" /> गलवान को नहीं छोड़ना चाहता है चीन, २०१३ में भी १९ किमी सीमा के अंदर घुस आया था

गलवान को नहीं छोड़ना चाहता है चीन, २०१३ में भी १९ किमी सीमा के अंदर घुस आया था

लद्दाख की गलवान घाटी पर काफी पहले से चीन की नजरें लगी हुई हैं। वह किसी भी तरह उस पर कब्जा करना चाहता है। इसके लिए वह पिछले कई वर्षों से प्रयास कर रहा है। २०१३ में भी उसने ऐसा प्रयास किया था और १९ किलोमीटर अंदर घुस आया था। फिर बातचीत और समझाने-बुझाने के बाद वह वापस गया था। पिछले दो महीने से एक बार फिर वह गलवान पर कब्जा करने के सपने देख रहा है। हमने ‘दोपहर का सामना’ के गत २९ मई के अंक में ‘गलवान बनेगा दूसरा कारगिल’ शीर्षक से इसकी खबर भी दी थी और सोमवार रात की घटना के बाद से अब चीन के इरादे खुलकर सामने आ गए हैं। लद्दाख की गलवान घाटी पर चीन किसी भी तरह कब्जा करना चाहता है। यह कुछ वैसा ही है जैसा पाकिस्तान ने कारगिल पर किया था।

इस बार भी ठंड के मौसम में जब भारतीय सैनिक वहां से नीचे आ गए थे, ड्रैगन ने वहां कब्जा करने का प्लान बना लिया था। मार्च में जब कोरोना वायरस के प्रसार के कारण भारत की एक बटालियन क्वारंटाइन कर दी गई थी तब भारतीय सेना को गलवान घाटी पर पहुंचने में थोड़ा वक्त लगा। चीनी सैनिकों ने इसका पूरा फायदा उठाया और एलएसी के पास अपना तंबू गाड़ दिया था। जब भारतीय सैनिक वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि गलवान घाटी के पास पैंगोंग झील के पास चीनी सैनिकों की बटालियन पहुंच गई है। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प शुरू हुई लेकिन चीन पीछे हटने को तैयार नहीं था। उसका कहना है कि गलवान घाटी उसकी है। इसके बाद जब मामला बढ़ा तो दोनों पक्षों के बीच कमांडर स्तर की बातचीत शुरू हुई। इसके बाद चीन ५ किलोमीटर पीछे अपने पोस्ट पर चला गया था, लेकिन उसके सैनिक बार-बार इस बातचीत के महौल का उल्लंघन करते और एलएसी पर आ जाते हैं। यही नहीं, उन्होंने गलवान घाटी के पास दो पहाड़ियों पर भी कब्जा कर रखा है। वहां उन्होंने आर्टिलरी भी लगा दी है। उनकी नजर भारतीय क्षेत्र में बननेवाली सड़क पर है। वे जब चाहें, पहाड़ी पर से गोले दागकर भारतीय सड़क को उड़ा सकते हैं या वहां का यातायात बाधित कर सकते हैं। यह ठीक वैसे ही है जैसे पाकिस्तान ने कारगिल की पहाड़ियों पर कब्जा करके भारतीय क्षेत्र के यातायात को बाधित किया था।