" /> खुशखबर!, `२२५ में मिलेगी कोरोना की वैक्सीन!

खुशखबर!, `२२५ में मिलेगी कोरोना की वैक्सीन!

वैश्विक महामारी कोरोना ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है। इसकी वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। मगर इसकी कीमत को लेकर कहा जाता है कि यह काफी महंगी होगी। मगर एक खुशखबर है। लंदन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की ओर से विकसित की जा रही कोरोना वैक्सीन से जुड़ी खबर है। खबर है कि देसी दवा निर्माता कंबनी सीरम ने कोविड-१९ महामारी के खिलाफ तैयार हो रहे टीके की कीमत निर्धारित कर दी है। इसके मुताबिक कंपनी का टीका निम्न और मध्यम आय श्रेणी में आनेवाले देशों में महज ३ डॉलर (करीब २२५ रुपए) में उपलब्ध करवाया जाएगा।
सीरम इंस्टिट्यूट अभी ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी, एस्ट्राजेनेका और नोवावैक्स के वैंâडिडेट्स वैक्सीन का निर्माण कर रही है। अगर ये वैक्सीन आखिर तक सफल साबित हुए तो उन्हें बाजार में उतारा जाएगा। तब वैक्सीन के लिए लाइसेंस और विश्व स्वास्थ्य संगठन से अनुमति ली जाएगी। ध्यान रहे कि सीरम इंस्टिट्यूट में बननेवाली कोरोना वैक्सीन को कोविशील्ड नाम दिया गया है। कंपनी ने वैक्सीन की सप्लाई के लिए ३० जुलाई को वैक्सीन विकसित करनेवाली एक अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स इंक से समझौता किया है। सीरम ने कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए द वैक्सीन अलायंस और द बिल ऐंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ बड़ी डील की है। इस डील से सीरम इंस्टिट्यूट की कोरोना का टीका बनाने की क्षमता बढ़ जाएगी और वो ज्यादा वैक्सीन की तेज उत्पादन कर सकेगी। कंपनी भारत के साथ-साथ कुछ निम्न और मध्यम आय वाले देशों में वैक्सीन के १० करोड़ डोज तुरंत उपलब्ध करवाने की व्यवस्था कर रही है। डील के बाद गेट्स फाउंडेशन को १५ करोड़ डॉलर (करीब १,१२५ करोड़ रुपये) की रिस्क फंडिंग करेगा। मतलब यह कि अगर वैक्सीन आखिरी चरण में असफल रहा तो तब तक बने वैक्सीन का खर्च गावी उठाएगी। यानी, टीका बनकर बर्बाद हो गया तो कंपनी को उसका नुकसान नहीं उठना पड़ेगा बल्कि रिस्क फंडिंग के तहत गावी उसकी भरपाई करेगी।