" /> सितंबर में खत्म होगा सितम! पुणे की वैक्सीन कंपनी ने जगाई उम्मीद

सितंबर में खत्म होगा सितम! पुणे की वैक्सीन कंपनी ने जगाई उम्मीद

# कोरोना क्राइसिस

* तीसरे फेज का ट्रायल शुरू है
* देश के कई अस्पतालों में जारी
* 800 वालेंटियर्स पर चल रहा है

कोरोना वायरस से पूरी दुनिया में त्राहिमाम मचा हुआ है। अभी तक  3,61,000 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। भारत में भी स्तिथि खराब होनी शुरू हो गई है। यूरोप में इंग्लैंड, स्पेन और इटली की हालत तो खराब थी ही, उधर अमेरिका का मंजर सबसे भयानक रूप ले चुका है और वहां मौत का आंकड़ा एक लाख को पार कर चुका है। बड़े-बड़े डॉक्टर्स व माइक्रो वायरोलॉजिस्ट इस बीमारी को समझ नहीं पा रहे कि हो क्या रहा है? ऐसे में लोगों की एकमात्र उम्मीदें वैक्सीन पर टिकी हैं कि वो कब आए और इस मुसीबत से उन्हें छुटकारा मिले। अब जहां अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, चीन में इस बीमारी के वैक्सीन बनाने का काम तेजी से चल रहा है, वहीं भारत से भी दुनिया के लिए अच्छी खबर है। पुणे की वैक्सीन बनानेवाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का वैक्सीन ट्रायल एडवांस स्टेज में पहुंच चुका है। कंपनी तीसरे फेज का ट्रायल शुरू कर चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुणे के कुछ अस्पतालों में फेज 3 का ट्रायल शुरू हो गया है। इसके साथ ही देश के 30 अन्य अस्पतालों में भी ट्रायल होने की खबर है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो आगामी सितंबर तक यह वैक्सीन बाजार में आ सकती है और लोगों को कोरोना वायरस के सितम से छुटकारा मिल जाने की पूरी उम्मीद है।
बता दें कि पुणे की सीरम कंपनी विश्व की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी है और यह 165 देशों को 20 अलग-अलग तरह की वैक्सीन सप्लाई करती है। यहां निर्मित कुल वैक्सीन का करीब 80% हिस्सा निर्यात किया जाता है। कंपनी कोरोना के इस वैक्सीन का निर्माण पुणे स्थित प्लांट से शुरू करेगी। कंपनी जो वैक्सीन बना रही है, उसे फिलहाल  ChAdOx1 nCoV-19 नाम दिया गया है। सीरम सूत्रों का कहना है कि अगर ट्रायल सफल रहा तो वैक्सीन सितंबर-अक्टूबर के बीच में उपलब्ध हो जाएगी। इस वक्त देश में 800 स्वस्थ वालेंटियर्स पर इसका ट्रायल चल रहा है। पिछले महीने कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि कंपनी मई से भारत में ट्रायल शुरू कर रही है। ट्रायल के सफल रहने पर सितंबर-अक्टूबर तक काफी संख्या में वैक्सीन तैयार हो जाएगी। कंपनी भारत में एक हजार रुपए की अफॉर्डेबल कीमत पर इस वैक्सीन को तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
सितंबर तक 2 करोड़ डोज
कंपनी के सीईओ पूनावाला के अनुसार, ‘कोविड-19 के लिए पर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध हो जाए, इसलिए ट्रायल के साथ ही उत्पादन शुरू करने का निर्णय लिया गया है। क्लीनिकल ट्रायल सफल होने की स्थिति में हम पहले छह महीनों तक 40 से 50 लाख डोज हर महीने तैयार करने के लक्ष्य के साथ काम करेंगे। उसके बाद उत्पादन एक करोड़ कर दिया जाएगा। इस हिसाब से सितंबर-अक्टूबर तक 2 से 4 करोड़ वैक्सीन की डोज तैयार हो जाएगी।’
अन्य वैक्सीन का उत्पादन बंद
कंपनी के सीईओ कहते हैं कि यह वैक्सीन पुणे स्थित सीरम कंपनी में ही तैयार की जाएगी। नया प्लांट तैयार करने में 3 हजार करोड़ रुपए और 2 साल का समय लगेगा। इसके लिए हम यहां बाकी सभी वैक्सीन का उत्पादन बंद कर देंगे। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर इस प्रॉजेक्ट में 15 करोड़ डॉलर का खर्च आएगा। हमें उम्मीद है कि सरकार भी पार्टनर बनेगी, जिससे कि हम खर्चे को रिकवर कर सकेंगे। कंपनी डेंगू और न्यूमोनिया जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए मोनोक्लोनल वैक्सीन बना चुकी है।
ऑक्सफोर्ड है पार्टनर
कंपनी पहले भी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मलेरिया वैक्सीन परियोजना पर काम कर चुकी है। इस कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा कि हमारी टीम ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के डॉ. एड्रियन हिल के साथ मिलकर करीब से काम कर रही है।
सबसे बड़ी कंपनी
दुनिया में वैक्सीन के सबसे ज्यादा 1.5 अरब डोज सीरम इंस्टीट्यूट में बनते हैं। उत्पादन और दुनियाभर में बिक्री के लिहाज से सीरम इंस्टीट्यूट दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन कंपनी है। यह कंपनी 53 साल पुरानी है। कंपनी के दो बड़े प्लांट पुणे में हैं। हालांकि, कंपनी के नीदरलैंड्स और चेक रिपब्लिक में भी छोटे प्लांट्स हैं। इस कंपनी में करीब 7,000 लोग काम करते हैं।