बजट में होगा सबका घर! वित्त मंत्रालय अफोर्डेबल हाउसिंग का बना रहा प्लान

हर किसी का सपना होता है कि काश, उसका एक सुंदर सा अपना घर होता! अब पैसे वालों का तो ये सपना खैर पूरा हो जाता है पर देश में करोड़ों मध्यम व निम्न वर्ग के लोग ऐसे हैं, जिनके लिए महंगाई के इस जमाने में घर बना पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा है। इनके घर के सपने को पूरा करने के लिए ही मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की थी। पिछली बार कई अड़चनों के बावजूद काफी लोगों को घर मिले। अब मोदी सरकार २.० में इस योजना को रफ्तार देकर हर किसी के घर को पूरा करने की योजना है। इसलिए इस बार बजट में वित्त मंत्रालय अफोर्डेबल हाउसिंग को लेकर खास योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत न सिर्फ ग्रामीण बल्कि शहरी क्षेत्रों के बेघरों के भी अपने घर के सपने को पूरा होने में काफी सहूलियत होगी।
एक बंगला बने न्यारा! दो साल में सभी शहरी लोगों के पास होगा अपना घर
करीब ८२ साल पहले कुंदन लाल सहगल ने एक गीत गाया था, ‘एक बंगला बने न्यारा’! अब अपना एक बंगला हो, यह हर किसी का सपना होता है। मगर यहां बंगला तो छोड़िए आम आदमी के लिए एक वन रूम किचन का मकान भी इस महंगाई में लेना कठिन है। इसीलिए पीएम मोदी ने आम आदमी के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर किसी को घर देने का लक्ष्य रखा है। हालांकि अभी सरकार लक्ष्य से पीछे चल रही है मगर अनुमान है कि इस बजट में सरकार ‘सबको घर’ की अपनी योजना को रफ्तार देगी।
देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी शुक्रवार को बजट पेश करनेवाली हैं। इस बजट में पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्‍ट ‘आवास योजना’ में तेजी लाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं। दरअसल, बीते कुछ महीनों से लगातार ऐसी रिपोर्ट आ रही हैं कि मोदी सरकार की ‘पीएमएवाई’ की रफ्तार में सुस्‍ती आ गई है। हालांकि सरकार के केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी का दावा है कि २ साल पहले ही लक्ष्‍य हासिल कर लिया जाएगा। बता दें कि पीएम मोदी ने कहा था कि २०२२ में देश की स्वतंत्रता की ७५वीं सालगिरह मनाने तक सबके लिए आवास योजना के तहत देश के सभी परिवारों के पास उनका अपना घर होगा।
बीते मार्च महीने में रियल स्टेट सेक्‍टर की समीक्षा करने वाली एनारॉक की एक रिपोर्ट ने योजना की रफ्तार पर सवाल खड़े कर दिए। इस रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मंजूर सस्ते घरों में सिर्फ ३९ फीसदी घर अब तक बन पाए। इस रिपोर्ट में कहा गया, ‘पीएमएवाई के तहत सस्ती आवासीय परियोजना की प्रगति की रफ्तार सुस्त है। आवासीय और शहरी मामलों के मंत्रालय के अनुसार, पीएमएवाई के तहत मंजूर ७९ लाख घरों में से अब तक सिर्फ ३९ फीसदी घरों का निर्माण ही पूरा हुआ है।’
रिपोर्ट के मुताबिक देश के ७ बड़े शहरों में नई आवासीय इकाइयों की आपूर्ति में पिछले पांच वर्षों में ६४ फीसदी की कमी आई है। बता दें कि साल २०१४ में ५.४५ लाख आवासीय इकाइयां थीं। यह आंकड़ा २०१८ में १.९५ लाख रह गई। रिपोर्ट में कहा गया कि घरों की बिक्री पिछले ५ साल में २८ फीसदी घट गई है। साल २०१४ में जहां ३.४३ लाख घरों की बिक्री हुई, वहीं पिछले साल २.४८ लाख घर बिके।
हरदीप सिंह पुरी ने बीते दिसंबर महीने में एक बयान दिया था। इस बयान में उन्‍होंने दावा किया था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सबको आवास मुहैया करवाने का लक्ष्य २०२२ की समय-सीमा से २ साल पहले हासिल हो जाएगा। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक राष्ट्रीय शहरी आवास निधि के तहत पीएमएवाई के लिए खासतौर से अतिरिक्त बजटीय संसाधन के रूप में ६०,००० करोड़ रुपए प्रदान किए गए हैं। दरअसल, नोटबंदी के बाद से रियल एस्‍टेट सेक्‍टर बुरे दौर से गुजर रहा है। ऐसे में पजेशन में देरी और घरों की आपूर्ति बढ़ने जैसी कई चीजें हैं जो बाधा के रूप में सामने खड़ी हैं।
हेल्थ, लाइफ इंश्योरेंस की तर्ज पर होम इंश्योरेंस प्रीमियम पर छूट मिल सकती है। अलग सेक्शन या इनकम टैक्स में ८०जी की लिमिट बढ़ाकर छूट दी जा सकती है। सरकार अफोर्डेबल होम इंश्योरेंस पर भी विचार कर सकती है। होम इंश्योरेंस का हिंदुस्थान में काफी कम चलन है। आपदा, दुर्घटना के जोखिम से निपटने में मदद होगी।
बैंकिंग को मजबूत करना
सरकार बैंकिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाने जा रही है। इसमें प्रमुख है बीमार व कमजोर बैंकों का दूसरे बैंकों में विलय। हाल ही में विजया बैंक और देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय कर सरकार अपने मंशा जता चुकी है। होम लोन के ब्याज में छूट बढ़ाने की योजना है ताकि लोग घर खरीदने के प्रति उत्साहित हो सकें। इसके अलावा ४ बड़े बैंकों को सुचारु बनाने के लिए कुछ निधि भी मुहैया कराए जाने की योजना है। इसके अलावा सरकारी बैंकों के फंड्स का पुनर्पूंजीकरण भी किया जाना है।
मुंबई में भी मिलेगा आशियाना
मुंबई महानगर में इस समय बड़ी संख्या में बेघर हैं। ये किराए के घरों में रहते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि २०२० तक सभी शहरी बेघरों के अपने आशियाने का सपना पूरा कर देना। यह २०२२ के निधारित लक्ष्य से २ साल पहले है। इस दौरान सरकार को देश के शहरी क्षेत्रों में एक करोड़ घर बनाना है। एक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च २०१९ तक ७९.७८ लाख घर स्वीकृत हुए थे। इनमें से ४७ फीसदी घर या तो बन चुके हैं या उनमें लोग रहने लगे हैं। मई २०१९ तक शहरी क्षेत्र में ८०.९६ घर स्वीकृत हुए जिनमें ६१ फीसदी कंप्लीट हो चुके थे या लोग उनमें रहने लगे थे।
दूर करनी हैं रुकावटें
प्रधानमंत्री आवास योजना में कई श्रेणियां हैं जिनके तहत अपने घर का सपना पूरा हो सकता है। पहली श्रेणी के तहत एक झोपड़े में रहनेवाले शख्स को खुद की जमीन पुनर्विकास के लिए विकासक को देने पर १ लाख रुपए मिल सकते हैं। दूसरी श्रेणी में क्रेडिट-लिंक सब्सिडी के तहत २० साल के लिए ६ लाख रुपए तक के कर्ज पर ब्याज में ६.५ फीसदी की छूट मिलती है जो ९ फीसदी तक हो सकती है। तीसरी श्रेणी में ईडब्ल्युएस श्रेणी वालों को केंद्र १.५ लाख रुपए देता है। इसमें २५० घर कम से कम होने चाहिए और ३५ फीसदी इकाई होने चाहिए।