" /> मोबाइल नंबर ने खोली पोल!, जीवनरक्षक औषधि की कालाबाजारी

मोबाइल नंबर ने खोली पोल!, जीवनरक्षक औषधि की कालाबाजारी

वैश्विक महामारी कोरोना से दुनियाभर में लोग अपनी जान बचाने की चुनौती झेल रहे हैं। बीमारी और लॉकडाउन से बढ़ी बेकारी लोगों की कमर तोड़ रही है। ऐसे माहौल में मजबूर लोगों की मदद करने की बजाय कुछ लोग कोरोना से संक्रमित लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर अपनी तिजोरी भरने का प्रयास कर रहे हैं। कोरोना मरीजों के लिए जीवनरक्षक औषधि मानी जा रही रेमडेसीविर की बढ़ी मांग को कालाबाजारी करनेवाले लोग मुनाफाखोरी के अवसर के रूप में देख रहे हैं। मार्केट में रेमडेसीविर की उपलब्धि घटाकर ये लोग पांच गुना से अधिक कीमत में रेमडेसीविर इंजेक्शन बेच रहे हैं। इसका खुलासा एफडीए एवं मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट-७ द्वारा की गई संयुक्त कार्रवाई में हुआ है। कालाबाजारी करनेवाले गिरोह से जुड़े एक सदस्य के मोबाइल नंबर से इस गिरोह का राजफाश हुआ।
बता दें कि मुंबई, महाराष्ट्र सहित पूरे देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना के कारण कोरोना की कारगर औषधियों की कालाबाजारी भी बढ़ रही है। मुंबई व आसपास क्षेत्र में जीवनरक्षक औषधि के रूप में जानी जा रही रेमडेसीविर इंजेक्शन की कालाबाजारी से जुड़े गिरोह के ऐसे ही एक सदस्य का मोबाइल नंबर एफडीए के औषधि निरीक्षक शरदचंद्र नांदेकर को मिला था। उक्त सूचना के बाद नांदेकर ने एफडीए के संयुक्त आयुक्त (सतर्कता) सुनील भारद्वाज के मार्गदर्शन में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट-७ के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सतीश तावरे को इस गिरोह की सूचना दी। डीसीपी अकबर पठान के मार्गदर्शन व सतीश तावरे के नेतृत्व में यूनिट-७ के एपीआई महेंद्र दोरकर, आनंद बागडे व पीएसआई संजय सुर्वे की टीम ने खबरी से मिले मोबाइल नंबर पर संपर्क किया। सौदा तय होने के बाद टीम ने नकली ग्राहक के जरिए मुलुंड-पश्चिम के एलबीएस रोड स्थित बालराजेश्वर मंदिर के पास जाल बिछाया। वहां कालाबाजारी में शामिल गिरोह के एक सदस्य को यूनिट-७ की टीम ने गिरफ्तार किया। उक्त सदस्य की निशानदेही पर ६ और आरोपी बाद में पुलिस के शिकंजे में फंस गए। आरोपियों में शामिल नाम विकास दुबे, राहुल गाडा, भावेश शहा, आशिष कनोजिया, रितेश ठोंबरे, गुरविंदर सिंह और सुधीर पुजारी (डेलफा फार्मासिटिकल, घाटकोपर) उनके पास से कुल १३ इंजेक्शन टीम ने बरामद किए हैं। अधिकतम ५,४०० रुपए मूल्यवाले एक रेमडेसीविर इंजेक्शन यह गिरोह अवैध रूप से ३० हजार रुपए में बेचता था। इस घटना के बाद जीवनावश्यक औषधियों की कालाबाजारी रोकने व छपी हुई कीमत से ज्यादा कीमत पर औषधि बेचनेवाले पर नकेल कसने के लिए प्रशासन ने टोल फ्री नंबर १८०० २२२ ३६५ / ०२२- २६५९२३६२ जारी किया है।