" /> बैंकवालों ने छीनी ट्रांसपोर्टरों की नींद, चैन

बैंकवालों ने छीनी ट्रांसपोर्टरों की नींद, चैन

◼️ सरकारी पाबंदी के बावजूद गाड़ियों के ईएमआई के लिए कर रहे परेशान
◼️ लॉकडाउन के कारण रोजगार बंद होने से परेशान है ट्रांसपोर्टर, भुखमरी की नौबत
◼️ बैंकवाले जान-बूझकर खाते से चेक बाउंस कराकर बढ़ा रहे हैं अपना चार्ज

भिवंडी के ट्रांसपोर्टरों का बैंकवालों ने नींद और चैन छीन ली है। लॉकडाउन के कारण तकरीबन तीन माह से काम-धंधा बंद होने के कारण सरकार द्वारा तीन माह का ईएमआई न लेने के सख्त आदेश के बावजूद बैंक के लोग इसके लिए ट्रांसपोर्टरों को परेशान कर रहे हैं। आलम यह है कि बैंकवाले एक एक सप्ताह में गाड़ी के हफ्ते के लिए तीन-तीन बार बैंक से चेक बाउंस करा रहे हैं। जब ट्रांसपोर्टर इसका विरोध कर रहे है तो बैंककर्मी उन्हें गाड़ी उठा लेने की धमकी भी दे रहे हैं, जिसे लेकर ट्रांसपोर्टरों में हड़कंप मचा हुआ है।
मालूम हो कि कोरोना के मद्देनजर तकरीबन तीन माह से लॉकडाउन है, जिसके कारण सारे व्यवसाय बंद होने के साथ ट्रांसपोर्ट व्यवसाय भी पूरी तरह से ठप हो गया है। ट्रांसपोर्टर पूरी तरह से परेशान हैं। काम-धंधे के अभाव में उनके सामने भुखमरी की नौबत है। हालांकि राज्य सरकार ने समय की नजाकत को देखते हुए सभी बैंकों को तीन महीने के लिए गाड़ियों का ईएमआई न लेने का निर्देश दिया है। बावजूद बैंक के लोग गाड़ियों का ईएमआई भरने के लिए ट्रांसपोर्टरों व मोटर मालिकों को परेशान कर रहे हैं। गाड़ी का हप्ता न भरने पर गाड़ी उठाने की धमकी दे रहे हैं। इतना ही नहीं बैंक के लोग जिसके खाते में पैसा है उसका पैसा तो काट ही ले रहे है लेकिन जिसके बैंक खाते में पैसा नहीं है। उनके खाते में लगातार चेक बाउंस कराकर लगातार बाउंस चार्ज व ब्याज बढ़ा रहे हैं। सत्यम एक्सप्रेस कार्गो के मालिक रामजी त्रिपाठी बताते है कि उनके पास चार गाड़ी हैं। पिछले तीन माह से सभी काम बंद होने के कारण गाड़ियों के चालक व क्लीनर सब चले गए हैं। काम के अभाव में उनका भी बुरा हाल हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस पर बैंकवाले गाड़ी का हप्ता भरने के लिए हैरान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी गाड़ी पर एचडीबी फाइनेंस का लोन है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन लगने के बाद से ही फाइनेंसवाले कॉल कर उन्हें पैसा भरने के लिए न सिर्फ परेशान कर रहे हैं बल्कि पैसा न भरने पर गाड़ी उठाने की धमकी भी दे रहे हैं। रामजी त्रिपाठी ने बताया कि हालांकि छूट देने के लिए वे फाइनेंस कंपनी को मेल भी भेज रहे हैं लेकिन कंपनी मेल न एक्सेप्ट कर लगातार बैंक से ईसीएस बाउंस कराकर चार्ज बढ़ा रहे हैं। छूट की बात को भी बैंक के लोग सिरे से नकार रहे हैं। बैंककर्मियों का कहना है कि पैसा लिए हो तो  भरना ही पड़ेगा। सरकार से इससे क्या लेना-देना है। यही कहना अन्य ट्रांसपोर्टरों का भी है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि बैंक के लोग गाड़ी का हप्ता भरने के लिए इतना फोन व मैसेज भेज रहे हैं कि उनकी नींद व चैन उड़ गया है। वे लोग पूरे दहशत में हैं पैसा कहां से लाएं और कैसे भरें, उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा है? बता दें कि भिवंडी में तकरीबन 20 हजार ट्रांसपोर्ट हैं। सभी बैंक के इस रवैए से परेशान हैं। ट्रांसपोर्टरों ने संयुक्त रूप से सरकार से इस मामले में दखलंदाजी कर बैंक की मनमानी पर अंकुश लगाने व जब तक पुनः काम शुरू नहीं हो जाता, गाड़ी के हप्ते पर रियायत देने की मांग की है।