" /> एड. अनिल परब की खुली चुनौती… वाझे के सभी आरोप बे-बुनियाद…. किसी भी जांच के लिए तैयार!

एड. अनिल परब की खुली चुनौती… वाझे के सभी आरोप बे-बुनियाद…. किसी भी जांच के लिए तैयार!

 मैं कानूनी तौर पर लड़ूंगा
 धमकियों से नहीं डरता
 मुझे बदनाम करने की साजिश
 मेरे अंदर फिरौतियों का संस्कार नहीं

सचिन वाझे के आरोप मतलब मुझे बदनाम करने की साजिश है। भाजपा नेता पिछले दो दिनों से हवा उड़ा रहे हैं कि महाविकास आघाड़ी सरकार का एक और विकेट लेंगे। भाजपा को पहले से ही पता था कि सचिन वाझे आज पत्र देनेवाला है। मैं अपनी दोनों बेटियों और बालासाहेब ठाकरे की कसम खाता हूं कि सचिन वाझे द्वारा मेरे ऊपर लगाए गए आरोप पूरी तरह से झूठे हैं। परिवहन मंत्री अनिल परब ने ऐसे शब्दों में सचिन वाझे के कथित पत्र में लगाए गए आरोपों को खारिज किया और उन्होंने चेतावनी दी कि मैं कानूनी रूप से लड़ूंगा, मैं इस तरह की धमकियों से नहीं डरता।

अनिल परब ने सचिन वाझे द्वारा एनआईए को दिए गए कथित पत्र के संबंध में प्रेस कॉन्प्रâेंस लेकर सभी आरोपों को नकारा। अनिल परब ने कहा कि मेरा नाम सचिन वाझे द्वारा लिखे गए पत्र में लिया गया है। जून-अगस्त, २०२० में वाझे ने एसबीयूटी ट्रस्टी से ५० करोड़ रुपए लेने का आरोप मुझ पर लगाया है। इसी तरह जनवरी, २०२१ में मनपा के ठेकेदार से २ करोड़ रुपए जमा करने के निर्देश का आरोप मुझ पर लगाया है। ये सभी आरोप झूठे हैं आखिर इतने दिनों में वाझे ने इसके बारे में क्यों कुछ नहीं कहा? परमबीर सिंह के पत्र में भी कहीं इसका उल्लेख नहीं है। लेकिन मुख्यमंत्री को बदनाम करने के लिए मुख्यमंत्री के करीबियों को बदनाम करना जरूरी है। यह एक साजिश का हिस्सा है। ये दोनों बातें झूठी हैं, मेरे पास फिरौती का कोई संस्कार नहीं है। मैं शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे और मेरी दोनों बेटियों की कसम खाता हूं कि ये आरोप झूठे हैं। मुझे बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।
इस मामले की जांच सीबीआई करेगी, इसका पैâसला आते ही यह पत्र सामने आया, जबकि परमबीर सिंह ने बिना किसी का नाम लिए ही पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख को पत्र लिखा था। एनआईए विस्फोटकों की जांच कर रही है, लेकिन अभी तक उनकी खोज पूरी नहीं हुई है। अगर मेरा नार्को टेस्ट किया जाता है तो भी मैं सामना करने के लिए तैयार हूं। मैं एनआईए, सीबीआई, रॉ द्वारा की जानेवाली किसी भी जांच के लिए तैयार हूं। अनिल परब ने स्पष्ट किया कि यह पत्र सरकार को बदनाम करने के लिए है।
…तो पक्षप्रमुख मुझे फांसी पर लटका देंगे
सचिन वाझे हिरासत में है। उसने अभी तक किसी से शिकायत नहीं की है। ऐसे पत्र के माध्यम से सरकार को बदनाम किया जा रहा है। कुछ समय के लिए वाझे शिवसेना में था यह स्वीकार करता हूं। प्रदीप शर्मा भी शिवसेना के उम्मीदवार थे। लेकिन शिवसेना ने वाझे को ऐसा काम करने के लिए कभी नहीं कहा। केंद्रीय मशीनरी को शिवसेना के पीछे लगाया गया है। लेकिन बदनामी के इस लेटर बम से हमारा कुछ नहीं होगा। मुझे पूछताछ के लिए बुलाएं। अगर मैं दोषी हूं, तो मेरे पक्षप्रमुख मुझे फांसी पर लटका देंगे। मैं पूरी तरह कानूनी रूप से लड़ूंगा, मैं लड़ाई के लिए तैयार हूं। उन्होंने भाजपा को भी चेतावनी दी कि वह इस तरह की धमकियों से नहीं डरेंगे।
वाझे के कथित पत्र में क्या है?
तथाकथित पत्र में वाझे के अनुसार, मुझे जून २०२० में पुन: ड्यूटी पर लिया गया। लेकिन कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। अनिल देशमुख ने मुझे बुलाकर बताया कि शरद पवार तुम्हें फिर से ड्यूटी पर लेने के लिए इच्छुक नहीं हैं। देशमुख ने मुझे पवार को मनाने का वादा किया और उन्होंने मुझसे २ करोड़ रुपए मांगे। तब मैंने देशमुख से कहा कि मैं इतने पैसे नहीं दे सकता। इस पर अनिल देशमुख ने कहा कि आप बाद में पैसे दे देना। फिर अक्टूबर, २०२० में मुझे सीआईयू में नियुक्त किया गया। गृहमंत्री ने मुझे सह्याद्री गेस्ट हाउस में बुलाया और याद दिलाया कि तुम्हें २ करोड़ रुपए देना पड़ेगा। उस वक्त भी मैंने असमर्थता दिखाई। फिर नवंबर, २०२० में दर्शन घोडावत नाम के एक व्यक्ति ने मुलाकात की, जो उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बहुत करीबी है।