कंप्यूटर डाल भेजे में…! चिप करेगा मगज में घुसपैठ

कंप्यूटर आज इंसान की जिंदगी में इतना ज्यादा घुल-मिल गया है कि इसके बिना जीवन अधूरा सा लगता है। छोटी सी माइक्रो चिप ने २० वीं सदी का स्वरूप ही बदल दिया है। कंप्यूटर का यह चिप जल्द ही आपके मगज में घुसपैठ कर सकता है। ऐसे में जल्द ही ‘कंप्यूटर डाल भेजे में…’ गीत गुनगुनाना पड़ सकता है। और इस काम को करने का बीड़ा उठाया है चर्चित अमेरिकी कंपनी ‘टेस्ला’ के एलन मस्क ने। एलन मस्क की कंपनी ‘न्यूरोलिंक’ इस दिशा में काम कर रही है। एलन मस्क ऐसे शख्स हैं जो आए दिन खबरों में रहते हैं। ये ‘टेस्ला’ और ‘स्पेस-एक्स’ कंपनी के सीईओ हैं। सबकुछ ठीक रहा तो आनेवाले दिनों में इंसान के ‘मगज’ में ‘टेस्ला’ माइक्रो चिप फिट करेगी।
कंप्यूटर को कंट्रोल करेगा ‘ब्रेन चिप’!
स्पेस मिशन पर काम करनेवाले ‘टेस्ला’ और ‘स्पेस एक्स’ कंपनी के सीईओ एलन मस्क अब इंसान के ब्रेन में माइक्रो चिप फिट करने की योजना बना रहे हैं। यह ब्रेन चिप आपके कंप्यूटर को कंट्रोल करेगा। सैटेलाइट को स्पेस में भेजने के लिए फिर से इस्तेमाल करनेवाले रॉकेट इन्हीं की कंपनी ने बनाए हैं और नासा भी इनकी मदद समय-समय पर लेती है। मस्क मंगल मिशन पर भी काम कर रहे हैं और अगले साल शायद किसी शख्स को मंगल पर भेज सकते हैं।
एलन मस्क अब इंसानी दिमाग को कंप्यूटर के साथ लिंक करने पर काम कर रहे हैं। हालांकि ये सुनने में जितना आसान लग रहा है, वो है नहीं। ब्लूटूथ वाले सेंसर को इंसान के दिमाग में प्रत्यारोपित करना इतना आसान नहीं! मस्क ने कहा है कि ‘न्यूरोलिंक डिवाइस’ में एक काफी छोटी चिप लगी होगी, जिससे १००० तार जुड़े होंगे। ये तार इंसान के बाल से १० गुना पतले होंगे। इस चिप में यूएसबी टाइप-सी पोर्ट होगा। यूएसबी की जानकारी तो आपको होगी ही जो आज कल नए जेनेरेशन के स्मार्टफोन्स में दिए जाते हैं। एलन मस्क का कहना है कि इस चिप को ब्लूटूथ के जरिए एक छोटे कंप्यूटर से जोड़ा जाएगा और जो कान में पहना जा सकेगा, इसे स्मार्टफोन से भी कनेक्ट किया जा सकता है।
एक सेशन के दौरान मस्क ने कहा कि इस चिप को एक बंदर पर ट्राई किया गया और वो बंदर अपने दिमाग से उस कंप्यूटर को कंट्रोल कर पा रहा था। एलन मस्क ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि अगले साल तक इस चिप का ह्यूमन पेटेंट हमारे पास होगा।’
न्यूरोलिंक के मुताबिक किसी के दिमाग में १० चिप लगाई जा सकती हैं। खास बात ये है कि इन चिप्स को आईफोन ऐप से कनेक्ट करके कोई भी कंट्रोल कर सकता है। ये डिवाइस किसी यूजर के ब्रेन में रोबोट के जरिए इंस्टॉल किए जाएंगे जिसे सर्जन ऑपरेट करेंगे। यानी किसी शख्स की खोपड़ी में २ मिमी का छेद करके इस चिप को फिट किया जाएगा। मस्क का कहना है कि इसका ट्रायल २०२० के आखिर तक शुरू हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा है कि चिप के साथ कम्युनिकेशन पूरी तरह वायरलेस होगा, क्योंकि आपको बार-बार अपने सिर में वायर नहीं लगाना होगा।
क्या है न्यूरोलिंक?
न्यूरोलिंक एलन मस्क का एक स्टार्टअप है। ये न्यूरोटेक्नोलॉजी बेस्ड फर्म है और जिसके तहत दिमाग में लगानेवाली मशीन पर काम किया जा रहा है। इसे ब्रेन मशीन इंटरफेस ‘बीएमआई’ भी कहा जाता है। इस कंपनी में लगभग १०० कर्मचारी काम करते हैं। इसी स्टार्टअप के तहत एलन मस्क नई टेक्नोलॉजी लेकर आए हैं जो फिलहाल सुर्खियां बटोर रही है।
क्या होगा इसका फायदा?
गौरतलब है कि इस टेक्नोलॉजी पर गूगल और फेसबुक भी काम कर रहे हैं। इस टेक्नोलॉजी को ट्रीटमेंट के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। एलन मस्क ने इस टेक्नोलॉजी के बारे में यह भी कहा है वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इंसानी ब्रेन के साथ मर्ज करना चाहते हैं।
क्या आपने कभी ये सोचा था कि इंसान के दिमाग में कंप्यूटर कनेक्शन जोड़ा जाएगा? अगर नहीं, तो अब सोचिए, क्योंकि यह जल्द ही हो सकता है। दुनिया की सबसे मशहूर कंपनियों में से एक टेस्ला के चीफ एग्जिक्युटिव और स्पेर्स ें के संस्थापक एलन मस्क एक नई योजना की घोषणा की है। इस योजना के मुताबिक, इंसानों के दिमाग में कंप्यूटर चिप को इंस्टॉल किया जाएगा। यह उस समय ज्यादा मददगार साबित होगा जब कोई व्यक्त किसी मानसिक बिमारी से जूझ रहा होगा। इससे लोगों की मदद की जा सकेगी। इस चिप का इस्तेमाल इंसानों में सुपरह्यूमन इंटेलिजेंस को इनेबल करने के लिए किया जाएगा।
मानसिक बिमारी को ठीक करने में मिलेगी मदद: एलन मस्क ने दो वर्ष पहले न्यूरालिंक नाम की एक सिक्रेटिव कंपनी लॉन्च की थी। अब कंपनी ने ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक की टेस्टिंग शुरू कर दी है। एलन का कहना है कि यह डिवाइस उन लकवाग्रस्त लोगों के लिए मददागर साबित होगी जो न्यूरोलॉजिकल विकार से ग्रस्त हैं। कंपनी का मानना है कि इस तकनीक के जरिए हर तरह के मानसिक विकारों को ठीक कर पाना संभव होगा।
दिमाग में इंस्टॉल होगी चिप: इस चिप को कंपनी ने चूहों और बंदरों पर टेस्ट किया था। जैसे ही यह टेस्टिंग पूरी हो जाती है तो उसे लॉन्च किए जाने के बारे में सोचा जाएगा। आपको बता दें कि यह चिप र्४े४स्स् की होगी। यह कई हजारों माइक्रोस्कोपिक थ्रेड से कनेक्टेड होगी। अब लोगों का सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि इसे इंसानी दिमाग कैसे इंस्टॉल किया जाएगा। इस जवाब हम दे देते हैं। इस चिप को इंसानों के दिमाग में ड्रिल करके ४ छेदों के जरिए इम्प्लांट किया जाएगा। इन थ्रेड्स के इलेक्ट्रॉड्स न्यूरल स्पाइक्स को मॉनिटर करने में सक्षम होंगे।
जानें इन इलेक्ट्रॉड्स के बारे में: ये इलेक्ट्रॉड्स ना सिर्फ इंसानों के दिमाग को पूरी तरह से जान पाएंगे बल्कि उनके व्यवहार में आने-वाले उतार-चढ़ाव को भी समझ पाएंगे। यह फीड यूजर की स्मार्टफोन ऐप में स्टोर किए जाएंगे। एलन का कहना है कि यह तकनीक चिप के जरिए इंसानी दिमाग को कंप्यूटर से जोड़ पाएंगे। इसे इसी वर्ष की दूसरी तिमाही में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है। ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस ऐसे करेगा काम: इस तकनीक का नाम न्यूरालिंक है। यह दिमाग में पतले थ्रेड्स के जरिए इलेक्ट्रॉड्स इम्प्लांट करने से संबंधित हैं। यह चिप और वायर के जरिए दिमागी स्कीन में संबंधित होंगे। इस चिप को पॉड से कनेक्ट किया जाएगा। यह रिमूवेबल होंगे। इन्हें कान के पीछे लगाया जएगा। इसे बिना तार के दूसरे डिवाइस से कनेक्ट किया जाएगा। इसके जरिए मस्तिष्क के अंदर की जानकारी डायरेक्टिली स्मार्टफोन या फिर कंप्यूटर में स्टोर की जाएगी।