" /> ९५ प्रतिशत की उड़ान

९५ प्रतिशत की उड़ान

कोरोना के कारण लंबित दसवीं की परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया है। १०-१२ दिन पहले बारहवीं की परीक्षा के परिणाम भी घोषित किए गए थे। थोड़े में कहें तो कोरोना के कारण दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों की अटकी हुई सांसें अब खुल गई हैं। दसवीं और बारहवीं सिर्फ बोर्ड की परीक्षा के कारण ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि शैक्षिक करियर के पहले और दूसरे चरण के रूप में विद्यार्थियों और अभिभावकों के जीवन में इसका महत्वपूर्ण स्थान होता है। हालांकि इस बार कोरोना संकट से अन्य सभी क्षेत्रों की तरह शैक्षिक क्षेत्र पर भी संकट के बादल छाए रहे। बारहवीं की परीक्षा तो कोरोना के हमले के पहले ही हो गई थी। लेकिन एसएससी बोर्ड की आखिरी भूगोल विषय की परीक्षा देशभर में लागू लॉकडाउन के कारण अटक गई थी और आखिरकार वो परीक्षा रद्द करनी पड़ी। फिर लॉकडाउन बढ़ता गया। उसका परिणाम दसवीं और बारहवीं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और परिणाम प्रक्रिया पर आना स्वाभाविक था। पहले ही एक पेपर रद्द हो चुका था। उस पर लॉकडाउन का परिणाम रिजल्ट लंबित होने पर कितना पड़ेगा, इसका भी डर था। राज्य के लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों को ऐसी दोहरी चिंता थी। हालांकि १० दिन पहले बारहवीं और बुधवार को दसवीं के लगभग १७ लाख विद्यार्थी इस चिंता से मुक्त हो गए। राज्य सरकार और राज्य शिक्षण मंडल के प्रयास से यह अनिश्चितता और न बढ़े और इसका पूरा खयाल रखा गया। परीक्षा खत्म होने के बाद रिजल्ट तक का समय तनावपूर्ण होता है। इस बार कोरोना जैसी भयंकर बीमारी के कारण एक अलग ही प्रकार की चिंता विद्यार्थियों और अभिभावकों सहित शिक्षा विभाग को भी थी। हालांकि, अब ये सारे तनाव दूर करके विद्यार्थी अपनी शैक्षिक कर्तृत्व के साथ उड़ान भरने के लिए तैयार हो गए होंगे। इस बार राज्य की दसवीं का रिजल्ट गत वर्ष की अपेक्षा १८.२० प्रतिशत ज्यादा है। गत डेढ़ दशकों का यह रिकॉर्ड रिजल्ट है। ९५.३० प्रतिशत लड़के-लड़कियां पास हो गए हैं। मतलब कुल मिलाकर ५ प्रतिशत बच्चे ही अनुत्तीर्ण रह गए। लड़कियों ने बाजी मारने की परंपरा जारी रखी है। सबसे अच्छा रिजल्ट कोकण विभाग का आया है। वहां ९८.७७ प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। उसके बाद कोल्हापुर, पुणे और मुंबई का क्रमांक आता है। सबसे कम मतलब ९२ प्रतिशत रिजल्ट संभाजीनगर विभाग का है। बारहवीं की परीक्षा में थोड़े-बहुत फेरफार के साथ यही तस्वीर देखने को मिली थी। उस रिजल्ट में ४.७८ प्रतिशत की वृद्धि थी। हालांकि, दसवीं के रिजल्ट में १८ प्रतिशत की बढ़ोत्तरी निश्चित तौर पर सुखद खबर कही जाएगी। इस बार रिजल्ट का प्रतिशत बढ़ने में पेपर के औसत अंक, अंतर्गत मूल्यमापन, कृति पत्रिका जैसे कई बातों का परिणाम होगा, फिर भी इससे विद्यार्थियों की सफलता का पैमाना कम नहीं हो जाता। ८०:२० का पैटर्न रद्द करने से परिणाम का प्रतिशत बढ़ा, एक कारण यह है ऐसा कहा जा रहा है। उसमें सच्चाई होगी भी लेकिन सिर्फ इसलिए विद्यार्थियों की सफलता पर उंगली उठाई जा सकती है? आखिरकार, दसवीं की परीक्षा विद्यार्थी जीवन की पहली सीढ़ी होती है। करियर के खुले आकाश में विद्यार्थी इसी परीक्षा के माध्यम से अपने पंखों को पैâलाता है। एक बार दसवीं का द्वार खुल गया तो विद्यार्थी अपने करियर का मार्ग तय करके निश्चिंत हो जाते हैं। इस बार केवल पांच प्रतिशत विद्यार्थी ही इस मार्ग को तय करने में असफल रह गए, जबकि ९५ प्रतिशत करियर को साकार करने के लिए तैयार हो गए हैं। दसवीं के उत्तीर्ण विद्यार्थियों की ९५.३० प्रतिशत का आंकड़ा एक रिकॉर्ड है। राज्य सरकार ने पहले ही दसवीं और बारहवीं के रिजल्ट से ‘अनुत्तीर्ण’ शब्द हटाने की अच्छी पहल की है। अब दसवीं की परीक्षा में विद्यार्थी लगभग ९५ प्रतिशत के रिकॉर्ड के साथ एक कदम आगे बढ़ा चुके हैं। कोरोना संकट के साए के बावजूद विद्यार्थियों ने यह सफलता अर्जित की है। निश्चित तौर पर यह प्रशंसनीय है।