इस बात का अफसोस है!

कहते हैं जिनके चेहरे पर एक बार रंग (मेकअप का) लग जाए वो कभी नहीं उतरता। अभिनय और मेकअप का यह रंग उनके दिल में उतर जाता है। ऐसे कई सितारे हैं खासकर अभिनेत्रियां, जो अभिनय से दूर गर्इं और कुछ अर्से बाद अभिनय की दुनिया में वापस लौट आर्इं। फिर वो अभिनेत्री राखी गुलजार हों या मुमताज। शर्मिला टैगोर अपने जमाने की मशहूर अदाकारा थीं। उन्होंने मातृत्व सुख के बाद अभिनय से दूरी बना ली थी और अब पुनरागमन किया है। ८०-९० के दशक की बॉलीवुड की पॉपुलर नायिका अनिता राज आज उम्र के ५० पड़ाव पार कर चुकी हैं और अपने करियर की दूसरी पारी शुरू कर दी है। कलर्स चैनल के नए शो `छोटी सरदारनी’ में अनिता राज एक निगेटिव रोल में नजर आएंगी। उनसे बातचीत की पूजा सामंत ने-
आप `छोटी सरदारनी’ के केंद्रीय किरदार को निभा रही हैं निम्रत कौर। आपका क्या किरदार है? सुना है निगेटिव है?
यह तो देखनेवाले का नजरिया है कि आप क्यों और किसलिए किसे निगेटिव कह रहे हैं? मैं इतना यकीं के साथ कह सकती हूं कि मेरा किरदार मेहर ढिल्लन की मां का है। कुलवंत कौर यानी मैं बहुत सशक्त-दमदार स्त्री हूं और उसूलों की पक्की हूं। यह एक पारिवारिक मनोरंजक पॉलिटिकल पृष्ठभूमि की कहानी है। कुलवंत को जहां लगता है कि उसकी पुत्तर (निम्रत कौर) गलत कर रही है, गलत रास्ते जा रही है तो ऐसे में मां बेटी का विरोध करेगी ही क्योंकि बेटी को प्रोटेक्ट करना है उसे। ऐसे में उसे आप निगेटिव नहीं कह सकते न! मैंने यह रोल इसीलिए स्वीकारा चूंकि यह गुडी-गुडी नहीं बल्कि बोल्ड है। इसमें एक मां का मन है जो हर वक्त बदलता है और उसकी निगाह में जो औलाद के लिए सही है, वही करता है। और हां, कुलवंत कौर यानी मैं गांव की सरपंच भी हूं, जो तेजतर्रार है। ऐसे में अगर थोड़ा बहुत निगेटिव भी है तो भी कोई हर्ज है, ये चैलेंजिंग है।
क्या किसी तरह का होमवर्क भी करना पड़ा आपको इस किरदार को निभाने के लिए?
होमवर्क नहीं करना पड़ा मुझे। इसकी वजह है कि मैं खुद पंजाबी हूं। मैं अपना कल्चर-रस्मो रिवाज जानती समझती हूं। मैं इस शो की किरदार कुलवंत कौर के साथ आसानी से रिलेट कर पाई। और मैं एक तजुर्बेकार कलाकार हूं। अनगिनत किरदार मैंने निभाए हैं हिंदी फिल्मों में। अनुभव और आत्मविश्वास होने के कारण मुझे वैसे कोई होमवर्क नहीं करना पड़ा।
यह शो अगर आपकी अभिनय में वापसी है तो आपने वापसी के लिए इतनी देर क्यों कर दी जबकि आपके पति सुनिल हिंगोरानी फिल्म मेकर हैं।
पहले तो यह स्पष्ट कर दूं कि `छोटी सरदारनी’ मेरी पुनर्वापसी नहीं है। मैंने २-३ वर्ष पहले ही अनिल कपूर प्रोडक्शंस की सीरीज `२४’ में भी अहम् किरदार निभाया था। दर्शकों से इसे सराहना भी मिली थी। मैंने `जी’ के `एक था राजा’ शो किया था। मैंने हाल ही में `यारम’ और `दीनदयाल’ पर आधारित यह फिल्म भी की। बस फर्क इतना कि मैंने सिलेक्टेड काम किया। जाहिर सी बात है कि पेड़ों के इर्द-गिर्द नाचनेवाली हीरोइन का रोल मैं करने से रही। ऐसे में जो भी अच्छा-उचित रोल मेरे पास आएगा मैं करूंगी।
आपके फिल्म मेकर पति सुनील हिंगोरानी आपके लिए कुछ फिल्म निर्माण करने की कोई संभावना नहीं?
सुनील एक धुरंधर निर्माता हैं। उनके चाचा अर्जुन हिंगोरानी भी नामी फिल्म मेकर रहे हैं, वो जानते हैं किन फिल्मों का निर्माण किस समय में किया सकता है। हमारे बैनर तले वे अब फिल्मों का निर्माण नहीं करते।
आपका बेटा शिवम् इन दिनों क्या कर रहा है? क्या आपके नक्शे कदम पर चलते शिवम् ने अभिनय में नहीं आना चाहा?
शिवम् ने करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस में बतौर सहायक निर्देशक का काम किया। करण जौहर की `अग्निपथ’ और `ये जवानी है दीवानी’ फिल्मों का सहायक निर्देशक भी रहा, हो सकता है वो खुद की फिल्म भी शुरू कर दे आनेवाले समय में। लेकिन शिवम् ने मां यानी मेरा फिटनेस में रुझान देखते हुए एक ऑर्गेनिक एनर्जी प्रोटीन ड्रिंक कम पॉवडर का निर्माण शुरू किया है जिसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला। शिवम् अपने इस बिजनेस में ग्रो कर रहे हैं और फिल्म भी शुरू करेंगे।
आप ८० और ९० के दशक में कामयाब अभिनेत्री रही हैं। अब २०१९ तक कितने बदलाव आपने बॉलीवुड में देखे हैं? मेनस्ट्रीम फिल्मों में काम करना कितना मिस करती हैं आप?
मैं बॉलीवुड में सफल कामयाब अभिनेत्री रही हूं। धरम जी से लेकर मिथुन दा तक सभी बड़े एक्टर्स और मेकर्स के साथ काम किया। बहुत सीखा, बहुत यादगार और सुकून भरे दिन थे मेरे। लेकिन अब मेरा दौर खत्म हुआ, इसका मलाल नहीं है मुझे। मैं संतुष्ट हूं अपनी पारी से। शादी के बाद मैंने अपने परिवार, पति और बेटे पर फोकस किया और अपनी मर्जी से काम करना बंद किया। मेरे दौर में हमें ड्रेस चेंज करने के लिए भी रूम नहीं मिलती थी। वैनिटी वैन तो बिलकुल नहीं थी। मेकअप की एडवांस टेक्निक्स नहीं थी। सिनेमेटोग्राफी आज के जितनी एडवांस नहीं थी। जो बदलाव मैं महसूस कर रही हूं, अच्छे के लिए हुए हैं। मैं बॉलीवुड में आ सकी, काम कर सकी, अपनी पारी सफलतापूर्वक कर पायी व सारा श्रेय मेरे डैड जगदीश राज को जाता है।
आपसे सीनियर एक्टर्स वहिदा रहमान और आशा पारेख ने एक दूसरे से दोस्ती रखी है। आपके कौन-से ऐसे दोस्त हैं बॉलीवुड में जिनसे आपकी दोस्ती बरकरार है?
`आशा जी, वहीदा जी, हेलेन जी, ये यह सभी क्लोज फ्रेंड्स हैं। साथ में फिल्म्स देखना, घूमने जाना, रेस्टॉरेंट्स जाकर साथ में लंच करना सालों साल करती रही हैं। मेरी सिर्फ टेलीफोनवाली दोस्ती है। पद्मिनी (कोल्हापुरे) और पूनम (ढिल्लों) के साथ सप्ताह में एक बार बातचीत होती है। मिलने का और साथ में वक्त गुजारने का मौका नहीं मिलता बस इसी बात का अफसोस है।