बजट से गाय, गंगा और गोबर गायब

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार केंद्रीय बजट २०१९-२० को संसद में ‘बहीखाता’ के तौर पर पेश किया, इसी के साथ वर्षों से चली आ रही ब्रीफकेस के साथ संसद में वित्त मंत्री के जाने की परंपरा को भी बदल दिया गया। वित्त मंत्री ने ब्रीफकेस के जगह लाल कपड़े में बंधे बजट को प्रस्तुत किया।  बजट में बड़े लोगों के मुकाबले आम आदमी का विशेष ख्याल रखा गया। मोदी सरकार के पूर्व के छह बजटों की मुकाबले इस बार बेजा मुद्दों मसलन गाय, गंगा और गोबर पर ज्यादा फोकस नहीं किया गया। कृषि, रोजगार, शिक्षा और सुरक्षा को ज्यादा महत्व दिया गया। कमोबेश, इन्हीं मुद्दों को देश को दरकार भी है। गाय और गंगा को लेकर मोदी सरकार विपक्षी दलों के निशाने पर रही है, सरकार ने बड़ी चालाकी से इन दोनों मसलों से किनारा कर लिया। बजट में मंदिर-मस्जिद की भी चर्चा नहीं हुई। कुल मिलाकर बजट पूरी तरह से जनसहयोग और जनकल्याण जैसी योजनाओं पर ही केंद्रित रहा। गौरतलब है कि प्रत्येक बजट में खैरात बांटने की सरकारों की परंपराएं रही हैं। पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा फोकट की चीजों को बांटने का चलन रहा था लेकिन अब जनता खुद प्रâी में कुछ नहीं लेना चाहती। जनता ऐसी व्यवस्था चाहती है, जिसे मेहनत करके प्राप्त किया जाए। उस मिथ्य को भी मोदी सरकार ने तोड़ने की कोशिश की है। पूरा बजट न्यू इंडिया को ध्यान में रखकर पेश किया गया। बजट में भविष्य की तस्वीर दिखाई गई। मौजूदा बजट को भाजपा के घटक दलों ने भी सराहा है। लंबे समय से राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई जाने की मांग की जा रही थी। इस बार उसे पेश कर दिया गया। इससे शिक्षा के स्तर में युद्धस्तर पर सुधार होने की संभावना जताई जा रही है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सुधार के लिए इलेक्ट्रॉनिक वाहनों को बढ़ावा देने की कार्ययोजना तैयार की गई है। इस कदम की काफी सराहना हो रही है। बैट्री और इलेक्ट्रॉनिक कारों के चलन से पॉल्यूशन में काफी कमी आएगी।