" /> कोरोना मुक्ति की लड़ाई में परिचारिका की सेवा मानव इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा- उपमुख्यमंत्री अजीत पवार

कोरोना मुक्ति की लड़ाई में परिचारिका की सेवा मानव इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा- उपमुख्यमंत्री अजीत पवार

कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में डाक्टरों के कंधे से कंधे मिलाकर ओर उनसे एक कदम आगे जाकर खतरा लेकर रोगियों की सेवा कर रही परिचारिका बहनों व भाइयों का नाम मानवता के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
ऐसे शब्दों में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने विश्व परिचारिका दिवस पर सभी परिचारक बंधुओं व बहनों को शुभकामनाएं दी है। विश्व परिचारिका दिवस पर शुभकामनाएं देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मानवता के कल्याण में रोगियों की सेवा का स्थान सर्वोच्च है। विश्व भर में परिचारिका की सेवा ने मानवता की अखंड सेवा की है। रोगियों की देखभाल करनेवाले भाई-बहन समाज में प्यार और सम्मान की जगह हासिल कर रहे हैं। आज, दुनिया में कोरोना संकट के दौरान, अखंड नर्स मरीजों के रूप में स्वर्गदूत बनकर सेवा कर रही हैं। इलाज के साथ, वे रोगियों को धैर्य, आत्मबल और आत्मविश्वास दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये नर्स कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और वे इस लड़ाई में मुख्य सैनिक हैं। वे अपना स्वयं के जीवन को जोखिम में डालकर परिवार के विचार को छोड़कर, असंख्य नर्सें दिन-रात काम करके शहरी, ग्रामीण, दूरदराज के क्षेत्रों में अपना कर्तव्य बजा कर रही हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नर्सो की सेवा के लिए आभार व्यक्त करने के लिए शब्द पर्याप्त नहीं हैं, जैसा कि वर्तमान में कोरोना के लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है, रोगियों की उचित देखभाल और नर्सिंग स्वास्थ्य का जीवन है। नर्स यह काम पूरी सेवा तन, मन और ईमानदारी के साथ कर रही हैं, इसलिए महाराष्ट्र में कोरोना मुक्त रोगियों की दर अच्छी है। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सभी परिचारक भाइयों और बहनों के योगदान को कोई नहीं भूलेगा। ऐसे शब्दों में पवार ने परिचारिका की सेवा की सराहना की।