" /> ऑल राउंडर…!

ऑल राउंडर…!

इंसान के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं होता। इंसान चाहे तो क्या कुछ नहीं कर सकता। जरूरत पड़ने पर वो आसमान से तारे भी तोड़कर ला सकता है। बस जरूरत होती है तो इच्छाशक्ति की। अगर इच्छाशक्ति मजबूत और दृढ़ हो तो मुश्किल राह भी आसान बन जाती है। यही बात कलाकारों पर भी लागू होती है। बड़े से बड़ा कलाकार भी कभी-कभार आत्मविश्वास की कमी के चलते डगमगा जाता है कि ये उसके बस की बात नहीं। लेकिन जब उसका विश्वास लौटता है और वो उस कार्य को करता है तब जाकर उसे यकीन होता है कि ये तो केवल उसी के बस की बात थी, किसी और के बस की तो बिल्कुल भी नहीं थी। अपनी आवाज और सुरों के जरिए लंबे समय तक इंडस्ट्री पर राज करनेवाली पार्श्वगायिका आशा भोसले का विश्वास भी उस समय डगमगा गया था, जब आर.डी. बर्मन यानी पंचम दा ने उन्हें एक गाने की धुन सुनाई।
बात उन दिनों की है जब फिल्म ‘तीसरी मंजिल’ के गीतों की सीटिंग चल रही थी। पंचम दा ने फिल्म के एक गीत ‘आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा अल्ला अल्ला इकरार तेरा…’ का म्यूजिक कंपोज किया। उन्होंने इस गाने की धुन आशा भोसले को सुनाई। गाने की धुन बहुत ही सुंदर बनी थी लेकिन धुन को सुनने के बाद न जाने क्यों आशा भोसले को लगा कि इस गाने की धुन बेहद मुश्किल है और वे इस गाने को नहीं गा पाएंगी। अत: उन्होंने पंचम दा से अनुरोध करते हुए कहा, ‘पंचम, गाने की धुन तो बहुत अच्छी बनी है लेकिन धुन को थोड़ा और आसान बना दो।’ इस पर पंचम दा ने कहा, ‘तुम इस धुन पर बड़ी ही आसानी से गा लोगी।’ लेकिन न जाने क्यों आशा भोसले को लग रहा था कि वे इसे नहीं गा पाएंगी। आशा को इस तरह हताश और निराश देखकर पंचम दा सहित वहां उपस्थित सभी लोगों ने उनकी हौसलाअफजाई की। लोगों द्वारा हौसला बढ़ाए जाने पर आशा भोसले ने मुश्किल लगनेवाले इस गाने को एक चैलेंज के रूप में स्वीकार कर लिया और दस दिनों तक उन्होंने इस गाने का रियाज किया। दस दिनों की रियाज के बाद रिकॉर्डिंग स्टूडियो में पहुंचकर आशा भोसले ने जब इस गाने की रिकॉर्डिंग की तो पंचम दा खुशी से झूम उठे। उनकी खुशी का कोई पारावार न था। रिकॉर्डिंग खत्म होते ही आशा जी के गाने से खुश होकर पंचम दा ने अपनी जेब से सौ रुपए का नोट निकाला और उसे आशा भोसले की ओर बढ़ाते हुए बोले, ‘ये लो तुम्हारा इनाम…!’ इस गाने की रिकॉर्डिंग के बाद आशा भोसले ने पंचम दा से सवाल किया, ‘आप सारे अच्छे गाने दीदी (लता मंगेशकर) को दे देते हो और मुझे वो गाने देते हो जो बड़े ही आड़े-टेढ़े होते हैं, जिसे दूसरा कोई नहीं गा पाता।’ इस पर पंचम दा ने आशा भोसले से कहा, ‘लता दीदी डॉन ब्रेडमैन की तरह हैं और तुम सोबर्स की तरह ऑल राउंडर हो, जो सब कुछ यानी कुछ भी कर सकता है। अगर तुम इस तरह के गाने नहीं गाओगी, तो मैं ऐसे गाने कंपोज करना ही बंद कर दूंगा।’
सच ही तो कहते थे पंचम दा कि आशाजी, सच में ऑल राउंडर हैं। आशा जी ने हर तरह के गीतों को चाहे वो रोमांटिक हो या सैड, मुजरा हो या वैâबरे या फिर कोई अन्य मूड वाला गीत, जिस किसी भी गीत को छुआ उसे कुंदन बना दिया। भारत की तमाम भाषाओं सहित अंग्रेजी में भी गीत गाकर अपना परचम लहरानेवाली आशा भोसले ८७ बसंत पार कर चुकी हैं और आज इस उम्र में भी उनकी आवाज का जादू बरकरार है। गाना कितना भी कठिन क्यों न हो वे उसे इतनी सहजता से गाती हैं कि उसे सुनकर बरबस ही मुंह से निकल जाता है- ‘आशा की खनकती आवाज के दीवाने हजारों हैं…!’