ब्रह्म प्राप्ति का आनंद सर्वोत्तम

ज्ञान अतृप्ति का अपना आनंद है। उपनिषद् साहित्य में इसीलिए प्रश्न और प्रतिप्रश्न हैं। प्रश्नों की इसी परंपरा के कारण

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लोककल्याण के लिए प्रशांत मन अनिवार्य

प्रकृति सुसंगत व्यवस्था है। यह अपनी अव्यवस्था को भी अल्पकाल में पुनव्र्यवस्थित करती है। प्रकृति की गति की एक लय

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