आस्था का पर्वत दुनिया का वैभव

‘अज्ञान तिमिरांधश्च ज्ञानांजन शलाकया, चक्षुन्मीलितम तस्मै श्री गुरुवै नम:’ गुरु तथा देवता में समानता के लिए एक श्लोक में कहा

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पावागढ़ की महाकाली-यहां आज भी होते हैं प्रत्यक्ष दर्शन

पावागढ़ कभी गुर्जरों की राजधानी हुआ करती थी। वह चंपानेर के नाम से प्रसिद्ध थी। चंपानेर उजड़ने के बाद गुर्जरों

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जून २०१८, शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष १९४०, विक्रम संवत २०७५

सोमवार, १८ जून – ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि दिन में १:३४ तक, महादेवविवाह (उड़ीसा), श्रुतपंचमी (जैन)। मंगलवार,१९

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