" /> 17 वर्षों बाद मिली कलंक से मुक्ति : ख्वाजा युनूस की हत्या के आरोप में निलंबित पुलिसकर्मियों को फिर मिली वर्दी

17 वर्षों बाद मिली कलंक से मुक्ति : ख्वाजा युनूस की हत्या के आरोप में निलंबित पुलिसकर्मियों को फिर मिली वर्दी

घाटकोपर बम ब्लास्ट का आरोपी था ख्वाजा युनूस
हिरासत में हादसे के दौरान हुई थी मौत

मुंबई पुलिस के एपीआई सचिन वजे ने 17 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद पुलिस की वर्दी वापस पहन ली है। गौरतलब है कि इन्हें वर्ष 2003 में निलंबित कर दिया गया था। पुलिस हिरासत में घाटकोपर बम विस्फोट मामले में आरोपी ख्वाजा यूनुस की मौत के लिए एनकाउंटर स्पेशलिस्ट सचिन वजे को दोषी ठहराया गया था। इस मामले में उनके साथ निलंबित किए गए तीन पुलिस कांस्टेबल को भी पुलिस सेवा में ले लिया गया है।
बता दें कि दिसंबर, 2002 में घाटकोपर में बेस्ट बस में धमाका किया गया था। इस आतंकी वारदात में दो लोग मारे गए थे, वहीं कम-से-कम 50 लोग घायल हो गए थे। क्राइम ब्रांच ने 2003 में ब्लास्ट केस में ख्वाजा यूनुस और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। बाद में जांच के लिए यूनुस को संभाजीनगर लेकर जाया जा रहा था, तभी नगर और ख्वाजा के परनेर गांव के पास पुलिस की जीप दुर्घटनाग्रस्त हो गई और वो नहीं मिला। यूनुस की मां ने अदालत में दरख्वास्त करते हुए आरोप लगाया था कि यूनुस को पुलिस द्वारा जान से मारा गया है। इस मामले में सचिन वजे के साथ, कांस्टेबल सुनील देसाई, राजेंद्र तिवारी और ड्राइवर राजाराम निकम को भी गिरफ्तार किया गया था। मामले की जांच सीआईडी द्वारा की जा रही थी, जिसने अदालत में आरोप पत्र भी दायर किया था। इसके बाद सचिन वजे और तीनों पुलिसकर्मियों को सेवा से तुरंत निलंबित कर दिया गया। मामले की विभागीय जांच अदालत के मामले से शुरू हुई। इस बीच सचिन वजे ने इस्तीफा दे दिया और बाद में शिवसेना में शामिल हो गए। हालांकि, उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया। 17 साल बाद सचिन वजे ने वापस ड्यूटी जॉइन कर ली है। तीनों पुलिसकर्मियों को नायगांव में सशस्त्र पुलिस बल में तैनात किया गया है, वहीं राजाराम निकम को मोटर परिवहन विभाग में तैनात किया गया है।