर हमारे राजनीतिज्ञों को कुछ नहीं लगता। इन दो देशों के बीच जो चर्चा हुई, उसमें हमारे कमांडरों ने चीनियों को स्पष्ट रूप से कहा है कि पैंगोग झील से सेना पीछे हटाओ। जहां निर्माण कार्य किया गया है, उसे तोड़ो। हिंदुस्थान की सेना एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी। हमारी सेना के अधिकारियों ने जो कड़ी भूमिका अपनाई, उसके लिए उसका जितना अभिनंदन किया जाए, कम है। भौगोलिक स्थिति क्या है? पैंगोग झील के पास ८ पहाड़ हैं। दो देशों के बीच सीमा विवाद फिगर ४ से ८ तक का है। हिंदुस्थानी सेना के अधिकार में फिगर ४ तक का प्रदेश है। फिगर ४ से लेकर ८ तक दोनों तरफ के लोग ‘पेट्रोलिंग’ कर सकते हैं। अब चीन फिगर ४ तक पक्की सड़क बनाकर हमारी सीमा तक घुस आया है। चीनी सेना चौथे पहाड़ तक घुस आई है और हमारी सेना को आठवें पहाड़ तक गस्त लगाने से रोक रही है। यह एक प्रकार की चढ़ाई ही है। हिंदुस्थानी सेना अधिकारी ने चीनी अधिकारियों को सुनाया है कि हमारी सेना एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी। लद्दाख में रहनेवाले प्रख्यात शिक्षाविद सोनम वांगचुक कहते हैं, ‘मैं लद्दाख में ही रहता हूं। चीनी सेना आगे बढ़ती आ रही है। ऐसा मैं देख रहा हूं। १९६२ में चीन ने हिंदुस्थान को फंसाया। उस समय हमने क्या किया? लद्दाख में हमारे लड़ाकू विमान घूमते हैं, उसी प्रकार चीन के हवाई जहाज भी घूमते रहते हैं।’ सोनम वांगचुक का कहना सही है। हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे, यह ठीक है। लेकिन पीछे ना हटने के समय चीनी सेना आगे सरकती आ रही है। यह भी कटु सत्य है। लद्दाख के वांगचुक कहते हैं कि १९६२ में चीन ने हमें फंसाया। वांगचुक के इस बयान को सत्ताधीशों को समझना चाहिए। १९६२ में जो हुआ उसका ठीकरा आज भी पंडित नेहरू और गांधी परिवार पर फोड़ना, चीन के विरुद्ध हमारी युद्ध की एकमात्र तैयारी रह गई है। जब राहुल गांधी चीन के बारे में कोई सवाल पूछते हैं तो चीन की समस्या नेहरू के कारण पैदा हुई, ऐसा कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। श्री वरुण गांधी भाजपा के नेता है। पंडित नेहरू उनके भी परनाना हैं। यह नहीं भूलना चाहिए। १९६२ में चीन ने हिंदुस्थान को फंसाया, उसी प्रकार २०१८ में भी फंसाया। चीन के राष्ट्रपति मोदी के गांव में पहुंचे और झूला झूलकर लौट गए तथा दोनों देशों में संबंध सुधरेंगे, ऐसा भी कह गए। लेकिन उसके बाद चीनी सेना ने हमारी सीमा में कई बार घुसपैठ की। पहले डोकलाम और अब लद्दाख में युद्ध की स्थिति पैदा की। यह एक प्रकार का धोखा है। इस धोखे को नेहरू नहीं सह पाए। वांगचुक कहते हैं, ‘यह चीन को सबक सिखाने का सही समय है। चीन में अंतर्गत कलह ऊफान पर है। कोरोना महामारी के पीछे चीन का हाथ होने के कारण पूरी दुनिया चीन से नाराज है। चीन की आर्थिक नसबंदी करने का यह सही समय है।’ वांगचुक कहते हैं, ‘चीनी वस्तुओं का पैसा उनकी सेना के लिए इस्तेमाल होता है। इसलिए चीनी सामानों का बहिष्कार करो। हिंदुस्थान की सरकार चीन के सामानों के आयात पर रोक क्यों नहीं लगाती?’ ऐसा सीधा सवाल वांगचुक करते हैं। एक तरफ ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का ढोल पीटना और दूसरी तरफ चीन के लिए बाजार खोल देना। इससे चीन को आर्थिक बल मिलता है। कोरोना के कारण हिंदुस्थान की अर्थव्यवस्था समाप्त हो चुकी है। बेरोजगारी बढ़ी है और हिंदुस्थान चीनी माल का बाजार खुला करके उसकी राक्षसी महत्वाकांक्षा और साम्राज्यवाद को ताकत दे रहा है। चीनी वस्तुओं के इस्तेमाल पर रोक आवश्यक है और सरकार को इस पर निर्णय लेना ही पड़ेगा। पाकिस्तान से लड़ने के लिए ५६ इंच का सीना चाहिए, ऐसा हमें नहीं लगता। पाकिस्तान चीन का गुलाम है। लेकिन चीन से लड़ने के लिए ५६ इंच का सीना चाहिए और वह प्रधानमंत्री मोदी के पास है। इसलिए चीन से घबराने की जरूरत नहीं। देश चिंता न करे। सीमा पर सेना मुस्तैद है। आज १९६२ का हिंदुस्थान नहीं है। हमारे सैनिकों के हाथ में थाली, चम्मच और मोमबत्तियां नहीं, बल्कि बंदूकें हैं! चीन को यह दिखा देने का यही समय है।