4 साल का हॉकर जोन, कर दिया जमींदोज!

बनने के ४ साल बाद ही मनपा ने हॉकर्स जोन पर बुलडोजर चला दिया। इससे ७ करोड़ में निर्मित यह हॉकर्स जोन जमींदोज हो गया। पैसे की इस लूट, बर्बादी व अदूरदर्शी निर्णय के कारण मनपा प्रशासन की काफी आलोचना हो रही है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष १९९८ में हुए सड़क विस्तारीकरण में प्रभावितों के पुनर्वसन हेतु कौसा स्थित इंडियल मार्वेâट में जिन ११८ दुकानवाले शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया गया है उनमें सिर्फ ४७ लोगों को ही दुकान की चाबी देकर पुनर्वसन का काम किया जा सका है जबकि ७६ दुकानें बनकर तैयार हैं। मुंब्रा-कौसा में मौजूद सैकड़ों की संख्या में फेरीवालों ने यातायात व्यवस्था को पूरी तरह से जाम कर रखा है। इससे छुटकारा पाने के लिए राष्ट्रीय फेरीवाला नीति के तहत वर्ष २०१३ में ७ करोड़ की लागत से हॉकर्स जोन का निर्माण किया गया था। मुंब्रा शहर से दूर होने की वजह से कोई फेरीवाला यहां पर आने को तैयार नहीं हुआ। परिणामस्वरूप मनपा ने इसे तोड़कर पूर्व के विस्थापितों के लिए दुकान बनाने का काम शुरू कर दिया है। मनपा के इस कदम की घनघोर आलोचना हो रही है और कई तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। पुनर्वसन मसले की जिम्मेदारी संभाल रही स्थानीय नगरसेविका अशरीन राऊत ने बताया कि मनपा की मनमानी के चलते २५ वर्ष से विस्थापित लोगों के लिए तैयार दुकानों की चाबी नहीं दी जा रही है। इसके लिए दर्जनों बार पत्र व्यवहार किया जा चुका है तथा महासभा में आवाज उठाई जा चुकी है। फेरीवालों के संबंध में इनका कहना है कि मुंब्रा में ५० प्रतिशत से ज्यादा फेरीवाले बाहरी हैं। उन्हें स्थानीय नेताओं, बिजली विभाग तथा मनपा अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। पुनर्वसन की समस्या का जल्द समाधान न होने पर स्थानीय विधायक जितेंद्र आव्हाड के मार्गदर्शन में मुंब्रा के सभी नगरसेवकों को साथ लेकर तीव्र आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।