" /> शिवसेना के वर्धापन दिवस पर हुई जबरदस्त वर्चुअल सभा-किसी भी तूफान की परवाह नहीं करता!, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के स्पष्ट उद्गार

शिवसेना के वर्धापन दिवस पर हुई जबरदस्त वर्चुअल सभा-किसी भी तूफान की परवाह नहीं करता!, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के स्पष्ट उद्गार

‘जब तक वीर शिवसैनिकों का मुझे साथ है, तब तक आंधी आ जाए या चक्रवात… मुझे किसी भी तूफान की परवाह नहीं। शिवसेना खुद एक तूफान है। ऐसे संकट की आंधी में भी शिवसेना आगे बढ़ती ही रहेगी।’ ऐसा जोरदार उद्गार कल शिवसेनापक्षप्रमुख व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने व्यक्त किया। इस दौरान शिवसेना की हर शाखा से उद्धव ठाकरे का मार्गदर्शन ले रहे शिवसैनिकों ने एक साथ जयघोष किया।
शिवसेना के ५४वें वर्धापन दिवस के उपलक्ष्य में शिवसेनापक्षप्रमुख व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जूम ऐप द्वारा शिवसैनिकों का मार्गदर्शन किया। दोपहर में उद्धव ठाकरे ने जैसे ही अपने संबोधन की शुरुआत की, वैसे ही ‘जय भवानी, जय शिवाजी’, ‘उद्धव ठाकरे आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं’, ‘आदित्य ठाकरे यांचा विजय असो’, ‘शिवसेना जिंदाबाद’ एवं ‘शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे यांचा विजय असो!’ ऐसे गगनभेदी नारों से हर शाखा गुंजायमान हो उठी।

नारों की यह गूंज कुछ देर चलती ही रही। इस तरह का यह अपूर्व उत्साह किसी भी विशाल सभा को अचरज में डाल देनेवाला था। आखिरकार, उद्धव ठाकरे द्वारा सभी को शांत रहने का आह्वान करने के बाद ही यह गूंज थमी। ‘शिवसेना के लिए तूफान नया नहीं है, लेकिन तूफान में भी जो डटकर खड़ा रहता है वो शिवसैनिक है। इन वीरों का और मर्दों का साथ है तब तक शिवसेना को कोई रोक नहीं सकता, ऐसा उद्धव ठाकरे ने कहा।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर उद्धव ठाकरे के विराजमान होने के बाद यह शिवसेना का पहला वर्धापन दिन रहा। इस अवसर पर उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘शिवसेना के साथ विश्वासघात किया गया। उस क्रोध और भाव में मैंने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी स्वीकार की। मूलरूप से अन्याय को मात देने के लिए ही शिवसेना का जन्म हुआ है और अगर कोई शिवसैनिक पर ही अन्याय कर रहा है तो शिवसैनिक वह कैसे सहन करेगा? इसी अन्याय के चलते मैंने यह जिम्मेदारी स्वीकार की। हमारे साथ राजनीति करने का जो प्रयास हुआ, उसे खत्म करने के लिए ही मैं मुख्यमंत्री बन बैठा हूं। हमने मित्र पर विश्वास किया, शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे की इसी परंपरा को लेकर मैं आगे बढ़ रहा हूं लेकिन हमारे साथ विश्वासघात हुआ। मैं एक ही बात स्पष्ट रूप से कहना चाहूंगा कि हमने मित्रों पर विश्वास किया लेकिन वे इसे हमारी कमजोरी न समझें, यह हमारी संस्कृति है। विश्वास का मोल हम प्राणों से भी अधिक मानते हैं। ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’, यह हमारा सिद्धांत है। और अगर कोई शिवसेना को खत्म होता हुआ देखना चाहता है तो प्राण जाए तो भी चलेगा लेकिन हम ये कदापि सहन नहीं करेंगे।

कवच और वचक
शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे तमाम शिवसैनिकों को कहते थे कि ‘तुम मेरे संरक्षक कवच हो’ इसी का उल्लेख करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसैनिक ही शिवसेना का संरक्षक कवच है। कवच, इस शब्द के अक्षरों का इस्तेमाल करके मैं यही कहूंगा शिवसैनिकों की सभी ओर ‘वचक’ (धाक) है। यही धाक महाराष्ट्र का संरक्षण भी करता है।