बजट होगा ‘हमसफर’!- मुंबई को मिल सकती है रफ्तार

आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में मोदी सरकार २.० का पहला बजट पेश करनेवाली हैं। पूरे देश को इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को भी इस बजट से खास उम्मीदें हैं। मुंबई वह महानगरी है जो सरकार को सबसे ज्यादा टैक्स देती है। इस शहर को विश्वस्तर का बनाने के लिए इन दिनों यहां पर कई विकास कार्य चल रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बजट में मुंबई के लिए जरूर कुछ खास पैकेज होगा, जिससे मुंबई को रफ्तार मिल सकती है। आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार का यह बजट युवा, किसान, नौकरी पेशा समेत देश के सभी लोगों को साथ लेकर चलनेवाला बजट होगा जिससे इसे ‘हमसफर’ बजट भी कहा जा सकता है।
मुंबई में इस समय तेज गति से मेट्रो का निर्माण कार्य जारी है। करीब २ लाख करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए उम्मीद है कि इस बजट के पिटारे में से कुछ न कुछ निकलेगा। इसके अलावा मुंबई में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए कई पुल व अन्य प्रोजेक्ट चल रहे हैं जिन्हें मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है। मुंबई की लाइफलाइन है लोकल ट्रेन। आज भी लोकल सेवा में बहुत सुधार की जरूरत है। इसके साथ ही कई रेलवे स्टेशन को अपग्रेड करना है। उम्मीद है कि इस बजट में इसके लिए पर्याप्त निधि की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा सेमी हाई स्पीड ट्रेन ‘वंदे भारत’ का आउटपुट काफी बेहतर रहा है और कुछ शहरों के लिए इसकी शुरुआत हो सकती है। इसी तरह २२ कोच की पूरी एसी ट्रेन ‘हमसफर’ की सेवाएं भी बढ़ाने की संभावना है। देश में पेयजल की समस्या काफी गंभीर होती जा रही है। माना जा रहा है कि इस बजट में पेयजल योजना के लिए भी सरकार निधि निर्धारित करेगी जिससे पेयजल योजनाओं में तेजी आएगी।
वाहन चालकों के आएंगे अच्छे दिन!
पेट्रोल-डीजल की महंगाई से परेशान कार चालकों के लिए अच्छी खबर है। उनके अच्छे दिन आनेवाले हैं। आनेवाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होंगी। मोदी सरकार २.० आज संसद में अपना पहला बजट पेश करने जा रही है। इसके पूर्व कल गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वे पेश किया गया था, जिससे आनेवाले समय की आर्थिक झलक मिली। इस आर्थि‍क संदेश में कहा गया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में कमी आ रही है, जिसकी वजह से इस वित्त वर्ष में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी आ सकती है।
बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज मोदी सरकार २.० का पहला बजट लोकसभा में पेश करनेवाली हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने चुनौतियां हैं कि वह आम आदमी की उम्मीदों पर खरा उतर सकें। आर्थिक सर्वे के अनुसार २०१९-२० में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट ७ फीसदी तक रह सकती है। इससे आगामी वित्त वर्ष के लिए नीतिगत पैâसलों के संकेत भी मिले हैं। आर्थि‍क सर्वे में कहा गया है कि वित्त वर्ष २०१८-१९ में वित्तीय घाटे में कमी आई है और यह जीडीपी के सिर्फ ३.४ फीसदी रहा, जबकि लक्ष्य ३.३ फीसदी तक लाने का था। आर्थिक सर्वे के अनुसार अगर हिंदुस्थान को २०२५ तक ५ ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना है तो लगातार जीडीपी में ८ फीसदी की ग्रोथ रफ्तार हासिल करनी होगी। आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति उपायों से लोन के ब्याज दरों में कटौती करने में मदद मिलेगी। इसी तरह निवेश दर में जो कमी आ रही थी, वह भी अब लगता है कि रुक जाएगी। जनवरी से मार्च तिमाही में जीडीपी ग्रोथ में गिरावट पर इस सर्वे में कहा गया है कि यह चुनाव संबंधी अनिश्चितता की वजह से था। इसके अलावा पिछले वित्त वर्ष में कम ग्रोथ होने की एक वजह एनबीएफसी संकट भी है। गौरतलब है कि मार्च तिमाही में जीडीपी में बढ़त महज ५.८ फीसदी थी।
आज बजट में रेलवे की ओर से कई नए रूटों पर नई ‘वंदे भारत’ एक्सप्रेस रेलगाड़ियां चलाने की घोषणा हो सकती है। गौरतलब है कि वर्तमान समय में देश में सिर्फ एक वंदे भारत एक्सप्रेस रेलगाड़ी दिल्ली से वाराणसी के बीच चलाई जा रही है।
इन रूटों पर चलेगी वंदे भारत एक्सप्रेस
रेल अधिकारियों के अनुसार १६ सेमी हाई स्पीड ट्रेन रेलवे चलाएगी जिनमें दिल्ली-लखनऊ, दिल्ली-भोपाल, दिल्ली-मुंबई, चेन्नई-बंगलुरु, दिल्ली-जम्मू आदि रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस रेलगाड़ियों को चलाने की योजना पर काम कर रही है। इन ट्रेनों की अधिकतम गति १३० किमी प्रति घंटा रहेगी। ट्रेन की अधिकतम रफ्तार १३० किमी/घंटा रहेगी, लेकिन ट्रेन-१८ औसत रफ्तार १०४ किलोमीटर होने के चलते सफर का समय तीन से चार घंटे स्वत: कम हो जाएगा। इसके अलावा हमसफर, अंत्योदय एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों को नए रूट पर चलाया जा सकता है।
बढ़ सकते हैं किराए
इस बार रेल किराए में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। आम बजट में एसी-१ व २ श्रेणी के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। लेकिन एसी-३, स्लीपर, जनरल श्रेणी में १५ से २० फीसदी तक बढ़ोत्तरी हो सकती है। इसके साथ ही रेल किराए विशेषकर पैसेंजर ट्रेनों व उपगनरीय सेवा की दरें बढ़ाने का फॉर्मूला सुझाया जा सकता है। रेल मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सरकार आम बजट में आधा दर्जन नए हाई स्पीड कॉरिडोर बनाने की घोषणा कर सकती है। इसमें नागपुर-रायपुर-बिलासपुर, दिल्ली-वाराणसी, दिल्ली-भोपाल, दिल्ली-चंडीगढ़, मैसूर-बंगलुरु-चेन्नई आदि नए कॉरिडोर बनाए जाएंगे।
वित्तीय घाटे की चुनौती
आर्थिक सर्वे में कुछ चुनौतियां भी हैं। इनमें वित्तीय घाटा प्रमुख है। इस मोर्चे पर २०१९-२० में कुछ चुनौतियां हो सकती हैं। सरकार ने अपने कार्यकाल में इसे गंभीरता से लिया था और बजट घाटे को कम करने के लिए प्रयास करती आई है। जिस तरह का प्रचंड बहुमत सरकार को देश की जनता ने दिया है, उसकी वजह से अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की कई चुनौतियां हैं।
सर्वे के अनुसार पिछले ५ साल में जीडीपी ग्रोथ औसतन ७.५ फीसदी रहा है। आर्थि‍क सर्वे में कहा गया है कि बैंकों के एनपीए में कमी आने की वजह से पूंजीगत व्यय चक्र को बढ़ाने में मदद मिलेगी। लगातार एनपीए में कमी आ रही है, जिसका फायदा अर्थव्यवस्था को मिलेगा। सर्वे में कहा गया कि स्थि‍र वृहद आर्थिक दशाओं की वजह से इस साल अर्थव्यवस्था में स्थिरता रहेगी। हालांकि यह भी कहा गया है कि अगर ग्रोथ में कमी आई तो राजस्व संग्रह पर चोट पड़ सकती है।
करदाताओं का होगा सम्मान
ईमानदार करदाताओं को राजनयिकों जैसा सम्मान या फिर उनके नाम पर किसी सड़क का नामकरण हो सकता है। आर्थिक सर्वे में देश के ईमानदार टैक्स चुकानेवालों को सम्मानित करने के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं। देश में अधिक से अधिक लोगों को टैक्स चुकाने की आदत को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कुछ कदम उठाने की सिफारिश आर्थिक सर्वे में किया गया है। आर्थिक सर्वे में दिए सुझाव के अनुसार, ‘आम तौर पर यह देखा गया है कि नागरिक अपने सोशल स्टेट्स को दिखाने के लिए बहुत महंगी चीजों की खरीदारी करते हैं। इसे ही देखते हुए हर शहर के १० सबसे अधिक कर चुकानेवालों को सम्मानित किया जा सकता है।’
इन्हें एयरपोर्ट पर बोर्डिंग के दौरान कुछ खास सुविधाएं दी जा सकती हैं। सड़कों पर फर्स्ट लेन में चलने की सुविधा या रोड और टोल बूथ पर ऐसी कुछ विशेष छूट और इतना ही नहीं राजनयिकों की तरह इमिग्रेशन काउंटर पर विशेष लाइन में खड़े होने की छूट जैसे सुझाव दिए गए हैं। एक दशक में सर्वाधिक टैक्स देनेवाले करदाता के नाम पर किसी महत्वपूर्ण बिल्डिंग, स्मारक, सड़क, ट्रेन अस्पताल, यूनिवर्सिटी या एयरपोर्ट का नामकरण किया जा सकता है। इसी तरह से ईमानदार और बड़ी मात्रा में टैक्स चुकानेवालों के लिए खास क्लब बनाने का सुझाव भी दिया गया है। आर्थिक सर्वे में सुझाव दिया गया है कि इस तरह के क्लब की सदस्यता कुछ खास लोगों को ही दी जाएगी। बता दें कि पूर्व में भी ऐसी खबर आई थी कि सरकार ईमानदारी से कर चुकानेवालों को सम्मानित करने के लिए कुछ खास कदम उठा सकती है।
बढ़ेगी रिटायरमेंट की उम्र
देश में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ सकती है। इसे बढ़ाकर ७० साल किया जा सकता है। सरकार यदि मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन और उनकी टीम की सलाह पर आगे बढ़ती है तो यह संभव है। आर्थिक सर्वे में ऐसा प्रस्ताव रखा गया है। इसके समर्थन में जर्मनी, अमेरिका, इंग्लैंड, चीन, जापान सहित कई देशों का उदाहरण भी दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंदुस्थान में महिला और पुरुषों की जीवन प्रत्याशा (लाइफ एक्सपेंटेंसी) लगातार बढ़ रही है। अन्य देशों के अनुभवों के आधार पर पुरुषों और महिलाओं की रिटायरमेंट उम्र में बढ़ोतरी पर विचार किया जा सकता है। यह पेंशन सिस्टम में व्यावहारिकता बढ़ाने की कुंजी है और यह महिला श्रम बल के पुराने आयु समूह में पेंशन की भागीदारी को बढ़ाएगा। रिटायरमेंट उम्र में वृद्धि अनिवार्य है, इसलिए इस परिवर्तन का अडवांस में संकेत देना आवश्यक है। इससे पेंशन और अन्य रिटायरमेंट प्रावधानों की अग्रिम योजना में मदद मिलेगी।
सरकार का हाथ तंग
आर्थिक मामलों के जानकारों के अनुसार अपर्याप्त कर राजस्व, पहले से निर्धारित व्यय, और बड़े राजकोषीय घाटे के विकल्प में अंतर्निहित जोखिमों के कारण सरकार के हाथ तंग हैं। इसलिए नई योजनाओं को कम धन के सहारे शुरू करने का कदम व्यावहारिक है। २०१४ से २०१९ तक साधारण निवेश से नई योजनाएं आरंभ करने, राजकोषीय सुदृढ़ता बरकरार रखने, और सफल योजनाओं के लिए आवंटन बढ़ाने के इसी द्विस्तरीय तरीके को अमल में लाया गया है। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो पिछले वित्त मंत्री अरुण जेटली के सभी बजटों में राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के प्रयास किए गए थे। यूपीए काल में केंद्र सरकार की योजनाओं की संख्या कम कर दी गई थीं, और बड़े बजटीय आवंटन के साथ विशाल व्यय वाली कुछेक योजनाओं को लागू किया गया था। भोजन, रोजगार, शिक्षा आदि के कानूनी अधिकार से संबद्ध योजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, लेकिन भारी मात्रा में अपव्यय के कारण इन योजनाओं का प्रभाव सीमित रहा और इनको लेकर भारी असंतोष की स्थिति रही।