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घाटों में तैनात हुए मरे के संरक्षा सैनिक

हिल गैंग की 10 टुकड़ियों ने संभाला पहाड़ी इलाको में मोर्चा

भारत और चीन के बीच सीमा पर इन दिनों तनाव चल रहा है। इस तनाव के बीच सुरक्षा में सैनिक तैनात हैं, जो रात-दिन सरहद की सुरक्षा में दुश्मनों से लोहा लेने के लिए तैयार हैं। इसी तरह इन दिनों मॉनसून को देखते हुए मध्य रेलवे ने “भोर घाट” और “थल घाट” पर भी विशेष रूप से सैनिक तैनात कर दिए हैं। ये सैनिक विशेषकर कमजोर चट्टानों को चटकाने के लिए पहाड़ी घाटों में तैनात हैं, ताकि मॉनसून के दौरान गुजरनेवाली रेल का सुरक्षित परिचालन किया जा सके।
जानकारी के अनुसार भोर घाट की हिल गैंग (कर्जत और खंडाला के बीच) और थल घाट (कसारा और इगतपुरी के बीच) अपने रॉक क्लाइम्बिंग और माउंटेन रैपलिंग के माध्यम से रेलवे की सुरक्षा करते हैं। ये संरक्षा सैनिक पुणे और भारत के दक्षिणी हिस्सों और नासिक और भारत के उत्तरी भागों की ओर ट्रेनों के लिए एक सुगम और सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए पूरे साल काम करते हैं। पहाड़ की कटाई में अपनी विशेषता के माध्यम से इन हिल गैंग के सदस्यों द्वारा पटरियों पर गिरने की संभावनावाले ढीले और खतरनाक बोल्डर को हटाते हैं, मॉनसून के दौरान भूस्खलन की वजह से कीचड़ को साफ करना, किसी भी असामान्य संभावना को रोकने के लिए भूजल निकासी आदि कार्य करती है।
650 बोल्डरों की हुई पहचान
हिल गैंग के सदस्य पटरियों के साथ ऊंची और खड़ी पहाड़ियों पर चढ़ते हैं और रैलिंग के माध्यम से ढीले और कमजोर बोल्डर की पहचान करते हैं और इसे हर साल जनवरी से मार्च के महीने में लाल पेंट से चिह्नित करते हैं। फिर अप्रैल और मई के महीने में वे प्रत्येक दिन 4 से 5 घंटे का ब्लॉक लेकर चिह्नित ढीले और कमजोर बोल्डर को हटा देते हैं। इन बोल्डरों को विशेष रूप से साफ किया जाता है। इस वर्ष अकेले भोर घाट और थल घाट दोनों घाटों  में 650 से अधिक ढीले बोल्डर की पहचान की गई और इनको भोर घाट में ड्रॉप कर दिया और 60 दिनों के लिए 4-5 घंटे का  ब्लॉक लेकर 3-वैगन में बोल्डर को साफ कर दिया गया।
घाट पर तैनात 10 हिल गैंग
यह महत्वपूर्ण और चुनौती पूर्ण कार्य भोर घाट और थल घाट में 10 हिल गैंग के सदस्यों द्वारा पूरा किया गया है। इस कार्य को पूरा करने के लिए प्रदान किए गए सुरक्षा गियर और उपकरण सुरक्षा हेलमेट, सुरक्षा जूते, सुरक्षा बेल्ट (दोहन), दूरबीन, 100 मीटर रस्सी, हाथ के दस्ताने, सुरक्षा जैकेट, कटवानी, पहर, फोंक, लाल पेंट, ब्रश, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स आदि शामिल हैं। 5 किग्रा वजन का हथौड़ा विभिन्न आकार, कौवा बार, सीटी थंडर, छेनी, विभिन्न आकारों में कुल्हाड़ी, तार पंजा, हाथ संकेत झंडा लाल / हरा, फावड़ा, जाम बावटा और गमेला। मॉनसून के दौरान और उसके बाद हिल गैंग के सदस्य बिखरे हुए ढीले बोल्डर के लिए स्कैन करने और आवश्यकता के अनुसार छोड़ने का काम करते हैं, चोक-अप कैच वाटर ड्रेन और पुलिया, लीन ट्री कटिंग और ब्रिज की सफाई को साफ करते हैं।
घाट से गुजरना रेलवे की चुनौती
महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट की प्रमुख पहाड़ी श्रृंखला सह्याद्रि श्रेणी है, इस सीमा में कई मार्ग या ’घाट’ हैं, जिनमें से भोर घाट और थल घाट उल्लेखनीय हैं। इन घाटों से होकर मुंबई से रेल लाइन क्रमशः पुणे और नासिक तक पहुंचती है। इन घाटों से गुजरना रोडवेज और रेलवे दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इन घाटों के माध्यम से खड़ी ढालवाली रेल लाइन मध्य रेल के लिए एक अनोखी चुनौती पेश करती है। इसके अलावा भारी बारिश के दौरान खड़ी ढलानों का कटाव होता है, जिससे भारी बोल्डरों को लुढ़कने का खतरा रहता है और छोटे-छोटे बोल्डर ढीले हो जाते हैं। हिल गैंग द्वारा छेनी और हथौड़ों की मदद से बड़े बोल्डरों को टुकड़ों में काट दिया जाता है और साफ कर दिया जाता है जबकि गाड़ियों की सुरक्षित चलने को सुनिश्चित करने के लिए छोटे बोल्डर गिरा दिए जाते हैं।