" /> फुटकर व्यापारियों को थोक फटका!, देशभर में लगभग २०% दुकानें हो सकती हैं बंद

फुटकर व्यापारियों को थोक फटका!, देशभर में लगभग २०% दुकानें हो सकती हैं बंद

देश में कोरोना महामारी ने पिछले १०० दिनों में भारतीय खुदरा व्यापार को लगभग १५.५ लाख करोड़ रुपए के घाटे का सामना करना पड़ा है। मतलब फुटकर व्यापारियों को थोक (बड़ा) फटका लगा है। घरेलू व्यापार में इस हद तक उथल-पुथल हुई है कि लॉकडाउन खुलने के ४५ दिनों बाद भी देशभर में व्यापारी उच्चतम वित्तीय संकट तथा ग्राहकों की कमी से बेहद परेशान हैं। दूसरी तरफ व्यापारियों को कई वित्तीय दायित्वों को पूरा करना है जबकि बाजार में पैसे का संकट पूरी तरह बरकरार है। केंद्र अथवा राज्य सरकारों द्वारा व्यापारियों को कोई आर्थिक पैकेज न देने से भी व्यापारी बेहद संकट की स्तिथि में हैं और इस सदी के सबसे बुरे समय से गुजर रहे हैं।
घरेलू व्यापार की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करते हुए कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (वैâट) ने कहा कि देश में घरेलू व्यापार अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है और रिटेल व्यापार पर चारों तरफ से बुरी मार पड़ रही है और यदि तुरंत इस स्तिथि को ठीक करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो देशभर में लगभग २०ज्ञ् दुकानों को बंद करने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिसके कारण बड़ी संख्या में बेरोजगारी भी बढ़ सकती है।
देश के घरेलू व्यापार को अप्रैल में लगभग ५ लाख करोड़ का जबकि मई में लगभग साढ़े चार लाख करोड़ और जून में लॉकडाउन हटने के बाद लगभग ४ लाख करोड़ तथा जुलाई के १५ दिनों में लगभग २.५ लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। कोरोना को लेकर लोगों के दिलों में बड़ा डर बैठा हुआ है, जिसके कारण स्थानीय खरीददार बाजारों में नहीं आ रहे हैं हैं। इसी तरह पड़ोसी राज्यों या शहरों से सामान खरीदनेवाले व्यापारी भी कोरोना के भय और अंतर-राज्यीय परिवहन की उपलब्धता में आ रही परेशानियों के कारण खरीददारी करने नहीं जा रहे हैं, जिससे देश का रिटेल व्यापार पूरी तरह हिल चरमरा गया है।
इन सभी कारणों के चलते देश भर के बाजारों में बेहद सन्नाटा है और व्यापारी प्रतिदिन शाम ५ बजे के आस-पास कारोबार बंद कर अपने घरों को चले जाते हैं। देशभर के व्यापारियों से उपलब्ध जानकारी के अनुसार कोरोना अनलॉक अवधि के बाद अब तक केवल १०ज्ञ् उपभोक्ता ही बाजारों में आ रहे हैं, जिसके कारण व्यापारियों का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। अभी तक व्यापारियों को केंद्र सरकार या राज्य सरकारों द्वारा कोई आर्थिक पैकेज पैकेज नहीं दिया गया जिसके कारण व्यापार को पुन: जीवित करना बेहद मुश्किल काम साबित हो रहा है। इस समय व्यापारियों को ऋण आसानी से मिले इसके लिए एक मजबूत वित्तीय तंत्र को तैयार करना बेहद जरूरी है। व्यापारियों को करों के भुगतान में छूट और बैंक ऋण, ईएमआई आदि के भुगतान के लिए ब्याजरहित एक विशेष अवधि दिए जाने की जरूरत है, जिससे बाजार में आर्थिक तरलता का प्रवाह हो। इस संबंध में सबसे बुरी बात यह है कि दिसंबर से मार्च के महीने में आपूर्ति की जाने वाली वस्तुओं जिनका पेमेंट भुगतान पारस्परिक रूप से सहमत क्रेडिट अवधि के अनुसार मार्च महीने में हो जाना चाहिए था, वो अभी तक नहीं हुआ है और उम्मीद ये की जाती है आगामी सितंबर में इसकी अदायगी होने की संभावना है। वहीं बैंको से आसान शर्तों एवं कम दर के साथ व्यापारों के सहायता देने की जरूररत है। ऐसी स्थिति में अर्थशात्र का सिद्धांत कहता है कि जब इनपुट कम होता है और आउटपुट अधिक होता है तब व्यापार गति से नीचे जाता है और लोग अपनी पूंजी खाना शुरू कर देते हैं, जो कोई अच्छा संकेत नहीं है। इस दृष्टि से सरकारों द्वारा व्यापारियों के मुद्दे सुलझाना बहुत आवश्यक हैं।