" /> 5 लाख बिहारियों संग भेदभाव!, बांग्लादेश में नहीं हो रहा इलाज

5 लाख बिहारियों संग भेदभाव!, बांग्लादेश में नहीं हो रहा इलाज

कोरोना वायरस से जूझ रहे बांग्‍लादेश के अस्‍पतालों में करीब 5 लाख बिहारी लोगों के साथ भेदभाव का मामला सामने आया है। यहां कोरोना के इलाज के लिए बनाए गए दो अस्‍पतालों ने मलीन बस्तियों में रहनेवाले बिहारी समुदाय के लोगों के इलाज से इनकार कर दिया है। आजादी के दौरान बिहार से बांग्‍लादेश चले गए बिहारी मुस्लिम आज भी जिनेवा कैंप में नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

बिहारी समुदाय के सामाजिक कार्यकर्ता खालिद हुसैन ने बताया कि जि‍नेवा कैंप में कुछ लोगों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद जब उन्हें सरकारी अस्‍पतालों ले जाया गया तो उन्‍होंने यह कहकर भर्ती करने से मना कर दिया कि हालत ‘ज्‍यादा खराब’ नहीं है। एक अन्‍य शिविर में भी कोरोना वायरस से पीड़‍ित मरीज को अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया गया। बता दें कि करीब 5 लाख बिहारी समुदाय के लोग बांग्‍लादेश की 116 बस्तियों में रहते हैं।

इस मामले में बांग्‍लादेश स्वास्थ्य विभाग की नसीमा सुल्‍ताना का कहना है कि किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है। ढाका में 1 करोड़ लोग मलीन बस्तियों में रहते हैं। हमारे पास पर्याप्‍त बेड नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को कोरोना का बहुत कम लक्षण है, उन्‍हें अपने घर पर रहकर इलाज करना चाहिए।

खबरों के मुताबिक जिनेवा कैंप में स्थिति इतनी खराब है कि कोरोना के मरीजों को परिवार के साथ ही आइसोलेट क‍िया जा रहा है। बांग्लादेश में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों सहित अन्य लोगों के बीच कोविड-19 के संक्रमण का खतरा बढ़ने की चेतावनी के मद्देनजर देशव्यापी बंद को पांच मई तक के लिये बढ़ा दिया गया है।