" /> भाजपा ने रची थी महावितरण के निजीकरण की साजिश!

भाजपा ने रची थी महावितरण के निजीकरण की साजिश!

♦ फडणवीस सरकार की गलत नीतियों के कारण गहराया बिजली संकट‌
♦ रु. ७९ हजार करोड़ बिल बकाया

भाजपा ने अपने शासनकाल में राज्य की प्रमुख बिजली प्रदाता कंपनी महावितरण का आर्थिक दिवालिया निकालकर उसे निजी लोगों के हाथ में सौंपने की साजिश रची थी। इस साजिश के तहत कंपनी पर बिजली बकाया ७९ हजार करोड रुपए के पार पहुंच गया है। कल मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई बैठक में ऊर्जा विभाग ने साबित करने की कोशिश की कि महावितरण के निजीकरण की पूरी साजिश रची गई थी। मुख्यमंत्री ने पूरी रिपोर्ट तैयार कर मंत्रिमंडल की बैठक में पेश करने का आदेश दिया है।
ऊर्जा मंत्री नितिन राऊत के अनुसार राज्य की प्रमुख बिजली प्रदाता कंपनी महावितरण को हम घाटे में नहीं जाने देंगे। सरकार पूरी समस्याओं का हल निकालकर ग्राहकों के साथ कंपनी के भी उत्थान के लिए कार्य करेगी। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इसका हल निकालने का आश्वासन दिया है। कंपनी लगभग ७९,००० करोड़ रुपए के घाटे में है। बिजली बिल का भुगतान नहीं हुआ और स्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो राज्य अंधेरे में डूब जाएगा। इस बैठक में मुख्यमंत्री अजीत पवार भी मौजूद थे। राऊत ने बताया कि कंपनी का निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा। दरअसल पूरा मामला भाजपा शासनकाल से चल रहा है। बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों की मानें तो तत्कालीन ऊर्जा मंत्री बावनकुले को इस बारे में विस्तृत जानकारी कई बार दी जा चुकी है लेकिन उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया। तत्कालीन सरकार द्वारा कोई एक्शन न लिए जाने के कारण यह घाटा बढ़ता ही गया‌। तत्कालीन सरकार ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। राज्य नियामक आयोग को भी इस बारे में जानकारी दी जा चुकी है कि वैâसे निजीकरण का खेल चल रहा है। हाल ही में केंद्र सरकार ने एक नया कानून पारित किया है, जिसमें जो-जो सरकारी कंपनियां घाटे में हैं, उसे निजी हाथों में सौंप दिया जाएगा। विशेषज्ञों ने इसका आकलन यह किया है कि शहरी इलाकों में बिजली बिल का मसला कम है। सबसे मुश्किल में ग्रामीण अंचलों के किसान हैं। सबसे ज्यादा किसानों के बिल बकाया है। अब नया विवाद पैदा हुआ है। वर्ष २०२० में सौर ऊर्जा और कृषि पंपों को लेकर नई पॉलिसी बनाई गई है। इसमें बिजली उपभोक्ताओं को बिजली बिल भरने के लिए बहुत बड़ी राहत दी गई है। पूरी बिजली बिल किस्तों में अदा करनी है। बिल का पैसा ग्राहक भरेंगे तो आधा पैसा सरकार वहन करेगी। आरोप है कि भाजपा के लोग यह नीति मानने को तैयार नहीं हैं और लोगों को भड़का रहे हैं। बिजली बिल वसूली के लिए जानेवाले कई अधिकारियों पर हमले हो चुके हैं।
हमारी योजना पर अमल -बावनकुले
भाजपा नेता व तत्कालीन ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बवनकुले का दावा है कि इस पॉलिसी का मसौदा हमने तैयार किया है, जिसे महाविकास आघाड़ी सरकार इंप्लीमेंट कर रही है। इसके सारे सबूत हमारे पास है और जितने भी हमने टैक्स भरे हैं उसकी पूरी जानकारी उपलब्ध है। हमने किसानों की बिजली, कृषि पंप और सौर ऊर्जा के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। एलिफेंटा से लेकर जहां भी बिजली नहीं पहुंच पाई थी, वहां हमने बिजली पहुंचाई है।
महावितरण के निजीकरण की प्लानिंग
बिजली मामलों के विशेषज्ञ प्रताप होगाड़े बताते हैं कि समस्याओं को लेकर हमने तत्कालीन ऊर्जा मंत्री बावनकुले से कई बार संपर्क किया था, लेकिन कोई हल नहीं निकला। यह सही बात है कि कृषि पंप और सौर ऊर्जा की नई नीति वर्ष २०२० में मौजूदा ऊर्जा मंत्री नितिन राऊत के कार्यकाल में बनाई गई है। केंद्र सरकार की निजीकरण की नीति है। इसके लिए केंद्र ने हाल ही में कानून भी पारित किया है। शहरी इलाकों को छोड़ दें तो ग्रामीण इलाकों में कार्य करनेवाली सरकारी कंपनी महावितरण को बिना सरकारी सहयोग दिए घाटे में लाकर निजीकरण करने की सच्चाई को झुठलाया नहीं जा सकता।