" /> लद्दाख सीमा से नहीं हटेंगी फौजें, चीनी टैंकों, सैनिकों, मिसाइलों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि, बातचीत के ७ दौर नाकाम

लद्दाख सीमा से नहीं हटेंगी फौजें, चीनी टैंकों, सैनिकों, मिसाइलों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि, बातचीत के ७ दौर नाकाम

ड्रैगन सुधरनेवाला नहीं है। भले ही गलवान में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की बातचीत के कई दौर हो चुके हैं, मगर उसका इरादा कुछ और ही है। वह लद्दाख में अपनी फौजों की संख्या बढ़ाता जा रहा है, जिससे उसके इरादे स्पष्ट नजर आ रहे हैं। दोनों देशों के बीच ७ दौर की बातचीत नाकाम हो चुकी है। चीन दोहरी चाल चल रहा है। एक ओर उसने बातचीत को जारी रखा व दूसरी ओर लद्दाख में कई इलाकों में अपने सैनिकों, तोपखानों, टैंकों, मिसाइलों आदि की संख्या में जबरदस्त बढ़ोत्तरी कर यह संकेत दे दिया है कि वह निकट भविष्य में पीछे हटने वाला नहीं है।
मिली जानकारी के अनुसार अब तो चीनी सैनिक लद्दाख में लाइव युद्धाभ्यास को शुरू कर भारतीय सैनिकों को डराने की कोशिश में हैं। अधिकारियों से मिली के अनुसार, चीन अब हिंदुस्थान से लगती सीमा पर युद्धाभ्यास कर रहा है। चीन ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है, जब भारतीय सैनिकों ने ड्रैगन को जोरदार झटका देते हुए पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे पर स्थित ऊंचाई वाली चोटियों पर बढ़त ली है।
लद्दाख सीमा पर हुए टकराव के बाद से ही हिंदुस्थान ने ड्रैगन को सबक सिखाने की ठान ली है। चीन का मोबाइल फोन के बाजार में दबदबा है। अब केंद्र सरकार उसके इस दबदबे को चूर करने के लिए योजना बना रही है। इसके लिए सरकार ‘पीएलआई’ स्कीम ले आई है। इसके तहत एप्पल व सैमसंग के अलावा देसी फोन कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा और ड्रैगन को ७.३ लाख करोड़ रुपए (१०० अरब डॉलर) का फटका लगना तय है।
मिली जानकारी के अनुसार इस योजना के तहत मोबाइल फोन निर्यात के लिए एप्‍पल और सैमसंग को मंजूरी दे दी है। वहीं, भारतीय मोबाइल फोन मेकर्स माइक्रोमैक्‍स, लावा, कार्बन, ऑप्‍टीमस और डिक्‍सन जैसी कंपनियां देश में में किफायती फोन उतारने की तैयारी में हैं। केंद्र सरकार ने इन सभी कंपनियों को हरी झंडी दिखा दी है। इससे चीन की कंपनियों को तगड़ा झटका लगेगा और भारतीय बाजार में उनका दबदबा खत्‍म होगा। एप्‍पल और सैमसंग समेत सभी मोबाइल मेकर्स सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंवेस्‍टमेंट स्कीम की वजह से भारत में मौजूद चीनी कंपनियों को कीमत के मामले में टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आकड़ों के मुताबिक, करीब २२ कंपनियों ने ४१,००० करोड़ रुपए के पीएलआई स्कीम के लिए आवेदन किया है। सरकार की मंजूरी के बाद अब ये कंपनियां हिंदुस्थान को मोबाइल फोन निर्यात कर सकेंगी या देश में ही फोन बना सकेंगी। बता दें कि सीमा विवाद के बाद से भारतीय बाजार में चीनी कंपनियों की हिस्‍सेदारी लगातार घटती जा रही है। वहीं, अमेरिका, जापान समेत सभी गैर-चीनी कंपनियों का कारोबार बढ़ रहा है। मोबाइल फोन निर्माता कंपनियों के आवदेनों को मंजूरी देने वाली केंद्र सरकार की एम्‍पावर्ड कमेटी में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के अलावा आर्थिक मामलों के सचिव, व्‍यय सचिव, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एंड इंफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी मिनिस्‍ट्री, डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्‍ट्री एंड इंटरनल ट्रेड और डायरेक्‍टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड के सचिव भी शामिल थे।