बिहार चुनाव: मतदान में बोलेगा विकास रोजगार का मुद्दा

लोकसभा चुनावों के पांचवें चरण में बिहार के पांच संसदीय क्षेत्रों में मत पड़ने हैं। इन क्षेत्रों में विकास, रोजगार, बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की मांग वर्षों से चल रही है। ऐसे में एक बार फिर लोकसभा चुनावों का परिणाम जन समस्या, जातिगत समीकरण और पार्टियों की पकड़ से होकर सामने आएगा।
-सीतामढ़ी – 
यहां से राजग से जदयू ने पूर्व मंत्री सुनील कुमार पिंटू को मैदान में उतारा है जबकि महागठबंधन से राजद ने पूर्व सांसद अर्जुन राय को मैदान में उतारा हैं। हालांकि जदयू ने पहले स्थानीय चिकित्सक डॉ.वरुण को टिकट दिया था, लेकिन दस दिन बाद ही उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। तब आनन-फानन में भाजपा विधायक को जदयू में शामिल करवाकर उन्हें प्रत्याशी बनाया गया।
 मतदाताओं के मुद्दे
इस संसदीय क्षेत्र में ६ विधानसभा सीटें हैं। यहां अब तक जातिगत आधार पर चुनाव लड़ा जाता रहा है। कोई भी दल यहां की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी को दूर करने की बात नहीं कर रहा है। संसदीय क्षेत्र के सभीr गांवों में बेरोजगारों की टोली यहां-वहां खड़ी दिखाई देती है। इस गांव में बिजली भी बड़ा मुद्दा है।
 समीकरण
इस संसदीय क्षेत्र के तहत विधानसभा की ६ सीटें आती हैं- सीतामढ़ी, रुन्नी सैदपुर, बाजपट्टी, रीगा, बथनाहा, परिहार और सुरसंड। २०१५ के बिहार विधानसभा चुनाव में इन ६ सीटों में से भाजपा और आरजेडी को २-२ सीटों पर जीत हासिल हुई थी, जबकि १-१ सीट जेडीयू और कांग्रेस के खाते में गई।
-मधुबनी- 
मधुबनी जिले की पहचान कवि कोकिल विद्यापति की जन्मस्थली और कालिदास की ज्ञानस्थली के रूप में है। विश्व प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग ने इस लोकसभा क्षेत्र को विश्व में पहचान दिलाई। राजनीतिक क्षेत्र में इस लोकसभा की पहचान पूर्व में वामपंथियों के गढ़ के रूप में भी रही है। बाद के चुनावों में भाजपा ने पकड़ बनाई। इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कई दिग्गज नेताओं ने किया है। हुकुमदेव नारायण यादव वर्तमान सांसद हैं।
 मतदाताओं के मुद्दे
यह क्षेत्र अभी भी विकास के लिए तरस रहा है। अधिकांश भाग अभी भी रेल सेवा से वंचित है। हालांकि मधुबनी रेलवे स्टेशन को दूसरा सबसे खूबसूरत स्टेशन का दर्जा प्राप्त है। बाढ़-सुखाड़ का स्थायी निदान, बंद चीनी मिलों को शुरू कराने, रेल सेवा शुरू करने की मांग लगातार होती रही है।
 समीकरण
मधुबनी लोकसभा क्षेत्र का विस्तार मधुबनी और दरभंगा दो जिलों में है। मधुबनी जिले के चार विधानसभा क्षेत्र बिस्फी, हरलाखी, बेनीपट्टी और मधुबनी तथा दरभंगा जिले के दो विधानसभा क्षेत्र केवटी व जाले इस लोकसभा क्षेत्र के अधीन हैं। इनमें बिस्फी, मधुबनी व केवटी पर राजद का कब्जा। इसी तरह बेनीपट्टी पर कांग्रेस व जाले पर भाजपा का कब्‍जा है।
-मुजफ्फरपुर- 
मुजफ्फरपुर संसदीय सीट परंपरागत तौर पर कांग्रेस का गढ़ मानी जाती रही है। हालांकि, समाजवादी और साम्यवादी विचारधारा भी बहती रही। देश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानेवाले कांग्रेस और समाजवादी विचारधारा के नेता यहां से चुने जाते रहे हैं। वर्तमान में अजय निषाद सांसद (भाजपा) हैं।
 मतदाताओं के मुद्दे
इस चुनाव में विकास कार्य पर ही वोट पड़ेंगे। शहरी क्षेत्रों के लोगों में जलजमाव, प्रदूषण, अपराध और पताही हवाई अड्डे का विकास जेहन में है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पुल-पुलिया, प्रखंड से संपर्क पथ, सिंचाई आदि मुद्दे हावी रहेंगे। गर्मी में एईएस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) आदि का भी प्रकोप होता है। नवरुणा हत्याकांड, बेला मांस प्रकरण, बालिका गृह यौन कांड और पूर्व मेयर समीर हत्याकांड बड़ी घटनाएं रहीं। जिसका चुनावों में प्रभाव पड़ सकता है।
 समीकरण
मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र में कुल छह विधानसभा क्षेत्र हैं। मुजफ्फरपुर (नगर), कुढी, सकरा, बोचहां, गायघाट और औराई। मुजफ्फरपुर संसदीय सीट के सभी छह विधानसभा क्षेत्र में सीटों के लिहाज से राजद और भाजपा की पकड़ बराबर-बराबर दिखती है। मुजफ्फरपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से कुल २२ उम्मीदवार चुनाव मैदान में रह गए हैं।
-सारण-
 दूसरी आजादी के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जन्मभूमि सारण संसदीय क्षेत्र हमेशा से हाईप्रोफाइल रहा है। यह धरती लोक सांस्कृतिक के जनक भिखारी ठाकुर के लोक नाट्य के कारण भी अंतरराष्ट्रीय  पहचान रखती है। २०१४ में भाजपा के राजीव प्रताप रूडी ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को हराकर यह सीट जीती।

मतदाताओं के मुद्दे 

सारण लोक सभा क्षेत्र में चिकित्सा सुविधा का अभाव है। ा मढ़ौरा चीनी मिल बंद पड़ी है। लोगों को रोजगार की दरकार है। सारण में जाम और जलजमाव मुख्य समस्या है। सारण में युवाओं को रोजगार न मिलना भी बड़ी समस्या है।
 समीकरण
राजपूत और यादव बहुल सारण संसदीय क्षेत्र में निर्णायक वोट वैश्यों और मुस्लिमों का माना जाता है। एमवाय समीकरण बनाकर लालू यादव इस सीट से चार बार सांसद रहे हैं। राजपूत और वैश्यों की गोलबंद कर भाजपा के राजीव प्रताप रूडी इस सीट से ३ बार चुने गए। सारण लोक सभा में छह विधान सभा क्षेत्र हैं- छपरा, सोनपुर, परसा, मढ़ौरा, अमनौर और गडख़ा। सांसद राजीव प्रताप रूडी ने कौशल विकास मंत्री रहते हुए सारण में युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्र, सड़कों का विस्तार और बिजली उपलब्ध करवाया।