" /> सियाराम मय सब जग जानी, बालासाहेब की स्वप्नपूर्ति

सियाराम मय सब जग जानी, बालासाहेब की स्वप्नपूर्ति

अयोध्या में हुआ श्री राम भक्ति का अभूतपूर्व अवतरण

कल अयोध्या के साथ ही देश-दुनिया के करोड़ों हिंदुओं ने एक नई सुबह देखी। हिंदुओं के अराध्य देव प्रभु रामलला के मंदिर का भव्य शिलान्यास काफी धूमधाम से संपन्न हुआ। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में लिखा है कि ‘सियाराम मय सब जग जानी’ इसका अर्थ है कि संसार के कण-कण में भगवान का वास है। यह मर्म समझ लेने के बाद किसी व्यक्ति से कलह नहीं होगी। राम मंदिर के शिलान्यास के बाद अब इस मामले से संबंधित सारे कलह का भी समापन हो जाएगा और सारी दुनिया आपसी प्रेम व भाईचारे से रहेगी, इसकी हर किसी को उम्मीद है।

राम नाम की गूंज से साथ कल अयोध्या नगरी में राम भक्ति का अभूतपूर्व अवतरण हुआ। पूरी अयोध्या दुल्हन की भांति सजी हुई थी। श्रद्धालु और राम भक्तों को जिस घड़ी की प्रतीक्षा थी, वो साकार हो रही थी। रामलला के भव्य मंदिर का भूमिपूजन जो हो रहा था। इस भूमिपूजन के साथ ही राम मंदिर निर्माण के रास्ते में आनेवाली सारी बाधाएं खत्म हो गर्इं।

राम मंदिर के शिलान्यास के साथ ही हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख श्री बालासाहेब ठाकरे के स्वप्न की पूर्ति हो गई। शिवसेनाप्रमुख ने शुरू से ही अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की भूमिका प्रमुखता से रखी थी। मुंबई से शिवसैनिकों का एक दल शिवसेनाप्रमुख के स्मृति स्थल की पवित्र मिट्टी लेकर दो दिन पहले ही यहां अयोध्या पहुंच चुका था।

कल इस दल ने पवित्र सरयू नदी में इस मिट्टी को प्रवाहित किया। इस अवसर पर शिवसैनिक व मीरा-भाइंदर के शिवसेना नगरसेवक विक्रम प्रताप सिंह ने बताया कि लक्ष्मण किला के महंत श्री मैथिली शरण रमन दास जी ने बालासाहेब की स्मृति स्थल के लिए पवित्र सरयू नदी का जल व अयोध्या की मिट्टी भी भेजी है। यह जल व मिट्टी बालासाहेब की स्मृति स्थल के लिए दी गई है। इस अवसर पर विक्रम प्रताप सिंह के साथ संतोष काले, स्थानीय शिवसैनिक सुरेश सिंह, अभिनव सिंह, राजेश पटेल आदि मौजूद थे।

कल भूमिपूजन के दौरान पूरे अयोध्या में गजब का उत्साह दिख रहा था। रंग-बिरंगे रंगों में रंगी रामनगरी कह रही थी मानो आज श्रीराम का कलयुगी वनवास खत्म हुआ। भूमिपूजन के लिए श्री रामलला को धारण कराई गई हरी रंग की रत्नजड़ित विशिष्ट पोशाक को रामादल ने बड़े यत्न से तैयार कराया था। भूमिपूजन पर करोड़ों लोगों ने इस भव्य पोशाक में रामलला का दर्शन कर दिव्यता की अनुभूति की। रामादल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्किराम ने दो अगस्त को रामलला का चार सेट पोशाक एवं जन्मभूमि पर फहराया जा रहा धर्मध्वज सहित विजय पताका के भी सात सेट मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास को उनके आश्रम सत्यधाम पहुंच सौंप दिया था।