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हाथरस: एक जरूरी हस्तक्षेप!

कभी आपके जहन में सवाल आता है कि आदिशक्ति स्वरूपा मानकर देवियों को पूजने वाला, नवरात्रि में कन्याओं को जिमाने वाला, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का ढिंढोरा पीटने वाला देश संयुक्त राष्ट्र संघ के जेंडर इंडेक्स में इतना निचले पायदान पर कैसे है? २०११ जेंडर सोशल नॉर्म्स इंडेक्स में १४६ राष्ट्रों में भारत १२९वें स्थान पर था। मजेदार बात यह है कि हमारी तरक्की का पहिया यहीं नहीं रुकता। ब्रिक्स राष्ट्रों की सूची में लिंग आधारित विभेद के मामले में भारत टॉप पर है। वहीं २०१९ में भारत लैंगिक समानता सूचकांक के १२९ देशों की सूची में ९५वें स्थान पर है यानी हम घाना, रवांडा और भूटान जैसे देशों से भी पीछे हैं।
पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक दलित लड़की का ४ लड़कों ने बलात्कार किया। अधमरी हालत में लड़की को खेत में छोड़कर लड़के भाग जाते हैं। लड़की के परिजन उसे हॉस्पिटल ले जाते हैं। लड़की चंद घंटे ही सरवाईव कर पाती है। मरने से पहले लड़की ने गांव के ही चारों सवर्ण लड़कों को नामजद किया। पुलिस आनन-फानन में लड़की की डेडबॉडी गांव में ले जाकर जला देती है। लड़की के गांव को पुलिस ने चारों तरफ से घेरकर मीडिया पर पाबंदी लगा दी। ताकि असलियत जनता के सामने न आने पाए। यूपी सरकार इस पूरे मामले की लीपापोती करने में कोई कोताही नहीं बरतती। सवर्ण लड़कों के समर्थन में खाप पचायतें बैठीं। स्थानीय भाजपा सांसद राजवीर सिंह दिलेर आरोपियों से मिलने जेल चले जाते हैं। भाजपा समर्थकों ने तिरंगा लेकर ‘भारत मां की जय’ के नारे के साथ आरोपियों के समर्थन में जुलूस निकाला। योगी सरकार ने घटना के पीछे अरब देशों से फंडिंग और मुस्लिम एंगल भी ढूंढ लिया। अब तक लड़की और आरोपी से जुड़े ‘सच और झूठ’ के सैकड़ों वर्जन आ चुके हैं।
सोचिए हम कैसा समाज बना रहे हैं? एक चर्चित अभिनेता फांसी लगाकर खुद को खत्म कर लेता है। एक पागल भीड़ पिछले ४ महीने से अभिनेता की मौत में हत्या की साजिश ढूंढने पर आमादा है। वहीं हाथरस में एक लड़की का बलात्कार होता है। लड़की मरने से पहले रेपिस्टों के नाम तक बता गई। लेकिन यूपी पुलिस कहती है बलात्कार हुआ ही नहीं है। कोरोना के कारण लॉकडाउन में फंसे अप्रवासी कामगारों के लिए कांग्रेस ने बसें चलवार्इं। योगी सरकार ने १,००० बसों के २४ घंटे में कागज चेक कर उन्हें अनफिट करार दे दिया। क्या यही तेजी योगी जी अपराधमुक्त समाज बनाने के लिए नहीं ला सकते? ये वही योगी जी हैं जिन्होंने महाराष्ट्र के पालघर जिले में साधुओं की हत्या पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को कार्रवाई के लिए फोन किया था। जबकि योगी जी के फोन करने से पहले ही महाराष्ट्र सरकार पालघर के उन १०३ अभियुक्तों के ऊपर कार्रवाई कर चुकी थी। काश कोई इन्हें समझाए कि थोड़ा सा उत्तर प्रदेश के लॉ एंड ऑर्डर पर भी ध्यान दें।
सरकारें कोई भी हों, महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होती है। लेकिन क्या करें जब संवैधानिक पदों पर बैठे लोग ही देश की आधी आबादी की डिग्निटी का मखौल उड़ाते हों। हस्बेमामूल इसके बीज तथाकथित सभ्य भारतीय समाज की कंडीशनिंग में हैं। हाथरस कांड पर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज मारकंडेय काटजू ने कहा कि ‘सेक्स इज नेचुरल अर्ज़ इन मेन।’ वहीं उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से भाजपा नेता रंजीत श्रीवास्तव ने कहा कि ‘मरी हुई लड़की गेहूं के खेत में क्यों नहीं मिलती? मरी हुई लड़की धान के खेत में क्यों नहीं मिलती? ये सारी मरी हुई लड़कियां बाजरे, मक्के, गन्ने, अरहर के खेत में ही क्यों मिलती हैं?’ यूपी के मुख्यमंत्री योगी मानते हैं कि ‘स्त्रियों को स्वतंत्र या अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए।’
वहीं युगपुरुष प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर की पत्नी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘वाह क्या गर्लफ़्रेंड है। आपने कभी देखी है ५० करोड़ की गर्लफ़्रेंड?’ बलात्कार पर वक्तव्य देते हुए मुलायम सिंह यादव कहते हैं कि ‘लड़कों से गलती हो जाती है और इसके लिए उन्हें मौत की सजा नहीं देनी चाहिए।’ भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने फतवा जारी करते हुए कहा कि ‘हिंदू महिलाओं को अपने धर्म की रक्षा के लिए कम से कम ४ बच्चे पैदा करने चाहिए।’ वहीं सीपीआईएम नेता अनिसुर रहमान ने ममता बनर्जी से कहा कि ‘हम ममता दी से पूछना चाहते हैं, उन्हें कितना मुआवजा चाहिए। बलात्कार के लिए कितना पैसा लेंगी?’ भाजपा नेता नरेश अग्रवाल ने राज्यसभा सांसद जया बच्चन को ‘फिल्मों में नाचने वाली’ कहा। सर्वश्रेष्ठ सांसद का अवॉर्ड पा चुके शरद यादव महिलाओं के हक और सम्मान के पुराने शैदाई रहे हैं। १९९७ में संसद में महिला आरक्षण बिल पर बहस करते समय उन्होंने कहा कि ‘इस बिल से सिर्फ परकटी औरतों को फायदा पहुंचेगा। परकटी शहरी महिलाएं हमारी ग्रामीण महिलाओं का प्रतिनिधित्व कैसे करेंगी?’ २० साल बाद २०१७ में महिलाओं को लेकर उनके बोल कुछ यूं रहे- ‘वोट की इज्जत आपकी बेटी की इज्जत से ज़्यादा बड़ी होती है। अगर बेटी की इज्जत गई तो सिर्फ गांव और मोहल्ले की इज्जत जाएगी लेकिन अगर वोट एक बार बिक गया तो पूरे देश और सूबे की इज्जत जाएगी।’
ये सभी बयान शीर्ष स्तर के नेताओं के हैं जो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और १३० करोड़ आबादी वाले देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन बयानों का अगर साईको एनालिसिस करें तो पता चलता है कि ये मर्दवादी सामंती मानसिकता और पैट्रीयार्की के द्योतक हैं। बहुत साफगोई से भारतीय समाज की कंडीशनिंग और अपब्रिंगिंग का मुजाहिरा पेश करते हैं। अब आप जनता की सहज मानसिकता और व्यवहार का अंदाजा लगा सकते हैं। हमारे समाज से ज्यादा इन नेताओं को जेंडर सेंसेटाईजेशन की जरूरत है। क्योंकि इन नेताओं के हजारों लाखों फॉलोवर इन्हें अपना रोल मॉडल मानते हैं। इन नेताओं के बयानों से निश्चित रूप से जनता को शह मिलती है। महिलाओं के नाम पर मौजूदा सरकार सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, महिला शक्ति केंद्र योजना और नारी शक्ति पुरस्कार योजना लागू कर चुकी है। महिला सुरक्षा के नाम पर सरकार का क्या रवैया है? निश्चित तौर पर महिलाओं के साथ आए दिन होने वाली दुर्घटनाएं सरकार की मंशा और कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। महिलाओं की सुरक्षा,आजादी और सम्मान से जुड़े मुद्दे पर सियासत नहीं होनी चाहिए। महिलाओं को सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म पर प्रिâंज एलिमेंट्स खुलेआम रेप की धमिकयां देते हैं। ऐसे माहौल में महिलाओं को अपने हक, सुरक्षा और बेहतरी के लिए खुद आगे आना होगा। न कि उने पितृसत्ता के नियामक पुरुषों के ऊपर अपनी जिम्मेदारी छोड़नी चाहिए। महिलाओं को अपने लिए एक बेहतर कल और सुरक्षित दुनिया का निर्माण स्वयं करना होगा। उसी का शहर, वही कातिल, वही मुद्दई, वही मुंसिफ हमें यकीं था हमारा कुसूर निकलेगा…!
(लेखक राजनीतिक मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार हैं)