" /> 32 सालों में कश्मीर ने डकारे 14 हजार करोड़ रुपए

32 सालों में कश्मीर ने डकारे 14 हजार करोड़ रुपए

केंद्र सरकार ने इस साल कश्मीर पुलिस के लिए सुरक्षा खर्च के नाम पर 500 करोड़ से अधिक की राशि आबंटित की है। यह पहली बार है कि कश्मीर में सुरक्षा खर्च की राशि को उजागर किया गया है बल्कि अभी तक यह खर्चे कभी सामने ही नहीं आए थे जो कितने थे आप सुन कर हैरान रह जाएंगें कि कश्मीर ने पिछले 32 सालों की अवधि में, जबसे कश्मीर में आतंकवाद फैला है, 14 हजार करोड़ से अधिक की राशि सुरक्षा खर्च के नाम पर डकार ली है।

यही कारण है कि कश्मीर में फैला पाक समर्थक आतंकवाद दिनोंदिन भारतीय सरकार के लिए महंगा साबित हो रहा है। प्रतिदिन इस मद पर होने वाले खर्चों में बेतहाशा होती वृद्धि ने सुरक्षा संबंधी खर्चों को एक हजार करोड़ प्रति वर्ष के आंकड़े तक पहुंचा दिया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर पिछले 32 सालों में सुरक्षा के मद पर केंद्र ने कश्मीर को 14 हजार करोड़ रूपयों का भुगतान किया है। जिसमें सुरक्षाकर्मियों के वेतन, गोला बारूद आदि का खर्चा अभी तक शामिल ही नहीं किया गया है।

आतंकवाद की शुरूआत में आतंक से निपटने को होने वाला सुरक्षा संबंधी खर्चा 100 करोड़ के आंकड़े तक ही सीमित था। लेकिन जैसे जैसे आतंकवाद का दायरा बढ़ा, लोगों ने पलायन करना आंरभ किया तथा राजनीतिज्ञों को असुरक्षा की भावना महसूस हुई खर्चा सुरसा के मुख की भांति बढ़ता चला गया। यह भी एक चौंकाने वाला तथ्य हो सकता है कि कुछ साल पूर्व तक राज्य सरकार सुरक्षा संबंधी मद पर प्रति वर्ष 253 करोड़ की राशि खर्च करती रही थी लेकिन अब अनुमान इस पर एक हजार करोड़ का खर्चा होने का है। फिलहाल यह स्पष्ट ही नहीं है कि क्या आतंकवाद तेजी से बढ़ा है तभी यह खर्चा अनुमानित किया जा रहा है या फिर आने वाले दिनों में आतंकवाद के और बढ़ने की आशंका है?

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जो खर्चा आतंकवाद से निपटने के लिए सुरक्षा मद पर किया जा रहा है उसका रोचक पहलू यह है कि उसमें सुरक्षाकर्मियों का वेतन तथा उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले गोला बारूद की कीमत शामिल नहीं है बल्कि यह खर्चा सुरक्षा उपलब्ध करवाने, सुरक्षाबलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने तथा राहत राशि आबंटित करने के मद पर ही खर्च हो रहा है। अगर जम्मू कश्मीर में आतंकवाद से निपटने के लिए तैनात केंद्रीय सुरक्षाबलों के वेतनों तथा गोला बारूद पर होने वाले अन्य सभी खर्चों को भी जोड़ लिया जाए तो जम्मू कश्मीर में फैला आतंकवाद हजारों करोड़ की राशि प्रति वर्ष डकार रहा है।
जम्मू कश्मीर द्वारा खर्च की जा रही धनराशि, जिसका बाद में केंद्र सरकार द्वारा लगातार भुगतान भी किया जा रहा है, में कुछ ऐसे खर्चे अभी तक नहीं जोड़े गए हैं जिनके प्रति कहा जाता है कि वे भी सुरक्षा संबंधी खर्चे हैं क्योंकि वे आतंकवाद के कारण हो रहे हैं।

ऐसे खर्चों में कश्मीर से पलायन कर देश के अन्य भागों में रहने वाले कश्मीरी पंडित विस्थापित समुदाय के सरकारी कर्मचारियों को दिए जाने वाला वेतन, उनके स्थान पर जिन युवकों को नियुक्त किया गया है उनका वेतन तथा आतंकवाद के कारण ठप्प पड़े हुए सरकारी निगमों के कर्मचारियों को दिए जाने वाले धन को अभी तक शामिल नहीं किया गया है जिन पर प्रति वर्ष 500 करोड़ की राशि खर्च हो रही है। प्रशासन चाहता है कि सुरक्षा संबंधी मामलों पर होने वाले उन खर्चांे की भरपाई भी केंद्र सरकार करे जिन्हें अभी तक सुरक्षा संबंधी  खर्चों में शामिल नहीं किया गया है। और अगर ऐसा हो जाता है तो जम्मू कश्मीर में सुरक्षा संबंधी मामलों पर होने वाले खर्चे में लगभग 5 सौ करोड़ की वृद्धि हो जाएगी।