" /> कनफ्यूशियस-शिष्य संवाद

कनफ्यूशियस-शिष्य संवाद

कनफ्यूशियस एक प्रसिद्ध दार्शनिक तथा समाज सुधारक थे, उनका जन्म चीन के शासदोंग में हुआ। कनफ्यूशियस की गिनती दुनिया के महान विचारकों में की जाती है। इस समाज सुधारक के दार्शनिक, सामाजिक तथा राजनीतिक विचारों पर आधारित मत को कनफ्यूशियसवाद कहा जाता है। कनफ्यूशियस के शिष्यों की संख्या तीन हजार के असपास थी, जिनमें लगभग ७५ शिष्य उच्च कोटि के प्रतिभाशाली विद्वान थे। महान मुनि-साधु, संत-महात्मा, विचारक अपने दैहिक जीवन के अंतिम काल में भी समाज को कुछ न कुछ बहुमूल्य अंतिम संदेश देकर महाप्रयाण करते हैं। ऐसा ही विचारक कनफ्यूशियस के साथ भी हुआ, जब कनफ्यूशियस मृत्यु शैया पर पड़े परलोक गमन की तैयारी कर रहे थे तो उन्होंने अपने कुछ शिष्यों को अपने पास बुलाया। कनफ्यूशियस ने अपने शिष्यों को समझाया दांत कठोर, क्रूर और निर्मम होते हैं इसलिए जल्दी टूट जाते हैं जबकि जीभ कोमल, सरस, सरल है इसलिए उसका अस्तित्व बना रहता है। प्यारे शिष्यों! जीभ की तरह कोमल, सरस और सरल बनो।
-डॉ. मधुसूदन शर्मा, रुड़की-हरिद्वार-उत्तराखंड