" /> मौत के मुहं से निकली : मलेशिया की बेबी नूर

मौत के मुहं से निकली : मलेशिया की बेबी नूर

10 माह की मासूम का हुआ मुंबई में लीवर ट्रांसप्लांट
दिल और छाती भी था बीच में
मुंबई में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को लेकर चारों ओर खौफ का माहौल है। रोजाना सैकडों की संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं। इसी बीच मलेशिया से इलाज के लिए मुंबई आई एक 10 माह की बच्ची बेबी नूर का सफल लीवर ट्रांसप्लांट कर उसे मौत के मुहं में जाने से डॉक्टरों ने बचा लिया।

बता दें कि बेबी नूर को पैदा होने के ठीक बाद पीलिया हो गया था, जो धीरे-धीरे बढ़ता चला गया और बाद में उसमें एक दुर्लभ लीवर एवं बाईल रोग भी पाया गया। यह बीमारी दुनिया भर में पैदा होनेवाले हर 12,000 बच्चों में से एक बच्चे में पाई जाती है। इसके अलावा नूर हेटरोटैक्सी से भी पीड़ित थी, जिसमें गर्दन और पेट के हिस्से के भीतरी अंगों की व्यवस्था असामान्य होती है। उसका पेट और लिवर बीचों-बीच था और दिल छाती के बीच में था। 2 माह की उम्र में बेबी नूर की सर्जरी की गई, जिसमें लिवर की नीचली सतह को सीधे आंतों से जोड़ गया था। आंतों के गलत घुमाव को ठीक करने के लिए पेट की सर्जरी भी की गई। लेकिन दोनों सर्जरियां असफल रहीं। डॉ. अनुपम सिब्बल, ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर- सीनियर पीडिएट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट – हेपेटोलोजिस्ट, इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने बताया कि अगर सर्जरी से पीलिया ठीक नहीं होता तो लीवर ट्रांसप्लान्ट ही एकमात्र विकल्प होता है। नूर इसी श्रेणी में आ गई थी, सर्जरी असफल होने के कारण उसका पीलिया गंभीर हो गया था और वह लीवर फेलियर का शिकार हो गई थी, उसके पेट में फुलावट थी, लीवर के ठीक से काम न करने के कारण रक्तस्राव हो रहा था, लीवर सख्त हो गया था। उसे कई बार कुआलालम्पुर के अस्पताल में भर्ती किया गया। इलाज के दौरान फरवरी में ज़बरदस्त रक्तस्राव होने के कारण उसके बचने की उम्मीद जैसे खत्म हो गई। वह वेंटीलेटर पर थी, इसलिए उसे भारत लाने की योजना रद्द कर दी गई लेकिन तुरंत सर्जरी की आवश्यकता को देखते हुए उसे अपोलो लाया गया। बेबी नूर की मां ही डोनर थी। उसका वज़न 9 माह की उम्र में मात्र 6.5 किलो था।