" /> कोरोना का कहर और हम : आशा की किरण-प्लाज्मा थेरेपी

कोरोना का कहर और हम : आशा की किरण-प्लाज्मा थेरेपी

कोरोना वायरस से देश क्या पूरी दुनिया ही इस वक्त जूझ रही है। लगातार संक्रमित लोगों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। हमने जिस तरह से अब तक इस महामारी से मुकाबला किया है, उसकी सराहना पूरा विश्व कर रहा है। फिलहाल खुशखबरी यह है कि देश में पांच हजार से भी अधिक लोग कोरोना महामारी की चपेट में आने के बाद ठीक हुए हैं और इस वायरस से संक्रमित लोगों के स्वस्थ होने की दर बढकर 20.66 फीसदी हो गई है जबकि संक्रमण के कारण होने वाली मौतों की दर 3.1 प्रतिशत है। उधर दुनिया के कई हिस्सों में वैक्सीन के ट्रायल हो रहे हैं तो हिंदुस्थान में भी विभिन्न तरीकों पर काम हो रहा है। मसलन प्लाज्मा थेरेपी जो दिल्ली के बाद अब मुंबई में भी लागू हो गई है। प्लाज्मा थेरेपी कोरोना संक्रमितों के इलाज में कारगर साबित हो रही है। वैसे प्लाज्मा थैरेपी कोई नई थैरेपी नहीं है। डॉक्टरों का मानना है कि इस थैरेपी का पूर्व में फायदा भी हुआ और कई वायरल संक्रमण में इसका इस्तेमाल भी हुआ है।
केंद्र सरकार के कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कदम लॉकडाउन की ही वजह से शुक्रवार सुबह 8 बजे से शनिवार सुबह 8 बजे के बीच यानी 24 घंटे में कोरोना के सिर्फ 6 फीसदी नए मामले सामने आए हैं। जब से देश में कोरोना वायरस के मामले रोजाना 100 से ज्यादा सामने आ रहे हैं, तब से लेकर अब तक का यह सबसे कम आंकड़ा है। मुंबई में प्लाज्मा थेरेपी को मुंबई मनपा ने शुभारंभ कर दिया है। मनपा अस्पताल कोविड-19 के मरीजों का प्लाज्मा थेरेपी से इलाज करने के लिए तैयार हैं।
खून से प्लाज्मा अलग करने और ठीक तरह से प्लाज्मा के संग्रहण के लिए नायर अस्पताल में प्लाज्मा फेरिसिस मशीन भी स्थापित की गई है। कोरोना वायरस से ठीक हो चुके लोगों से तीन यूनिट प्लाज्मा अस्पताल ने संग्रह कर लिया है। प्लाज्मा उन्हीं लोगों से लिया जा रहा है, जो कोरोना संक्रमण से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं और प्लाज्मा डोनेट करने में सक्षम है।
प्लाज्मा थैरेपी में कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुके व्यक्तियों के खून से प्लाज्मा निकालकर दूसरे कोरोना वायरस संक्रमित रोगी को चढ़ाया जाता है। दरअसल संक्रमण से ठीक हुए व्यक्ति के शरीर में उस वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बन जाती है और 3 हफ्ते बाद उसे प्लाज्मा के रूप में किसी संक्रमित व्यक्ति को दिया जा सकता है ताकि उसके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने लगे। कोरोना संक्रमण से ठीक हुए एक व्यक्ति के शरीर से एक बार में 400 मिली प्लाज्मा निकाला जा सकता है। इसे दो संक्रमित मरीजों को दिया जा सकता है।
स्वस्थ हो चुके मरीज के शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है जो उस वायरस से लड़ने के लिए होती है। एंटीबॉडी ऐसे प्रोटीन होते हैं जो इस वायरस को खत्म कर सकते हैं. तो वो एंटीबॉडी अगर प्लाज्मा के जरिए किसी मरीज को चढ़ाएं तो यह मरीज के शरीर में मौजूद वायरस का खात्मा कर सकती है। मुंबई में अब तक कोरोना से ठीक हो चुके 5 लोग प्लाज्मा डोनेट करने के लिए आगे आए हैं। इस बारे में ज्यादा से ज्यादा लोग आने चाहिए। क्योंकि अगर पूरी तरह से ठीक हो चुके लोग प्लाज्मा डोनेट करते हैं तो ज्यादा से ज्यादा लोगों का इलाज किया जा सकता है।