" /> २१ दिन नहीं; २०२१ तक कोरोना युद्ध!

२१ दिन नहीं; २०२१ तक कोरोना युद्ध!

कोरोना पीड़ितों की सूची में हिंदुस्थान तीसरे स्थान पर पहुंच गया। पिछले २४ घंटों में देश में कोरोना पीड़ितों की संख्या २५ हजार हो गई है। यह भयानक तो है ही, लेकिन यह उस देश के लिए भी दुर्भाग्यपूर्ण है, जो आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। देश में महाराष्ट्र कोरोना पीड़ितों की सूची में पहले स्थान पर पहुंच गया। इसके बाद तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात और उत्तर प्रदेश का नंबर आता है। महाराष्ट्र ने दो लाख का, तमिलनाडु और दिल्ली ने एक लाख का आंकड़ा पार किया। रविवार को देश में कोरोना पीड़ितों की कुल संख्या ६ लाख ८७ हजार हो गई, यानी लगभग ७ लाख हो गई। यह सबसे अधिक साबित हुआ। इसलिए हमने रूस को इस आंकड़े में हरा दिया। यदि यह इसी तरह जारी रहा, तो हम इस दुर्भाग्यपूर्ण मामले में दुनिया में नंबर एक पर पहुंच जाएंगे। महाभारत का युद्ध अठारह दिनों तक चला। प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा आत्मविश्वास व्यक्त किया था कि हम २१ दिनों में कोरोना युद्ध जीत कर ही रहेंगे, लेकिन १०० दिनों के बाद भी कोरोना मैदान में डटा हुआ है और लड़नेवाले थक चुके हैं। महाराष्ट्र कोरोना से जूझ रहा है और बड़ी संख्या में मरीज ठीक होकर घर लौट रहे हैं, फिर भी कुछ स्थानों पर स्थिति चिंताजनक है। महाराष्ट्र में रविवार को ६,५५५ नए कोरोना मरीज मिले। इसमें ठाणे जिला सबसे आगे है। सिर्फ ठाणे जिले में ही अब तक ४० हजार मरीजों का पंजीकरण किया जा चुका है। ठाणे, कल्याण, डोंबिवली, नई मुंबई, अंबरनाथ, बदलापुर कोरोना के हॉटस्पॉट बने हुए हैं। मरीजों को इलाज और बेड के लिए परेशानी न हो, इसके लिए स्थानीय प्रशासन लगातार काम कर रहा है। उधर पिंपरी-चिंचवड़ में भी कोरोना का खतरा बढ़ गया है। पुणे के महापौर श्री मोहोल व उनका परिवार कोरोनाग्रस्त हो गए हैं। कोरोना ने पिंपरी-चिंचवड के वरिष्ठ नगरसेवक दत्ता साने की बलि ले ली। राजनेता, जनप्रतिनिधि, पुलिस, स्वास्थ्यकर्मी और प्रशासन के प्रमुख लोग कोरोना युद्ध में धराशायी हो रहे हैं। यह सबकुछ जो हो रहा है, ये देश और राज्य के लिए अच्छा नहीं है। लगातार ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं, ‘जैसे लॉकडाउन का नियोजन नहीं किया, वैसा ही अनलॉक के बारे में भी हो रहा है क्या? ये खोलो, वो खोलो, लोगों को बाहर निकलने दो, कितने दिनों तक लोगों को बंद रखना चाहते हो?’ लेकिन घर से बाहर निकलते ही कोरोना के दूत बैठे ही हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कुछ हद तक लॉकडाउन में ढील दी, लेकिन ट्रेनें बंद हैं, सैलून खुले हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि होटल, रेस्तरां और लॉज भी जल्द ही खोले जाएंगे। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सबकुछ ठीक हो गया है और कोरोना संकट खत्म हो गया है। कोरोना रहनेवाला है और हमें कोरोना के साथ जीने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस यात्रा में खतरा है, लेकिन हर किसी को खुद को सुरक्षित रखकर यह खतरनाक यात्रा करनी है। कोरोना का कोई तात्कालिक समाधान नहीं है। कोई भी ये दावा नहीं कर सकता है कि कुछ दवाएं लेने से कोरोना ‘छू-मंतर’ हो जाएगा। फिलहाल अपना खयाल रखना और कोरोना से लड़ने के लिए शरीर तथा दिमाग को तैयार रखना जरूरी है। २०२१ से पहले कोरोना का टीका मिलना संभव नहीं है। दुनियाभर में टेस्ट चल रहे हैं। लेकिन वे सिर्फ प्रयोग हैं। इसका मतलब है कि कोरोना को २०२१ तक सिरहाने रखकर ही सोना होगा। कुल छह हिंदुस्थानी कंपनियां ‘कोविड -१९’ के टीके पर काम कर रही हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि इसमें को-वैक्सीन व ‘जायकोव-डी’ नामक दो टीके लगभग तैयार हैं। दुनिया भर में ११ टीके मानव परीक्षण के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी भी मामले में इनमें से कोई भी टीका २०२१ से पहले आने की संभावना नहीं है। इसलिए हमें इस तथ्य को स्वीकार करना होगा कि सीमा पर चीन का और देश में चीनी वायरस का संकट जारी रहेगा। अब तक चीनी घुसपैठ और उसके विस्तारवाद को रोकने के लिए कई प्रयोग और परीक्षण किए गए। ‘कोरोना के साथ जियो’ ऐसा मंत्र जो कहा जा रहा है, उसी प्रकार ‘हिंदी चीनी भाई भाई’ कहते हुए चीन के साथ जीने की भी तैयारी की गई। फिर भी चीन ने आक्रमण करना नहीं छोड़ा। चीन के साथ जीना संभव नहीं, फिर भी हमें चीन के साथ पड़ोसी व्यवहार निभाना होगा। यही स्थिति चीनी वायरस यानी कोरोना संक्रमण की भी है। कोई कितना भी कहे, लेकिन कोरोना तुरंत हटनेवाला नहीं है। संक्षेप में कहें तो चीन और उसके द्वारा फैलाया गया कोरोना वायरस रहनेवाला ही है। कोरोना के खिलाफ आधुनिक भारत का युद्ध महाभारत से अधिक कठिन है। १८ दिनों में महाभारत का युद्ध समाप्त हो गया था। उस युद्ध में भीष्म पितामह सहित कई योद्धा थे। कोरोना का युद्ध २१ दिनों में समाप्त नहीं हुआ। यह २०२१ तक चलेगा। दुनियाभर में कोरोना मामले में हिंदुस्थान के उच्चांक की ये शुरुआत है। बाकी उद्योग, अर्थव्यवस्था, जीवन स्तर, रोजगार सभी ध्वस्त हो गए हैं। फिर भी लड़ना ही है!