" /> शिलालेख

स्वयं द्वारा स्वयं को पढ़ना आवश्यक!

विश्व की सभी सभ्यताओं में पुस्तकों का आदर किया जाता है। पुस्तकों में वर्णित जानकारियां लेखक के कौशल से सार्वजनिक

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पिता : वसु, पितामह : रुद्र, प्रपितामह : आदित्य, श्रद्धा की ही अभिव्यक्ति है श्राद्ध

भारत में पूर्वजों पितरों के प्रति श्रद्धा की स्थायी भावना है। वरिष्ठों, पूर्वजों के प्रति हम भारतवासी प्रतिपल श्रद्धालु रहते

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प्रतीक्षा प्रत्येक जीव की भावभूमि है!

अस्तित्व विराट है। इसकी अपनी गतिविधि है। अस्तित्व के अंश भी इसी के भीतर अपने-अपने प्रेम से सक्रिय हैं। अस्तित्व

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इतिहास का केंद्रीय तत्व संस्कृति है!

इतिहास मार्गदर्शक होता है और संस्कृति प्रेरक। इतिहास की गलतियां सबक सिखाती हैं। संस्कृति के प्रेरक तत्व उत्सव बनते हैं।

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वेद जीवन अनुभूति की कविता है!

आधुनिक विश्व में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की महत्ता है। सही भी है। दर्शन और विज्ञान अंधविश्वासों से मुक्त करते हैं। वैज्ञानिक

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गांव रिश्तों में डूबे हुए प्रायद्वीप हैं!

तमाम अभावों के बावजूद ग्राम निवासियों के मन में गांवों का आकर्षण है। कोरोना महामारी के प्रकोप के समय महानगरों

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