" /> यूपी का बस्ती जिला बना अवैध असलहों का हब!

यूपी का बस्ती जिला बना अवैध असलहों का हब!

छः माह में अवैध असलहों के साथ सौ से ज्यादा की गिरफ्तारी

पूर्वी उत्तर प्रदेश का बस्ती जिला कुछ वर्षों में अवैध असलहों का हब बनकर उभरा है। पुलिस के रिकॉर्ड और गिरफ्तारियां बता रही हैं कि जिस असलहा तस्कर सुभाष लोहार को उसके साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया है, वह पुलिस से 11 वर्षों तक आंख-मिचौली खेलता रहा। इन वर्षो में उसने सैकड़ों युवकों को अवैध असलहा बेचा है। सूत्रों की मानें तो खरीदारों में शौकीन युवा ही नहीं पुलिस भी शामिल है। सुभाष की गिरफ्तारी के बाद यह सामने आया है। मगर पुलिस ने उसे लिखा-पढ़ी में जिक्र नहीं किया है, जिससे उसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है। शनिवार को एक बार फिर पुलिस की संयुक्त टीम ने तस्करों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया है। जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि अवैध असलहों के मामले में यूपी के बस्ती जिले के आगे बिहार का मुंगेर पीछे छूट रहा है। गिरफ्तार सुभाष ने पुलिस के सामने खुद कबूल किया है कि परशुरामपुर क्षेत्र के बस्थानवां स्थित अपने घर में बनाई मिनी फैक्ट्री में सैकड़ों तमंचे क्षेत्र के अलावा गैर जिलों में सप्लाई दे चुका है। बताया जा रहा है कि छावनी क्षेत्र में हुई अधिकांश आपराधिक वारदातों में बस्थनवा के बने असलहे का इस्तेमाल हुआ है। रविवार को सुभाष के साथ पकड़े गए चारों आरोपी उसके कैरियर है। जो आर्डर मिलने पर जगह-जगह सप्लाई करते थे। इस गिरोह का पर्दाफाश भी 18 जून को बस्थानवा बाजार में वाहन चेकिंग के दौरान बाइक सवार तीन युवकों के पास से अवैध असलहा बरामद होने के बाद हुआ था। इसके बाद पुलिस ने छावनी क्षेत्र के मुंडेरीपुर, कलंद्रहा, विक्रमजोत, कल्याणपुर, खतमसराय, बाघानाला, दुबौली दूबे, नियामतपुर, इमिलिया सहित तमाम गांवों के एक दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की। इसके बाद फैक्ट्री में जखीरा बरामद किया गया। हालांकि अवैध असलहों के कई धंधेबाज पुलिस की कार्रवाई से फरार हो गए हैं। सुभाष लोहार के फैक्ट्री में निर्मित असलहों के खरीद-फरोख्त और उसके नेटवर्क का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह काफी दिनों तक पुलिस का भी चहेता बना रहा। बताते हैं कि पूछताछ में उसने कबूल किया है कि उसने पुलिस के लोगों को भी तमंचे बेचे हैं। यह बात सुनकर पुलिस के आला अधिकारी भी चौक गए, उनके सामने असहज स्थिति पैदा हो गई थी। कई इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर का उसने नाम भी लिया था लेकिन पुलिस ने उसे अपनी जांच में शामिल नहीं किया। जिले में आए दिन पकड़े जा रहे अवैध असलहों से यह साबित होता है कि पुलिस उनके ताकत के आगे बेबस है या फिर उनकी मिलीभगत से अवैध असलहों का कारोबार फल-फूल रहा है। ऐसा नहीं है तो बार-बार असलहों के बड़े धंधेबाज के पकड़े जाने के बावजूद इस पर अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा? पिछले छह महीनों पर गौर करें तो अवैध शस्त्र के साथ सौ से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। पंद्रह सौ से पैंतीस हजार रुपए तक के तमंचे जब चाहें, बस्ती जिले में आसानी से उपलब्ध हैं। यही कारण है कि आए दिन हत्या, लूट, धमकी और दहशत फैलाने के लिए फायरिंग की घटनाएं घटित हो रही हैं। 27 जुलाई, 2018 को लालगंज थाना क्षेत्र के भक्तूपुर में तमंचा-कारतूस की फैक्ट्री पकड़ी गई थी। एक झोपड़ी में कोयले की भट्ठी लगाकर असलहा बनता था, जिसकी गोरखपुर समेत अन्य जिलों में सप्लाई होती थी। इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड गोरखपुर के बेलघाट थानाक्षेत्र के एकौना बुजुर्ग का विवेक कुमार सिंह बताया जा रहा था, जो बिहार के गोपालगंज निवासी गोलू के साथ धंधा करता था। इसके पूर्व 12 फरवरी, 2017 को कप्तानगंज में एक किराए के अर्धनिर्मित मकान में असलहा फैक्ट्री पकड़ी गई थी। वहां से भारी मात्रा में निर्मित-अर्धनिर्मित तमंचा व बनाने के उपकरण बरामद किए गए थे। इस मामले में गैर प्रदेश और जनपद के दस बदमाश भी पकड़े गए थे, जो बावरिया गिरोह से जुड़े बताए जा रहे थे। पकड़े गए गिरोह के पास से लाखों रुपए कीमत चोरी के जेवरात व अन्य उपकरण भी बरामद किए गए थे। हफ्ते पहले परशुरामपुर थाने के बस्थनावां में असलहे की फैक्ट्री पकड़ी गई। सुभाष लोहार नाम के कारीगर और उसके सहयोगियों के कब्जे से भारी मात्रा में तमंचा, कारतूस, बर्मा मशीन, ग्राइंडर, आयरन कटर, डाइमेकर आदि के साथ 47 अर्द्धनिर्मित तमंचा बरामद किए गए थे। देसी असलहे के अलावा बस्ती जिले में मेड इन चीन या जापान लिखा हुआ विदेशी मॉडल असलहे की खासी डिमांड है, जिसे मुंगेर से लाकर बेचा जाता है। पिस्टल, रिवॉल्वर, तमंचा बारह बोर, तीन सौ पंद्रह, अद्धी शामिल हैं। सबसे अधिक विदेशी मॉडल के माउजर और पिस्टल की डिमांड है, जो बीस से लेकर पैंतीस हजार के बीच बिकते हैं। शनिवार को एक बार फिर एसओजी प्रभारी सर्वेश राय और थानाध्यक्ष कप्तानगंज हरेकृष्ण उपाध्याय की टीम की संयुक्त कार्रवाई के दौरान उमेश चौधरी, संतोष चौधरी और धर्मेंद्र चौहान उर्फ धामू चौहान, राजकुमार उर्फ हेटे चौधरी को पुलिस मुठभे़ड़ में अवैध असलहा के साथ गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्त के पास से दो अदद पिस्टल देशी 32 बोर, तमंचा 303 बोर का एक अदद तमंचा, एक अदद 12 बोर का, तमंचा तीन अदद 315 बोर का, जिंदा कारतूस 0.32 का दस अदद व एक खोखा कारतुस, 12 बोर का मिस एक अदद व दो जिंदा कारतूस,  पांच अदद जिंदा कारतूस 315 बोर, हिरो स्प्लेण्डर प्लस, एक स्कूटी जूपीटर बरामद किए गए हैं। पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि हम लोग राजकुमार से असलहा खरीदते हैं। यह सुरेंद्र वर्मा का रिश्तेदार है, जो कुछ दिन पूर्व अवैध शस्त्र बनाने में जेल गया है। उसके द्वारा सुरेंद्र वर्मा से व बिहार से असलहा लाकर बेचा जाता है। हम लोगों को प्रत्येक असलहा से 1500 से 2000 रुपए तक का फायदा होता है, हम लोग यह कार्य अपने आर्थिक व भौतिक लाभ के लिए करते हैं। अभियुक्त संतोष चौधरी पर आठ मुकदमे पहले से ही दर्ज है।