बेस्ट इज बेस्ट! समय रहते बचे 1000 कर्मी

मुंबई की दूसरी लाइफलाइन कही जानेवाली बेस्ट बस कर्मियों को तंबाकू, गुटका व सुपारी के नशा से मुक्त करने के लिए बेस्ट द्वारा निरंतर प्रयास किया जा रहा है। बेस्ट के डॉक्टरों द्वारा चलाई जा रही तंबाकू मुक्ति मुहिम के चलते लगभग १००० बेस्ट कर्मियों को मुंह के वैंâसर का शिकार होने से बचाया गया है। कुछ अस्पतालों के सहयोग से समय रहते ही ऐसे १,२५६ ड्राइवर व कंडक्टर को खोज निकाला गया जिनमें प्री-कैंसर लीजन (मुंह के अंदर घाव व सफेद चटे) पाए गए। समय रहते ही इनकी जांच की गई। बेस्ट के डॉक्टरों द्वारा लगाई गई बेस्ट तरकीब, प्राथमिक उपचार और काउंसलिंग के बाद ९० प्रतिशत लोग कैंसर का शिकार होने से बच गए हैं।
अभी जंग बाकी है!
बेस्ट का सफल कैंसर मुक्ति अभियान
बेस्ट पिछले ३ सालों से अपने कर्मचारियों को तंबाकू मुक्त करने के लिए प्रयासरत है। टाटा मेमोरियल अस्पताल, इंडियन कैंसर सोसाइटी और नायर डेंटल कॉलेज द्वारा कुल १२,००० ड्राइवर और कंडक्टरों के मुंह की जांच की गई थी। इसमें हर १० वां व्यक्ति कैंसर के मुहाने पर था लेकिन कुछ कर्मी अब भी लत को छोड़ने में असफल हैं। ऐसे में इन्हें प्रोत्सहित करने के लिए और तंबाकू के खिलाफ जंग लड़ने के लिए बेस्ट की तरफ से हर मुमकिन प्रयास किया जा रहा है।
बता दें कि अब तक १५,००० बेस्ट कर्मियों की काउंसलिंग की जा चुकी है। इसमें १२  हजार कर्मियों के जांच के बाद १,२५६ ऐसे मिली जिन्हें आगे चल कर कैंसर होने की संभावनाएं थी। बेस्ट के चीफ मेडिकल ऑफिसर अनिल सिंगल ने बताया कि १,२५६ में से ९० प्रतिशत कर्मियों की बायोप्सी की गई और कैंसर की पुष्टि नहीं हुई। हमने तुरंत उक्त लोगों का प्राथमिक उपचार और काउंसलिंग शुरू की। इनमें कई ने तंबाकू का सेवन छोड़ दिया तो कई अब भी इसे छोड़ने के लिए लड़ रहे हैं।
५० फीसदी तंबाकू की गिरफ्त में
बेस्ट में लगभग ४० हजार कर्मी हैं जिसमें ५० प्रतिशत तंबाकू की गिरफ्त में थे लेकिन काउंसलिंग के बाद काफी हद्द तक लोगों ने तंबाकू का सेवन पूरी तरह बंद कर दिया।
गिफ्ट देकर सम्मान
डॉ. अनिल सिंगल ने बताया कि तंबाकू छोड़नेवाले कर्मचारियों को गिफ्ट में घड़ी देकर सम्मानित किया जाता है। अब तक २०० कर्मचारियों को गिफ्ट के रूप में घड़ी दी गई है।
तंबाकू का तोड़
बेस्ट कर्मियों को तंबाकू मुक्त करने के लिए डॉक्टरों ने तोड़ निकाला है। इसमें निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी, मैजिक मिक्सचर (लौंग, चावल, काली मिरी, दालचीनी, सौंफ से बना) सेवन के लिए दिया जाता है और नशा मुक्ति केंद्र कर्मियों को नशा के पीछा छुड़ाने में मदद कर रहा है।