देवता को विधिक मान्यता देनेवाला निर्णय

हिंदुस्थान का मन प्रसन्न है। सारी दुनिया के राम आस्थालु उत्सव में हैं। सर्वोच्च न्यायपीठ ने अयोध्या विवाद पर ऐतिहासिक

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जैव विविधता ही प्रकृति का प्रसाद है!

प्रकृति का प्रत्येक अंग परस्परावलंबन में है। कुत्तों और मनुष्य जाति का साहचर्य भी बहुत प्राचीन है। इसका ठीक इतिहास

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अंतिम प्रश्न अनीति का खात्मा है!

गांधी विश्व इतिहास की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति है। वे गृहस्थ थे। महात्मा थे। वेदांती थे। राजनैतिक कार्यकर्ता थे। आंदोलनकारी थे। पत्रकार

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प्रकृति का हर अणु-परमाणु मां का ही विस्तार है

हम अस्तित्व का भाग हैं। अस्तित्व जननी है। अस्तित्व को मां देखते हुए स्वयं को विराट से जोड़ने का अनुष्ठान

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उषा काल है वैदिक समाज का जागरण काल

ऋग्वेद में सविता महत्वपूर्ण देव हैं। गायत्री नाम से विश्व चर्चित मंत्र में सविता की ही स्तुति है- तत्सविर्तुरेण्यं भर्गो

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ऋग्वेद के इंद्र में लोककल्याण के तत्व

ऋग्वेद के अधिकांश देवता प्रकृति की शक्ति हैं। सूर्य, पृथ्वी, जल, वायु, मरूत, नदी आदि देव प्रकृति में प्रत्यक्ष हैं

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