" /> भाजपा ने किया किसानों का नाश!, ‘हर पार्टी तय करे, वह भाजपा या किसान, किसके साथ?’

भाजपा ने किया किसानों का नाश!, ‘हर पार्टी तय करे, वह भाजपा या किसान, किसके साथ?’

पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम का एलान

खेतों में अन्न पैदा करनेवाले किसानों का भाजपा ने नाश कर दिया है। अब यह देश की हर पार्टी को तय करना है कि वह भाजपा के साथ है या किसानों के साथ? कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने इस एलान के साथ कृषि संबंधी विधेयकों के खिलाफ सभी विपक्षी दलों को एकजुट होने की अपील की है। चिदंबरम ने यह दावा भी किया कि २०१९ के लोकसभा चुनाव से जुड़े कांग्रेस के घोषणापत्र में किसानों से किए वादों को भाजपा तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है, जबकि इस सरकार ने काॉरपोरेट के समक्ष समर्पण कर दिया है।

पूर्व वित्त मंत्री ने एक बयान में कहा, ‘भाजपा अपने खुद के बनाए हुए जाल में फंस गई है। दशकों तक यह व्यापारियों के वर्चस्व वाली पार्टी रही और अब भी है। वस्तुओं और सेवाओं के अभाव वाली अर्थव्यवस्था का इनके द्वारा दोहन किया गया। इंदिरा गांधी द्वारा हरित क्रांति लाने और पीवी नरसिंह राव एवं मनमोहन सिंह द्वारा शुरू किए गए उदारीकरण के बाद हालात बदलने लगे। आज हमारे यहां गेहूं और चावल जैसी उपज अधिक मात्रा में पैदा हो रही हैं। किसानों की ताकत की बुनियाद पर कांग्रेस की सरकारों ने खाद्य सुरक्षा प्रणाली बनाई, जिसके बाद २०१३ में खाद्य सुरक्षा कानून बना। हमारी खाद्य सुरक्षा प्रणाली के तीन स्तंभ- न्यूनतम समर्थन मूल्य, सरकारी खरीद और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस ने २०१९ में इन्हीं बुनियादी सिद्धांत के आधार पर घोषणापत्र तैयार किया था। प्रधानमंत्री और भाजपा के प्रवक्ता ने कांग्रेस के घोषणापत्र को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया है।’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘हमने वादा किया था कि कृषि उत्पादक कंपनियों/संगठनों को प्रोत्साहित करेंगे ताकि किसानों की लागत, प्रौद्योगिकी और बाजार तक पहुंच हो सके। हमने यह भी कहा था कि उचित बुनियादी ढांचे तथा बड़े गांवों एवं छोटे कस्बों में सहयोग से कृषि बाजार स्थापित किए जाएंगे ताकि किसान अपनी उपज ला सकें और खुलकर बेच सकें।’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘हमारा वादा स्पष्ट है, लेकिन मोदी सरकार ने कॉरपोरेट और व्यापारियों के समक्ष समर्पण कर दिया है। कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों को हर मंच पर इन विधेयकों का विरोध करने के लिए हाथ मिलाना चाहिए।‘ गौरतलब है कि लोकसभा ने कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-२०२० और कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-२०२० को मंजूरी दी है।