इस मुलाकात के बाद मेरा डर जाता रहा! अर्जुन कपूर

२०१२ में अर्जुन कपूर की डेब्यू फिल्म ‘इशकजादे’ रिलीज हुई थी और अब २०१९ के आखिर में उनकी फिल्म ‘पानीपत’ रिलीज होने जा रही है। अर्जुन के फिल्म करियर को लगभग ८ वर्ष हो रहे हैं और इन ८ वर्षों में अर्जुन ने खुद की पहचान एक सफल एक्टर के रूप में बनाई है। करियर के आरंभ में १५० किलो वजनवाले अर्जुन को आज भी उनकी भारी-भरकम कद-काठी के कारण ही प्रख्यात फिल्ममेकर आशुतोष गोवारिकर ने अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘पानीपत’ में सदाशिवभाऊ पेशवा की अहम अर्थात मध्यवर्ती किरदार की जिम्मेदारी सौंपी है। अपने करियर और निजी जीवन के बारे में अर्जुन ने यहां अपने दिल की बातें शेयर की हैं पूजा सामंत से-
कैसे मिला सेनापति सदाशिवभाऊ पेशवा का किरदार?
आशू सर ने जब मुझे फिल्म ‘पानीपत’ के सदाशिवभाऊ का किरदार सौंपा तो मैं भी चौंक गया। ये सच है कि मैंने अब तक कोई पीरियड फिल्म नहीं की। उन्होंने मुझे नैरेशन दिया और कहा कि सदाशिवभाऊ शरीर से कुछ हेवी बिल्ट के थे, लंबे और मजबूत। उनकी शारीरिक बनावट से मैं मेल खाता हूं। आशू सर ने जब मुझसे संपर्क किया तो उन्होंने मेरी सारी फिल्में देख ली थीं। मेरे अभिनय पैटर्न के बारे में पूरा अभ्यास करने के बाद वे मुझसे मिले। उन्हें जब यह विश्वास हुआ कि अर्जुन सदाशिवभाऊ पेशवा के किरदार को मैच कर सकता है, इसी कॉन्फिडेंस के साथ उन्होंने मुझे साइन किया।
आप कमर्शियल फिल्मों के स्टार हैं, ऐसे में सदाशिवभाऊ का किरदार निभाते हुए गंजा होने में आपको असुविधा नहीं हुई?
सदाशिवभाऊ न की सिर्फ मराठा इतिहास के लिए गौरवशाली साहसी शूरवीर सेनानी थे, बल्कि अपने पूरे देश की हिफाजत और आन-बान-शान के लिए वे डटे रहे। आखिर में जब वे एक शूरवीर की तरह मैदान में शहीद हुए तो उनकी उम्र ३१ वर्ष की भी नहीं थी। इतनी कम उम्र में एक योद्धा देश के लिए कुर्बान हो गया। उनकी वीरगाथा रोमांच ला देती है। ऐसे महान योद्धा का किरदार निभाने का सुनहरा मौका हमेशा तो नहीं मिलता न? उनके सामने मेरे बालों की कीमत ही क्या है?
फिल्म में आपके साथ संजय दत्त भी हैं। कैसा रहा उनके साथ काम करने का अनुभव?
आशू सर ने जब कहानी सुनाई तब उन्होंने कहा था कि मराठों का शत्रु अहमदशाह अब्दाली था, जिसने देश को लूटने और जनता पर जुल्म ढाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। क्रूर अब्दाली के किरदार के लिए आशू सर ने संजू सर (संजय दत्त) को साइन कर लिया था। अपने ८-९ वर्ष के करियर में मैंने कभी संजय सर के साथ काम नहीं किया और न ही मुझे लगता है कि डैड (बोनी कपूर) ने भी संजय दत्त के साथ कोई फिल्म की है। इसीलिए मैं सिर्फ संजय दत्त को पर्दे पर जानता हूं और उनके जीवन में जो भी तूफान उठा जानता था। शूटिंग शुरू होने से पहले एक मर्तबा मान्यता दत्त मैम ने हमें लंच पर बुलाया था। जब मैं संजू सर से उनके घर पर मिला तो महसूस हुआ कि ऑन स्क्रीन बादशाह-सा लगनेवाला ये इतना बड़ा स्टार बड़ा वनरेबल है, मासूम-सा है! कोई ऐटिट्यूड नहीं है संजू सर में। हम दोनों में एक समानता ये भी है कि हम दोनों की मां (मोना कपूर और नर्गिस दत्त) को खोने के बाद हमारी जिंदगी में एक वैक्यूम-सा बन गया है। हम दोनों ने अपनी-अपनी जिंदगी में बहुत कुछ सहा है और हां, हम दोनों भी खाना अपने हाथों से खाना पसंद करते हैं। देसी आदतें अब नहीं दिखतीं इसीलिए कह रहा हूं। इस घरेलू अनऑफिशियल मुलाकात के बाद मेरा डर जाता रहा। वो मुझसे काफी सीनियर हैं और मैं उनकी इज्जत करने लगा।
जन्मदिन – २६ जून
जन्मस्थान – मुंबई
कद – ५ फुट ११ इंच
वजन – ८५ किग्रा
प्रिय परिधान – कुर्ता-पाजामा
प्रिय व्यक्ति – मेरी बहन अंशुला
पसंदीदा डिश – चिकन बिर्यानी
मनपसंद डेजर्ट – मैंगो सूफले
प्रिय टूरिस्ट प्लेस – बाली, मालदीव
पसंदीदा कलाकार – सभी अच्छे लगते हैं
बॉलीवुड में दोस्त – रणबीर सिंह