कर्म प्रत्यक्ष, निष्काम भाव

संसार धर्म क्षेत्र है। यह कथन शास्त्रीय है। संसार कर्मक्षेत्र है। पुरुषार्थ जरूरी है। यह निष्कर्ष वैदिक है। संसार आनंद

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