" /> भानु सप्तमी को ‘भग’वान होते हैं सूर्य

भानु सप्तमी को ‘भग’वान होते हैं सूर्य

जब सप्तमी रविवार के दिन आती है, उसे भानु सप्तमी कहा जाता है। इस माह १४ मार्च की रात अर्थात १५ मार्च की सुबह ४.२५ बजे से १५-१६ मार्च की रात ३.१८ बजे तक सप्तमी रहेगी इसलिए १५ मार्च को उदया तिथि सप्तमी होगी। इस दिन भगवान सूर्य देव पहली बार सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर प्रकट हुए थे। रविवार का दिन भगवान सूर्य देव का माना जाता है। उस दिन सूर्य देव की उपासना का महत्व होता है। इस दिन को सूर्य सप्तमी भी कहा जाता है।
११ हजार रश्मियों के साथ तपने वाले सूर्य ‘भग’ रक्तवर्ण हैं। यह सूर्यनारायण के सातवें विग्रह हैं और ऐश्वर्य रूप से पूरी सृष्टि में निवास करते हैं। संपूर्ण ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान और वैराग्य, ये छह भग कहे जाते हैं। इन सबसे संपन्न को ही भगवान माना जाता है। अस्तु श्रीहरि भगवान विष्णु के नाम से जाने जाते हैं। रविवार को ‘विष्णवे नम:’ मंत्र से सूर्य की पूजा की जानी चाहिए। तांबे के बर्तन में शुद्ध जल भरकर तथा उसमें लाल चंदन, अक्षत, लाल रंग के फूल आदि डालकर सूर्यनारायण को अर्घ्य देना चाहिए। रविवार के दिन एक समय बिना नमक का भोजन सूर्यास्त से पहले करना चाहिए।
सूर्य देव उर्जा के सबसे बड़े स्रोत माने जाते हैं, इनकी पूजा-अर्चना से सौभाग्य मिलता है। रविवार के दिन सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व अधिक होता हैं। मानव जाति के अस्तित्व के लिए सूर्य का बहुत बड़ा योगदान है। सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है। यह सभी गृहों के मध्य में स्थित है। ब्रह्मांड में सूर्य के चारों तरफ ही सभी गृह चक्कर काटते हैं। विभिन्न ग्रहों में सूर्य की स्थिति में परिवर्तन से दशाओं में भी परिवर्तन आता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य का प्रभाव ग्रहों पर अधिक होता है। इस दिन सूर्य की किरणें जब सूर्य यंत्र पर पड़ती हैं तब महाभिषेक किया जाता है। भानु सप्तमी के दिन, लोग सूर्य देव को खुश करने के लिए आदित्य हृदयस्रोत और अन्य सूर्य स्रोत पढ़ते एवं सुनते हैं, जिसके कारण रोगी मनुष्य स्वस्थ एवं स्वस्थ निरोग रहता है। सभी सप्तमी में भानु सप्तमी का विशेष स्थान होता है। यह विशेष तौर पर दक्षिणी एवं पश्चिमी हिंदुस्थान में मनाई जाती है।
भानु सप्तमी पूजा विधि
सूर्योदय से पूर्व स्नान करके सबसे पहले सूर्य देव को जल चढ़ाएं।
‘वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ निर्विघ्नं कुरुमेदेव सर्व कार्येशु सर्वदा’ इस मंत्र का उच्चारण कर सूर्य को जल चढ़ाएं।
अपनी ही जगह पर परिक्रमा करें।
इस दिन कई लोग उपवास रखते हैं।
पवित्र नदियों पर स्नान करें।
दक्षिण भारत में सूर्योदय के पूर्व स्नान करके घर के द्वार पर रंगोली बनाई जाती हैं।
कई लोग इस दिन गाय के दूध को उबालते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे सूर्य देव को भोग लगता है।
इस दिन गेहूं की खीर बनाई जाती है।
भानु सप्तमी पूजा के उद्देश्य
सूर्य देव की अर्चना करने से रोगी का शरीर निरोग होता है और जो स्वस्थ हैं वे सदैव स्वस्थ रहते हैं।
रोज भगवान सूर्य को जल चढ़ाने से बुद्धि का विकास होता है। मानसिक शांति मिलती है।
भानु सप्तमी के दिन सूर्य की पूजा करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
इस एक दिन की पूजा से ब्राह्मण सेवा का फल मिलता है।
इस दिन दान का भी महत्व होता है, ऐसा करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है।
इस दिन द्वादश आदित्य सूर्य मंत्रों का जप किया जाता है, जो भगवान सूर्य के १२ नाम हैं और प्रत्येक महीने के सूर्य का नाम इन्हीं आदित्य में एक होता है। ये इस प्रकार हैं-
ॐ मित्राय नम:
ॐ रवये नम:
ॐ सूर्याय नम:
ॐ भानवे नम:,
ॐ खगाय नम:
ॐ पूष्णे नम:
ॐ हिरण्यगर्भाय नम:
ॐ मरीचे नम:
ॐ सवित्रे नम:
ॐ अर्कायत नम:,
ॐआदिनाथाय नम:
ॐ भास्कराय नम:
भानु सप्तमी श्लोक एवं अर्थ
आदित्यनमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने,
दीर्घ आयुर्बलं वीर्य तेजस तेषां च जायते।
अकालमृत्युहरणम च सर्वव्याधिविनाशम,
सूर्यपादोदकं तीर्थं जठरे धरायाम्यहम
अर्थ: भगवान सूर्य को नमन करने से अकाल मृत्यु की प्राप्ति नहीं होती है। सूर्य देव की उपासना से अकाल मृत्यु पर विजय मिलती है, सभी दुखों का विनाश होता है ऐसे सूर्य देव के चरणों में तीर्थ के समान पुण्य मिलता है।