" /> भैया मेरे, कोरोना को है भगाना!

भैया मेरे, कोरोना को है भगाना!

मास्क के साए में मना रक्षा बंधन गिफ्ट में दिए गए मास्क व सेनेटाइजर

पूरी दुनिया के साथ ही मुंबई भी कोरोना के कहर से जूझ रही है। लॉकडाउन के कारण शहर की बहुत सारी गतिविधियां बंद हैं। सिर्फ आवश्यक कार्यों की ही अनुमति है। ऐसे में इस साल कई त्योहारों का रंग कुछ फीका रहा है। ईद हो या रक्षा बंधन हर त्योहार इस बार कोरोना के साए में मनाया जा रहा है। कल
भाई-बहन के रक्षा बंधन का पवित्र त्योहार कोरोना वायरस के खौफ के बीच मनाया गया। इस कारण इस बार रक्षा बंधन का रूप भी अलग नजर आया। भाइयों और बहनों के बीच मास्क पहनकर रक्षा बंधन की रस्म अदा की गई। इस दौरान मानो हर बहन अपने भाई से यही कह रही थी कि भैया मेरे, कोरोना को है हराना!
गौरतलब है कि हर साल बहन जब अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती तो उसकी लंबी उम्र की कामना करती थी। उसे खुश रहने की दुआएं देती थी। लेकिन इस बार कई बहनों ने अपने भाइयों को जरा हटके कसम दिलवाई है। कसम ये कि भाई, इस कोरोना काल में ऐसी कोई भी लापरवाही न बरतें जिससें वे संक्रमित हों। आरती वाघेला गुजरात के नड़ियाल में रहती है। इस बार कोरोना के कारण वे मुंबई अपने भाई के घर रक्षा बंधन पर नहीं आ पार्इं। आरती ने बताया कि छोटी बहन ने भाई को राखी बांधी और मैंने वीडियो कॉल से सारी रस्में अदा की। आरती ने आगे बताया कि मेरा भाई हमेशा घर से बाहर दोस्तों के साथ घूमता है। ऐसे में इस बार मैंने भाई अरविंद को कसम दिलवाई कि वह अगर मुझे दिल से मानता है तो कोरोना काल में घर से बाहर बिना किसी कारण नहीं घूमेगा। जरूरत पड़ने पर वह घर से बाहर मास्क लगा कर ही जाएगा।
नालासोपारा निवासी मोनेश कांबले ने बताया कि उनकी बहन सोनू कांबले एक प्राइवेट लैब में टेक्नीशियन है। कोरोना काल में उसके लैब में कोरोना संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांच के लिए आ रहे हैं। उसने बताया कि राखी बांधते समय बहन को जो आशीर्वाद देना था, उसने दे दिया लेकिन उसे कसम दिलाई है कि काम के दौरान वह भी सावधानी बरते और सुरक्षित रहे। ताकि जांच के दौरान कहीं छोटी सी लापरवाही उसके और परिवार के लिए परेशानी न बन जाए।
चर्नी रोड निवासी संगीता भारद्वाज ने भी राखी बांधते समय भाई अनुज को कसम दिलाई। उन्होंने बताया कि मेरा भाई कोरोना को हल्के में ले रहा है। कहता है, कोरोना ऐसा कुछ भी नहीं है। जब भी घर से बाहर बाहर निकलता है तो केवल नाम के लिए हाथ में रुमाल लेकर घर से निकलता है लेकिन रक्षा बंधन के दिन मैंने भाई को मास्क गिफ्ट किया और कहा कि अब रोज रुमाल की जगह बहन का दिया हुआ मास्क ही लगा कर बाहर जाना है।
इसी तरह मुंबई सेंट्रल निवासी किरण जगताप ने भी भाई को राखी बांधते समय कसम दिलाई कि वह कोरोना के इस काल में बाहर रहने से ज्यादा घर में समय बिताए और परिवार का ख्याल रखे।
टैक्सीवालों को पुलिस का सपोर्ट
महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी को अभी भी केवल अत्यावश्यक सेवाओं तक ही सीमित रखा गया है। इसके कारण माना जा रहा था कि सामान्य लोगों को ऑटो-टैक्सी उपलब्ध नहीं हो पाएगी और पुलिसवाले भी लॉकडाउन का बहाना बनाकर उन्हें परेशान करेंगे। लेकिन कल रक्षाबंधन के दिन टैक्सीवालों को ट्रैफिक पुलिस का अच्छा सपोर्ट मिला। टैक्सी चालक राधे श्याम मौर्या ने बताया कि रक्षा बंधन के दिन कल कई भाड़े मिल रहे थे। डर-डर के भाड़ा ले रहे थे हम। डर था कहीं ट्रैफिक पुलिस फाइन न मार दे। लेकिन कल पुलिसवालों ने नहीं रोका, केवल मास्क पहनने की सलाह देकर टैक्सी जाने दी।
बेस्ट की बसें फुल
मुंबई में फिलहाल बेस्ट की बसों में ही आम नागरिकों को सफर करने की अनुमति है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा था कि बेस्ट की बसें ही कल दीदी के लिए सहूलियत साबित होंगी। हुआ भी ऐसा ही। कल बेस्ट की बसें फुल दिखी और कुछ रूट पर देरी के साथ ठीक से चल रही थीं। मुंबई में अभी रोजाना ३,००० के करीब बसें चल रही हैं, इनमें लगभग १० लाख यात्री सफर कर रहे हैं।