" /> अब दुनिया के चिथड़े उड़ाना चाहता है चीन : दिए न्यूक्लियर वारहेड बढ़ाने के संकेत

अब दुनिया के चिथड़े उड़ाना चाहता है चीन : दिए न्यूक्लियर वारहेड बढ़ाने के संकेत

*परमाणु हथियार बढ़ाकर 1,000 करना
*मिसाइल डीएफ-41की संख्या भी बढ़ानी है
*15 हजार किलोमीटर है मारक क्षमाता
*ग्लोबल टाइम्स’ दे रहा है गाइडलाइन

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का संकट फैलाने के बाद चीन अब दुनिया के चिथड़े उड़ाना चाहता है। अब वह परमाणु बम की धमकी भी दे रहा है। चीनी सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने एक चीनी मिलिट्री एक्सपर्ट के हवाले से लिखा है कि ‘यह संभव है कि चीन और अमेरिका के बीच एक क्षेत्रीय झड़प हो जाए और तब चीन पर अमेरिका एक परमाणु बम गिरा दे। तब चीन के पास इसका जवाब देने के लिए पर्याप्त क्षमता होनी चाहिए।’ एक तरह से यह मिलिट्री एक्सपर्ट यह बताने की कोशिश कर रहा है कि चीन के लिए परमाणु हथियार कितने जरूरी हैं। इसके पहले ‘ग्लोबल टाइम्स’ के एडिटर इन चीफ हू जिनिन ने लिखा कि चीन को अमेरिकी चुनौती का सामना करने के लिए अपने न्यूक्लियर वॉरहेड की संख्या बढ़ाकर 1000 कर देनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि चीन के आधुनिक मिसाइल डीएफ-41 की संख्या भी बढ़ाकर 100 कर देनी चाहिए। यह मिसाइल हाल ही में चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में शामिल किया गया है। इसकी मारक क्षमता 12 से 15 हजार किलोमीटर की है। इस मिसाइल के जरिए चीन सीधे अमेरिका पर हमला कर सकता है।
चीन के यह तेवर बताते हैं कि वह अमेरिका के किसी संभावित हमले का सामना करने की तैयारी कर रहा है। दूसरे शब्दों में वह अमेरिका को चेतावनी भी दे रहा है कि वह उसके ऊपर कोई सैन्य कार्रवाई करने की जुर्रत न करे। बता दें कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और वहां की सरकार का अखबार है ,’पीपुल्स डेली’ और इसी अखबार का इंटरनेशनल एडिशन है ‘ग्लोबल टाइम्स’। बहरहाल, इस मामले पर जब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनइंग से पूछा गया तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। उनका कहना था कि इस बारे में आप सीधे जिनिन से ही पूछिए। इस मामले में अमेरिकी इंटरनेशनल एसेसमेंट एंड स्ट्रेटजी सेंटर के सीनियर फेलो रिक फिशर कहते हैं कि ऐसी बातें चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी के इंटेंशन को दर्शाती हैं। दुनिया में परमाणु हथियारों की खैर खबर रखनेवाली स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट का मानना है कि चीन के पास 290 न्यूक्लियर वारहेड हैं पर यूएस डिफेंस सेक्रेट्री के चाइना डेस्क के पूर्व प्रमुख जोसेफ बॉस्को का मानना है कि चीन मूर्ख बना रहा है और उसने पहले से ही 1000 वॉरहेड जुटा रखे हैं। बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कुछ साल से परमाणु हथियार कम करने पर जोर दे रहे हैं। हाल ही में ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फोन करके इस बारे में बात भी की थी और उन्हें कहा था कि चीन को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए पर चीन ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए नकार दिया था कि उसके परमाणु हथियार हमले के लिए नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए हैं।
परमाणु हथियारों की धौंस
चीन पहले भी अमेरिका को अपने परमाणु हथियारों की धौंस दिखाता रहा है।इंस्टिट्यूट फॉर चाइना नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के डीन और चीनी पीएलए के मेजर जनरल जो चेंगू ने कुछ साल पहले अमरीकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल को एक इंटरव्यू में कहा था कि अमेरिका अपने मिसाइल और गाइडेड वेपन को अगर चाइना की ओर टारगेट करता है तो फिर चाइना को भी अपने परमाणु हथियारों से अमेरिका को जवाब देना होगा। चाइनीज आर्मी का अमेरिका के प्रति यह नजरिया दर्शाता है कि उसने अमेरिका के लिए ही परमाणु बम बना रखे हैं।
चीन सागर में टेंशन
दक्षिण चीन सागर में इस समय टेंशन बढ़ रहा है। इंडोनेशिया, ताइवान, और जापान ने आरोप लगाया है कि चीन ने वहां जबरन 25 छोटे टापुओं पर कब्जा कर लिया है। यही नहीं कुछ टापू के आसपास मिट्टी भरकर वह वहां सैन्य बेस भी बनाने की कोशिश कर रहा है। चीन पूरे दक्षिण चीन सागर में अपना कब्जा दर्शाना चाहता है जबकि क्षेत्र में अन्य देशों के परिवहन पोत बड़ी संख्या में आते जाते रहते हैं। चीन सागर के मुहाने पर एक अमेरिकी युद्धपोत भी खड़ा है जो चीन को नागवार गुजर रहा है। चीन का कहना है कि इस क्षेत्र में अमेरिका अपनी सैन्य गतिविधियां ना दिखाए।
सिक्किम में झड़प
सिक्किम सीमा पर काफी समय बाद एक बार फिर से भारत और चीन के सैनिकों के बीच कल झड़प हो गई। भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आ गए और उनके बीच टकराव हुआ। इस झड़प में दोनों ओर से पत्थरबाजी हुई जिसमें कुछ सैनिक घायल हो गए। इस इलाके में चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच लंबे समय बाद यह टकराव देखने को मिला है। दोनों ओर से भारी बहसबाजी हुई। इतना ही नहीं, इस टकराव में दोनों तरफ के सैनिकों को हल्की चोटें भी आई हैं। हालांकि, इस टकराव को स्थानीय स्तर के हस्तक्षेप और बातचीत के बाद सुलझा लिया गयाl सेना के सूत्रों ने बताया कि सीमा विवाद के चलते भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच यह टकराव हुआ है। जब कभी ऐसा कोई विवाद होता है तो तय प्रोटोकॉल के मुताबिक दोनों सेनाएं इसे सुलझा लेती हैं। सीमा से लगने वाले सिक्किम सेक्टर के नाकू ला के पास यह घटना हुई है। 2017 में भी दोनों देशों के सैनिकों के बीच 73 दिनों तक डोकलाम विवाद पर गतिरोध चला था। 2017 में 16 जून से तब गतिरोध शुरू हुआ था जब भारतीय सैनिकों ने भारत के ‘चिकन नेक कॉरिडोर’ के पास चीनी सैनिकों को एक सड़क का निर्माण करने से रोक दिया था।