मनपा थी मुस्तैद, वर्ना मचता हाहाकार! मुंबई पर था बादलों का डबल संकट

मुंबई में १ और २ जुलाई के बीच हुई बारिश किसी प्रलय से कम नहीं थी। हालांकि मनपा की मुस्तैदी के कारण मुंबईकरों को यह आभास भी नहीं हुआ कि दो से तीन दिनों में जितनी बारिश हुई, उससे हाहाकार मच सकता था और मुंबई थम सकती थी। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो मुंबई पर पिछले दिनों बादलों का डबल संकट था। दोहरे सिस्टम की मार के चलते मुंबई में महज २४ घंटे में ३७५ मिमी बारिश हुई, जो कि सामान्य से १० गुना अधिक थी।
बता दें कि मनपा ने इस बार मॉनसून के लिए पहले से ही कमर कस ली थी। फिर वो पंपिंग स्टेशन का कार्य हो या नाला सफाई का। मनपा पहले से मुस्तैद थी वरना महीनों में होनेवाली बारिश ३ से ४ दिनों में होना किसी बड़े संकट से कम नहीं था। मौसम विशेषज्ञ दिनेश मिश्रा ने बताया कि मुंबई को पिछले दिनों डबल मॉनसूनी सिस्टम का अटैक झेलना पड़ा है। बंगाल की खाड़ी में जब भी कम दबाव का क्षेत्र निर्माण होता है तो मुंबई को अच्छी बारिश मिलती है। बंगाल में कम दबाव का क्षेत्र निर्माण हुआ ही है उसके साथ वलसाड और मुंबई के बीच निम्न कम दबाव का क्षेत्र निर्माण हो गया। अब निम्न कम दबाव के क्षेत्र को उत्तर की ओर बढ़ना चाहिए था लेकिन वो पूरे दिन दक्षिण में ही रह गया यानी जो बारिश गुजरात को मिलनी चाहिए थी वो डहाणू, पालघर और मुंबई को मिली जबकि मुंबई में पहले से बंगाल की खाड़ी का सिस्टम बारिश दे रहा था। क्षेत्रीय मौसम विभाग के उपनिदेशक के एच होसालिकर ने मुंबई में हुई असामान्य बारिश के पीछे दोहरे सिस्टम की मार को जिम्मेदार बताया।
 मनपा का पंपिंग स्टेशन वरदान
मॉनसून के चार महीनों में होनेवाली कुल २,५५० मिमी बारिश का ४० फीसदी पानी महज ५ से ६ दिनों में बरस गया है। उक्त आंकड़े यह बताते हैं कि मुंबई में हुई बारिश बिल्कुल भी सामान्य नहीं है। इसके बावजूद मुंबई थमी नहीं क्योंकि मनपा द्वारा बनाए गए ६ पंपिंग स्टेशनों ने अपनी अहम भूमिका निभाई। महज २४ घंटों में ६ पंपिंग स्टेशनों ने १४,००० मिलियन लीटर बारिश का पानी मुंबई के जमीन से समुद्र में फेंका है। गौरतलब है कि यदि मनपा ने पंपिंग स्टेशन न बनाए होते तो मुंबई में बाढ़ आ चुकी होती। बता दें कि तुलसी-विहार तालाब की क्षमता १४,००० मिलियन लीटर है।
 थमी नहीं बेस्ट
मुंबई के आसपास के जिलों में ट्रेनों की ही आवाजाही प्रभावित हुई लेकिन मुंबई में मनपा की बेस्ट थमी नहीं। इसका सबसे बड़ा कारण मुंबई में जलजमाव न के बराबर था। काम-काज के लिए व जरूरी कार्य से निकले मुंबईकरों को दिक्कत न हो इसलिए सड़कों पर बेस्ट की बसें यात्रियों की सेवा में हाजिर थीं।