भूस्खलन के खौफ में भिवंडी

साठे नगर में मंगलवार की रात एक घर की दीवार धराशाई हो गई। इस हादसे में पांच घर क्षतिग्रस्त हो गए। स्थानीय लोगों की सावधानी के चलते जनहानि टल गई लेकिन तेज बारिश के कारण पहाड़ियों पर बसे इलाकों पर खौफ के बादल मंडराने लगे हैं। इन पहाड़ियों पर रहनेवालों की सुरक्षा के लिए २००६ में तत्कालीन आयुक्त ने सुरक्षा दीवार बनाने का आदेश दिया था लेकिन अब तक इसकी नींव भी नहीं रखी गई है।
मालूम हो कि भिवंडी मनपा क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाले साठेनगर, अजमेर नगर, गदहा नगर, राम नगर, शांतिनगर, गायत्री नगर, नई बस्ती और नेहरूनगर सहित आधा दर्जन से इलाके पहाड़ियों पर बसे हैं। इन इलाकों में हजारों लोग झोपड़पट्टियों में रहते हैं। इन्हें महानगरपालिका ने नल, बिजली कनेक्शन भी दिया है। लेकिन आपदा सुरक्षा के नाम पर मनपा के पास कोई खास व्यवस्था नहीं है। साठे नगर में दीवार गिरने की घटना के बाद दमकल विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग को पहुंचने में मशक्कत करनी पड़ी।
पहले भी खिसक चुकी है पहाड़ी
पिछले साल रामनगर में भूस्खलन की घटना हुई थी, जिसमें चार झोपड़े तबाह हो गए थे। जबकि वर्ष २००६ में मूसलाधार बारिश के कारण गदहा नगर की पहाड़ी खिसक गई थी, जिसमें कारण चार लोगों की मौत हो गई थी और छह लोग घायल हो गए थे। जिसके बाद तत्कालीन मनपा आयुक्त ने पहाड़ियों पर रहनेवालों की सुरक्षा के लिए हर पहाड़ी पर सुरक्षा दीवार बनाने का आदेश दिया था। लेकिन १३ साल बीतने के बाद आज तक सुरक्षा दीवार बनना तो दूर एक पत्थर तक कहीं नहीं रखा गया।