कभी-कभी : अपनी शर्तों पर काम करनेवाली अभिनेत्री…!!!

मुंबई में आनेवाले हर नवयुवक और नवयुवती की चाह होती है बॉलीवुड में अपना करियर बनाने की। कुछ इसमें सफल होते हैं तो कुछ असफल हो जाते हैं। जो सफल हो जाते हैं उनकी चाहत होती है अपने से नामी और अनुभवी सितारों के साथ काम करने की। लेकिन हमारी फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐसी भी कलाकार हैं जिन्होंने ‘ट्रेजिडी किंग’ दिलीप कुमार के साथ काम करने से साफ इंकार कर दिया।
२ अक्टूबर, १९४२ को बंगलुरु में एक मुस्लिम मां और हिंदू पिता के घर जन्मी आशा पारेख बचपन से ही डॉक्टर या आईएएस अधिकारी बनना चाहती थीं। दमदार अभिनय और नृत्य में महारत रखनेवालीं ग्लैमरस अभिनेत्री आशा पारेख को फिल्मकार विजय भट्ट ने सन १९५९ में अपनी फिल्म ‘गूंज उठी शहनाई’ से ये कहकर निकाल दिया था कि वे अभिनेत्री बनने के लायक नहीं हैं। इस घटना के महज आठ दिन बाद ही निर्माता सुबोध मुखर्जी और निर्देशक नासिर हुसैन ने उनको फिल्म ‘दिल देके देखो’ में शम्मी कपूर के अपोजिट साइन कर लिया। इस फिल्म को शानदार सफलता मिली। विजय भट्ट की धारणा गलत साबित हुई और आशा पारेख फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गर्इं।
देव आनंद से लेकर राजेश खन्ना, शशि कपूर, जितेंद्र, मनोज कुमार और धर्मेंद्र सहित कई दिग्गज कलाकारों के साथ बतौर हीरोइन फिल्मों में काम करनेवाली आशा पारेख ने कभी दिलीप कुमार के साथ काम नहीं किया, जबकि उन्हें दिलीप कुमार के साथ फिल्में भी ऑफर हुई थीं। इस बारे में उनका कहना है कि वे दिलीप कुमार को पसंद नहीं करती थीं और जिसे वे पसंद नहीं करतीं, उसके साथ काम नहीं कर सकतीं। अपनी शर्तों पर अपना जीवन जीनेवाली आशा पारेख ने कभी समझौता नहीं किया, मामला चाहे फिल्म करियर का रहा हो या फिर घर-परिवार का। उन्होंने शादी नहीं की क्योंकि उन्हें योग्य जीवनसाथी नहीं मिल सका। ऐसा नहीं है कि उन्हें किसी से प्यार नहीं हुआ। प्यार हुआ लेकिन उस प्यार को मंजिल न मिल सकी। एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम करनेवाली आशा पारेख को ढेरों सम्मान से सम्मानित किया गया। वे ‘सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन’ की अध्यक्ष भी रही हैं। १९९८ से २००१ तक वे सेंसर बोर्ड की पहली महिला अध्यक्ष रहीं। आज आशा पारेख एक रिटायर्ड जीवन बिता रही हैं लेकिन कभी-कभार वे किसी-न-किसी शो में जरूर नजर आ जाती हैं।