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1.95 करोड़ लाख तीन साल से पड़े रहे खाते में, बच्चे बैठते रहे जमीन पर

एक ओर कोरोना संक्रमण के प्रकोप के चलते बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी और शिक्षक खुद को अपडेट करने में लगे हुए हैं। एक तरफ व्हाट्सऐप के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई कराकर प्रत्येक बच्चे तक पहुंचने के लिए विभाग प्रयासरत है, वहीं दूसरी ओर विभाग की अन्य कार्यप्रणाली इसके उलट है।

सत्र 2017-18 में जारी की गई एक करोड़ 95 लाख रुपए की ग्रांट से विभाग अभी तक बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर नहीं खरीद पाया है। बच्चे इतने सालों से जमीन पर बैठ रहे हैं। शुक्रवार को जब फर्नीचर के विषय में विभाग से जानकारी की गई तो पता चला अभी ई-टेंडर की प्रक्रिया गतिमान है। नए सत्र में बच्चों को फर्नीचर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

बता दें कि सत्र 2017-18 में जिले के 125 विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग नेे अलीगढ़ को एक करोड़ 95 लाख 12 हजार 500 रुपए की ग्रांट जारी की थी। यह ग्रांट योजना के क्रियान्वयन के लिए जारी की गई थी लेकिन तीन साल बीतने के बावजूद अभी तक विभाग द्वारा फर्नीचर तक नहीं खरीदा जा सका है।

पता चला कि अभी तो ई-टेंडर की प्रक्रिया गतिमान है। फरवरी महीने में ई-टेंडर की प्रक्रिया शुरू हुई तो मार्च में लॉकडाउन लग गया। ऐसे में नए सत्र में फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए अधिकारी बयान देते हुए दिखे। अब सवाल उठता है कि एक ओर विभाग तकनीक को अपनाने में लगा हुआ है और दूसरी तरफ बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम समय से नहीं कर पा रहा है।

बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी अनिल कुमार कहते हैं कि  फर्नीचर खरीदने के लिए तीन बार ई-टेंडर किए गए थे। तीनों बार मानक पूरे न होने के चलते ई-टेंडर निरस्त हुए हैं। चौथी बार ई-टेंडर में मानक के अनुरूप फर्नीचर मिला है, जिसे खरीदने की कार्रवाई की जा रही है। ई-टेंडर की प्रक्रिया गतिमान है क्योंकि लॉकडाउन की वजह से ई-टेंडर की प्रक्रिया रुक गई है। ऐसे में लॉकडाउन खुलने के बाद नए सत्र में फर्नीचर खरीद लिए जाएंगे, जिन्हें समय रहते स्कूलों में पहुंचा दिया जाएगा।