महाराज बिकेगा, बादशाह टिकेगा! शुरू हुई एयर इंडिया को बेचने और बीएसएनएल को बचाने की कवायद

देश की प्रमुख विमानन कंपनी एयर इंडिया को महाराजा कहा जाता है। यह अलग बात है कि पिछले एक दशक में इस महाराजा की हालत काफी दयनीय हो चुकी है। दूसरी तरफ कभी दूर संचार के क्षेत्र में अपनी बादशाहत रखनेवाली बीएसएनएल और एमटीएनएल जैसी सरकारी कंपनियां भी बीमार हो चुकी हैं। मगर सरकार ने इन कंपनियों के प्रति जो रवैया अपनाया है उससे लगता है कि महाराजा बिकेगा जबकि बादशाह टिकेगा। खबर है कि सरकार एयर इंडिया की अपनी १०० फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है जबकि बीएसएनएल और एमटीएनएल का विलय कर इसे बचाने की कोशिश की जा रही है।
बता दें कि दो दिन पहले लोकसभा में भाजपा के सांसद राजीव प्रताप रूडी ने बीएसएनएल को लेकर सवाल खड़े किए थे जिसका जवाब केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दिया था। इस दौरान रूडी और रविशंकर प्रसाद के बीच बहसबाजी भी हो गई। यह सब जब हुआ उस समय प्रधानमंत्री सदन में मौजूद थे। राजीव प्रताप रूडी का सवाल था कि सरकारी टेलिकॉम कंपनी बीएसएनएल का घाटा ९० हजार करोड़ रुपए का है जो एयर इंडिया के जैसा ही है। उन्होंने कहा कि हमारा दायित्व है कि इस कंपनी को बचाया जाए। रूडी ने कहा कि जब कंपनी के उपभोक्ताओं की संख्या ९ प्रतिशत थी तो इसकी आय ३ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा थी और अब जब उपभोक्ताओं की संख्या १० प्रतिशत हो गई है तो आय में १ लाख करोड़ रुपए की कमी आ गई है। रूडी ने कहा कि हमारे लिए कठिनाई है कि बीएसएनएल के फोन कटते रहते हैं और बिलिंग होती रहती है। यह हमारे लिए चिंता का विषय है, जिस तरह एयर इंडिया को सरकार का खजाना लेकर चला रहे हैं, उसी तरह बीएसएनएल को चलाया जाए। इस संबंध में ४ जुलाई को सचिवों की दिल्ली में बैठक होनी है जिसमें बीएसएनएल और एमटीएनएल के विलीनीकरण और कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवा निवृत्ती देने पर पैâसला हो सकता है। इसी प्रकार एयर इंडिया में सरकार अपना १०० प्रतिशत हिस्सा बेचने पर विचार कर रही है। इसके लिए अगले महीने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मंगाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। पिछले साल भी केंद्र सरकार ने घाटे में चल रही एयर इंडिया की ७६ फीसदी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश की थी लेकिन उसमें असफल रही जिसके बाद मदद के तौर पर संचालन को सुचारू करने के लिए केंद्र सरकार ने ३,९७५ करोड़ रुपए दिए। इससे इसका संचालन कुछ पटरी पर जरूर आया लेकिन घाटा कम करने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। मार्च २०१९ वित्त वर्ष में एयर इंडिया का घाटा ७,६०० करोड़ रुपए होने की उम्मीद है। घाटे में चल रही इन दोनों कंपनियों के संपत्तियों को बेचने का विचार है। इसके लिए मुंबई में एयर इंडिया की इमारत को बेचने की प्रक्रिया पाइप लाइन में है, जबकि आनेवाले दिनों में बीएसएनएल की संपत्ति को बेचने का पैâसला हो सकता है जिससे घाटे को कम किया जा सके।