​वापसी आसान नहीं-चित्रांगदा सिंह

अबकी सुरमा चर्चा में है और इस सुरमा से चित्रांगदा सिंह काफी उम्मीद लगाए बैठी हैं। हम जिस सुरमा की बात कर रहे हैं। वह दरअसल अभिनेता दिलजीत दोसांझ और तापसी पन्नू अभिनीत फिल्म है। यह एक बायोपिक है जो हॉकी टीम के कैप्टन संदीप सिंह के जीवन पर आधारित है। इस फिल्म की खास बात यह है कि चित्रांगदा इस फिल्म में दोहरी जिम्मेदारी निभा रही हैं। चित्रांगदा इस फिल्म की निर्माता हैं और बतौर अभिनेत्री भी किरदार निभाएंगी। करियर में महत्वपूर्ण बदलाव और करियर को लेकर चित्रांगदा सिंह से पूजा सामंत ने बात की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश…
`सुरमा’ के निर्माण के बारे में बताएं?
अभिनेत्री के रूप में करियर ठीक चल रहा था लेकिन कुछ न कुछ क्रिएटिव करने का विचार दिलो-दिमाग में आ रहा था। निर्देशक सुधीर मिश्रा जी ने भी मुझे लिखने और निर्माण क्षेत्र में कुछ करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी बीच मेरी मुलाकात इंडियन हॉकी टीम के कप्तान संदीप सिंह से हुर्इं, मैं उनसे पहली बार मिली तो प्रेरित हुई और उसके बाद उनसे कई मुलाकातें हुई जिसके बाद मैंने उनपर फिल्म बनाना उचित समझा।
कितनी सच्चाई है इस कहानी में है?
मैं बतौर निर्माता पहली बार फिल्म बना रही हूं, जो फिल्म `सुरमा’ के रूप में दर्शक देखेंगे। लेकिन इस बात का ध्यान रखना था कि फिल्म में मनोरंजन भी हो, यह डॉक्युमेंटरी न लगे।
लिखने का हुनर आप में कब से है?
जैसे मैंने कहा, मैं अभिनय में करीबन १० वर्षों से हूं। मैंने चंद फिल्में कीं लेकिन मुझे सशक्त फिल्मों की तलाश है। ‘इंकार’ फिल्म की शूटिंग के दौरान सुधीर जी ने मुझे सलाह दी कि कुछ लिखा करो। जब भी वक्त मिलता मैंने कहानियां लिखनी शुरू कीं। मैं अपनी लिखी कहानियों पर फिल्म बनाने के बारे में सोचूं कि संदीप सिंह मिले (हॉकी कप्तान) अपनी लिखी कहानियों को बांधकर रख दिया और संदीप के प्रभावशाली जीवन पर फिल्म बनाने का फैसला ले लिया।
फिल्म निर्माण को लेकर आपके क्या अनुभव रहे?
फिल्म निर्माण आसान नहीं है। मेरे सामने अनुष्का शर्मा, प्रियंका चोपड़ा, कंगना रनोट जैसी अभिनेत्रियों के आदर्श हैं। मैं इन सभी को सैलूट करती हूं। महिलाओं की तादाद हर क्षेत्र में बढ़ती जा रही है। मुझे फाइनेंस मैनेज करना मुश्किल लग रहा था।
फिल्म निर्माण के अनुभव से क्या सीखा?
फिल्म निर्माण हो या टेलीविजन शो का निर्माण, सबसे अहम बात यह कि ये बेहद जिम्मेदारी का काम है। हमारे इस सफर में कई सारे लोग जुड़ जाते हैं, उनके लिए यह नौकरी है और हमें उनकी मेहनत, समर्पण का खयाल रखना होता है। यह तभी संभव है जब हम खुद अनुशासित, जिम्मेदार, मेहनती हों। अभिनेत्री के रूप में मेरी गुडविल, मेरी रिलेशनशिप का निर्माण के काम में उपयोग किया मैंने। सोनी फिल्म्स इसीलिए तो मेरे साथ जुड़े और उन्होंने फिल्म के फाइनेंस को मैनेज किया। फिल्म निर्माण आसान है पर अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करना उतना ही मुश्किल।
सुना है, संदीप सिंह नहीं चाहते थे कि फिल्म में उनका किरदार ‘खान’ ‘कपूर’ जैसे एक्टर्स निभाएं, कितनी सच्चाई है इनमें?
कहां से निकल आती हैं ये खबरें? नहीं, ऐसा नहीं है। संदीप सिंह अपने हॉकी प्लेयर है, जो अपने वास्तविक जीवन में टर्बन धारी है। अब उनके चरित्र को अगर यथार्थ करना होगा तो किसी भी खान यह कपूर हीरो को टर्बन के साथ पेश होना पड़ता। अगर शाहरुख, सलमान जैसे स्टार्स को टर्बन पहनाते तो उनका लुक पूरी तरह से चेंज हो जाता। न तो वो संदीप सिंह के व्यक्तित्व से मैच करते न शाहरुख-सलमान नजर आते। ऐसे में गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ के अलावा कोई दूसरा ऑप्शन नहीं था।
फिल्म निर्माण में वक्त देंगी तो अभिनय करियर को नुकसान हो सकता है?
मैं ऐसी बात नहीं की फिल्म निर्माण के कारण मेरा अभिनय करियर प्रभावित होगा। अनुष्का, प्रियंका, कंगना इनमें किसी का करियर प्रभावित नहीं हुआ? ​